जापान में नौकरी का सपना दिखाकर लाखों की ठगी, दिल्ली पुलिस ने बरेली से दो साइबर ठगों को दबोचा, Toyota और Nippon Steel के नाम पर चल रहा था फर्जीवाड़ा

रोज़गार की तलाश में भटक रहे नौजवानों को विदेश में ऊँची तनख्वाह वाली नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये ठगने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पूर्वी जिले के साइबर थाने की विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश के बरेली से दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो जापान की बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोज़गार युवाओं को अपना शिकार बना रहे थे।

कौन हैं आरोपी?

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बरेली के सीबी गंज इलाके के निवासी कुश भटनागर (22 वर्ष) और अमित (23 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इनके खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था।

कैसे चलता था ठगी का खेल?

गिरोह का तरीकावार बेहद शातिराना था। आरोपी नौकरी पोर्टलों और अन्य ऑनलाइन स्रोतों से नौकरी तलाश रहे लोगों की व्यक्तिगत जानकारी और संपर्क विवरण जुटाते थे। इसके बाद टोयोटा जापान और निप्पॉन स्टील कॉर्पोरेशन जापान जैसी प्रतिष्ठित विदेशी कंपनियों के नाम से पीड़ितों को फर्जी ईमेल भेजे जाते थे। आरोपी खुद को विदेशी कंपनियों के भर्ती सलाहकार और अधिकारी बताकर पीड़ितों से संपर्क करते थे और दावा करते थे कि उनका बायोडेटा विदेश में आकर्षक नौकरी के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। इसके बाद ये ठग डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन, वीज़ा प्रोसेसिंग, एंबेसी क्लीयरेंस, अटेस्टेशन रिपोर्ट और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किस्तों में मोटी रकम वसूल करते थे। फर्जी ऑनलाइन इंटरव्यू आयोजित कर पीड़ितों को विश्वास दिलाया जाता था कि उनका चयन हो गया है। एक बार भरोसे में लेने के बाद रकम वसूलने का सिलसिला शुरू हो जाता था।

महिला की शिकायत से खुला राज़

इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब एक महिला ने 1.63 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की बारीकी से जाँच शुरू की। वित्तीय जाँच के दौरान पुलिस को एक आरोपी कुश भटनागर का बैंक खाता मिला, जिसमें पीड़ित से ठगी गई रकम जमा थी। यह भी पाया गया कि पैसों को कई खातों में बाँटा गया था, जिसमें सह-आरोपी अमित का खाता भी शामिल था, जिसने कथित रूप से ठगी की रकम निकालने और ट्रांसफर करने में अहम भूमिका निभाई। पूर्वी जिले के साइबर थाने की एक समर्पित टीम बरेली, उत्तर प्रदेश पहुँची और वहाँ व्यापक फील्ड जाँच की। बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और मनी ट्रेल के विश्लेषण के आधार पर दोनों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के अनुसार गिरफ्तार किया गया।

बरेली बना साइबर अपराधियों का गढ़

यह मामला बरेली से जुड़ा पहला साइबर अपराध नहीं है। बरेली रेंज में नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच साइबर अपराध के 506 मामले दर्ज किए गए और 72 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान ठगे गए 7.24 करोड़ रुपये संबंधित खातों में होल्ड कराए गए, जबकि एक करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए।

व्यापक नेटवर्क की जाँच जारी

जाँचकर्ताओं ने स्थापित किया कि दोनों आरोपी एक संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य थे, जो देश भर में फर्जी विदेशी भर्ती योजनाओं के ज़रिए नौकरी तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और और पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है।

सतर्क रहें, इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों और पुलिस का कहना है कि विदेशी नौकरी के नाम पर हो रही इस तरह की ठगी से बचने के लिए ज़रूरी है कि किसी भी अनजान ईमेल या कॉल पर भरोसा न करें। वीज़ा या एंबेसी फीस के नाम पर पैसे माँगने वाले हमेशा ठग होते हैं क्योंकि असली नियोक्ता कभी इस तरह अग्रिम रकम नहीं माँगते। किसी भी विदेशी जॉब ऑफर की पुष्टि संबंधित देश के दूतावास या आधिकारिक वेबसाइट से करें और साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 (राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन) पर शिकायत करें।

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