संसद में परिसीमन बिल पर हंगामा: संसद भवन में कल (16 अप्रैल) शुरू हुए तीन दिवसीय विशेष सत्र में परिसीमन बिल को लेकर जोरदार सियासी घमासान मचा हुआ है। सरकार ने लोकसभा में तीन अहम बिल पेश किए—संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026, परिसीमन बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026। इनका मकसद लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करना और 33% महिला आरक्षण को परिसीमन के बाद 2029 लोकसभा चुनाव से लागू करना है।
कल लोकसभा में बिल पेश करते समय विपक्ष ने भारी हंगामा किया। विपक्ष ने वॉइस वोट की बजाय डिवीजन की मांग की, जिसमें 251 वोट के पक्ष में और 185 के खिलाफ बिल पास हुए। गृह मंत्री अमित शाह ने बहस में हिस्सा लिया और दक्षिण भारतीय राज्यों को आश्वासन दिया कि परिसीमन से उनकी सीटें कम नहीं होंगी, बल्कि बढ़ेंगी। उन्होंने साफ गणित बताते हुए कहा—तमिलनाडु को 20 अतिरिक्त, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 सीटें और मिलेंगी। शाह ने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि दक्षिण के राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा।
आज (17 अप्रैल) की स्थिति: लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर 12 घंटे की मैराथन बहस जारी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने बिल का विरोध किया। ओवैसी ने दावा किया कि इससे “दक्षिण पर उत्तर का राज” हो जाएगा। शाम 4 बजे तीनों बिलों पर वोटिंग प्रस्तावित है।
दक्षिण से दिल्ली तक विरोध:
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बिल की कॉपी जलाकर और काला झंडा दिखाकर राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत कर दी। तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्री भी एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों को राजनीतिक सजा दी जा रही है, जबकि उत्तर भारत (हिंदी पट्टी) को फायदा होगा। विपक्ष इसे “संघीय ढांचे पर हमला” बता रहा है। सरकार का पक्ष है कि परिसीमन 2011 जनगणना या संसद द्वारा तय आंकड़ों के आधार पर होगा और महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए यह जरूरी है। विपक्ष इसे 2029 चुनाव से पहले सियासी फायदे का खेल मान रहा है। संसद का सत्र 18 अप्रैल तक चलेगा। राज्यसभा में भी बिल पेश होने के बाद पूरा मामला और गर्माने वाला है। इस मुद्दे ने देश की राजनीति में North vs South का नया ध्रुवीकरण खड़ा कर दिया है।

