प्रीत विहार में पार्किंग विवाद ने ली जान: दिल्ली के शांत प्रीत विहार इलाके में एक मामूली पार्किंग विवाद ने खूनी रूप ले लिया। रविवार देर रात (19-20 अप्रैल 2026) को हुई इस घटना में चांदनी चौक के कपड़ा कारोबारी पंकज नय्यर (34) की सीने में गोली लगने से मौत हो गई। आरोपी गौरव शर्मा ने कथित तौर पर पिस्तौल निकालकर फायरिंग की। पुलिस ने मुख्य आरोपी गौरव शर्मा समेत उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना ए-144, प्रीत विहार की एक पांच मंजिला इमारत में हुई। पीड़ित के बड़े भाई पारस नय्यर (43) दूसरे तल पर रहते हैं, जबकि गौरव शर्मा किराएदार के रूप में पहले तल पर रह रहा था। विवाद की शुरुआत गाड़ी पार्किंग को लेकर हुई। गौरव के पास बीएमडब्ल्यू, फॉर्च्यूनर और एक अन्य गाड़ी थीं, जबकि नय्यर परिवार के पास बालेनो और स्विफ्ट थीं। ग्राउंड फ्लोर की पार्किंग जगह को लेकर पहले भी कहासुनी हो चुकी थी।
रात करीब 2 बजे के आसपास पारस नय्यर जब अपने परिवार के साथ डिनर से लौटे तो विवाद भड़क उठा। स्थिति बिगड़ने पर पारस ने नोएडा में रह रहे अपने भाई पंकज को फोन कर मौके पर बुलाया। पंकज समझौता कराने पहुंचे, लेकिन बहस तेज हो गई। आरोप है कि गौरव शर्मा ने पिस्तौल निकालकर पंकज के सीने में गोली मार दी। गोली लगते ही पंकज घायल हो गए और उन्हें नजदीकी मलिक रेडिक्स हेल्थ केयर अस्पताल (निर्माण विहार) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस को दो पीसीआर कॉल्स मिलीं, जिनमें झगड़े और फायरिंग की सूचना दी गई थी।
परिवार के मुताबिक, पंकज नोएडा सेक्टर-121 में अपनी पत्नी दिव्या (7 महीने की गर्भवती), 5-6 साल के बेटे और बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहते थे। वे चांदनी चौक में पारिवारिक कपड़ा व्यापार संभाल रहे थे और परिवार की रीढ़ थे। पत्नी दिव्या ने बताया कि उनका बेटा लगातार पिता के बारे में पूछ रहा है। परिवार ने न्यायपालिका से आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि गौरव पर पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसके साथियों से परिवार को खतरा हो सकता है।
प्रीत विहार पुलिस स्टेशन में हत्या (बीएनएस धारा 103) समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने मुख्य आरोपी गौरव शर्मा (प्रॉपर्टी डीलर, शक्करपुर में काम करता है) को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसके दो साथियों सुनील शर्मा और सिद्धार्थ को भी हिरासत में लिया गया। जांच में सामने आया कि गौरव ने अपने भाई की बंदूक का इस्तेमाल किया।
परिवार और स्थानीय लोगों ने घटना को “जंगल राज” करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली जैसे महानगर में अवैध हथियार इतनी आसानी से कैसे उपलब्ध हो जाते हैं। पड़ोसियों की निष्क्रियता पर भी नाराजगी जताई गई—शोर सुनकर भी कोई मदद के लिए बाहर नहीं निकला। आरडब्ल्यूए और परिजनों ने थाने पर प्रदर्शन भी किया।
यह घटना राजधानी में बढ़ते पार्किंग संकट की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में पार्किंग की कमी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, जिससे छोटे-छोटे विवाद हिंसक रूप ले रहे हैं। परिवार की अपील है कि इस मामले में जल्द से जल्द सख्त सजा मिले ताकि अपराधियों में कानून का खौफ बने और ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं। पुलिस आगे की जांच कर रही है और अवैध हथियारों के स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई है। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और नागरिकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

