नोएडा मजदूर आंदोलन: सपा प्रतिनिधिमंडल को डीएनडी पर रोका, अखिलेश यादव ने सीएम योगी पर लगाया गंभीर आरोप; कांग्रेस ने कहा मजदूरों की ‘आखिरी चीख’

नोएडा मजदूर आंदोलन: नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन वृद्धि और बेहतर कामकाजी हालात की मांग को लेकर चले मजदूरों के उग्र प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोल दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नोएडा को जानबूझकर बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “नोएडा में क्या हो रहा है, मुख्यमंत्री से बेहतर कोई नहीं जानता। और जानबूझकर नोएडा को खराब करना चाहते हैं। नोएडा को बर्बाद करना चाहते हैं। जहाँ पर सबसे ज्यादा उद्योग-कारखाने लगे थे, लग सकते थे, लगेंगे भी भविष्य में, वहाँ का माहौल खराब करने की जिम्मेदारी अगर किसी ने ली है, तो वह मुख्यमंत्री ने खुद ली है।”

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है कि माहौल खराब करना है, तो आप किससे उम्मीद करोगे? मजदूरों से भी नहीं मिलने देना चाहते, जिनके साथ अन्याय किया है। सुनने में आया है कि पुलिस की गोली से एक महिला की जान गई है, उसको यह छिपाना चाहते हैं। क्योंकि जब डेलिगेशन वहाँ जाएगा, तो मजदूर सच्चाई बता देंगे। बहुत सारे मजदूरों के साथ अन्याय हुआ है, वीडियोज में से निकाल करके किसी को भी पकड़ करके बंद कर दे रहे हैं।

सपा प्रतिनिधिमंडल की ताजा स्थिति: अखिलेश यादव के निर्देश पर आज 17 अप्रैल को सपा का 10-12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ित मजदूरों से मिलने नोएडा पहुंचा। इसकी अगुवाई विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी, जिला अध्यक्ष सुधीर भाटी, महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता, पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर, विधायक अतुल प्रधान, पंकज कुमार मलिक, पूर्व एमएलसी शशांक यादव और अन्य शामिल हैं।

लेकिन पुलिस ने लखनऊ में माता प्रसाद पांडेय को हाउस अरेस्ट करने की कोशिश की। वे घेराबंदी से पहले दिल्ली पहुंच गए। प्रतिनिधिमंडल डीएनडी पर पहुंचा तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया और मजदूरों से मुलाकात नहीं होने दी। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मजदूरों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।  सपा का कहना है कि नोएडा के सेक्टर 59, 60, 62 समेत कई इलाकों में 10-11 हजार रुपये वेतन पर 10-12 घंटे काम कराया जा रहा है, साप्ताहिक छुट्टी भी नहीं दी जाती। प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस और हिंसा हुई, जिसमें सैकड़ों मजदूर प्रभावित हुए।

कांग्रेस का रुख और बयान: कांग्रेस ने भी मजदूरों का पूरा समर्थन किया है। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आखिरी चीख थी… मैं हर ऐसे मजदूर के साथ खड़ा हूं।” उन्होंने महंगाई, स्थिर वेतन और कर्ज के बोझ को वजह बताया।  उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पुलिस का लाठीचार्ज और आंसू गैस मजदूरों की भूख मिटा नहीं सकता। उन्होंने इसे सरकार की ‘एंटी-वर्कर’ नीति बताया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते ने स्थिति को ‘बॉन्डेड लेबर से भी बदतर’ करार दिया। अन्य नेता मुमताज पटेल ने कहा कि सरकार ने मजदूरों की आवाज अनसुनी की, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

सरकार का पक्ष: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शन को ‘साजिश’ बताया। सरकार ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है (कुशल मजदूरों के लिए 13,940-16,868 रुपये मासिक) और उच्चस्तरीय समिति गठित की। पुलिस ने 300 से ज्यादा गिरफ्तारियां कीं, 7 एफआईआर दर्ज कीं और दावा किया कि 45 से ज्यादा गिरफ्तार लोग असली मजदूर नहीं थे। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार पूंजीपतियों का पक्ष ले रही है और मजदूरों का शोषण कर रही है। सपा और कांग्रेस ने मांग की है कि मजदूरों से बातचीत कर उनके मुद्दे हल किए जाएं, न कि दबाए जाएं।

ताजा अपडेट: सपा प्रतिनिधिमंडल को मजदूरों से मिलने की अनुमति नहीं मिली है। राजनीतिक गर्मी बढ़ती जा रही है और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा बड़ा बनता दिख रहा है। मजदूर आंदोलन अभी भी कुछ क्षेत्रों में जारी है।

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