मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक विकास सामने आया है। इजरायल और लेबनान ने युद्धविराम (सीजफायर) लागू करने पर सहमति जताई है, जिससे ईरान के साथ व्यापक समझौते की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध नीति पर अंकुश लगाने वाला एक प्रस्ताव पास कर दिया, जो उनके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। समाचार स्रोतों के अनुसार, अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान (हिजबुल्लाह के माध्यम से) के बीच पूर्ण युद्धविराम का समझौता हुआ है। इसके तहत हिजबुल्लाह लेबनान के दक्षिणी हिस्से (लितानी नदी के दक्षिण) से अपने लड़ाकों को हटाने और हमले रोकने पर राजी हो गया है, जबकि इजरायल बेरूत और उसके उपनगरों पर हमले नहीं करेगा। यह समझौता पिछले कई हफ्तों के संघर्ष के बाद आया है, जिसमें हजारों लोग मारे गए और लाखों विस्थापित हुए। यह युद्धविराम ईरान के साथ चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत को नई गति दे सकता है। ईरान ने पहले लेबनान में इजरायली कार्रवाई को लेकर अमेरिका से बातचीत निलंबित कर दी थी, लेकिन अब उम्मीद जताई जा रही है कि क्षेत्रीय शांति की दिशा में प्रगति होगी। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह “पायलट जोन” बनाने की दिशा में पहला कदम है।
अमेरिकी संसद का ट्रंप को झटका
इसी बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 215-208 के अंतर से एक युद्ध शक्ति प्रस्ताव (War Powers Resolution) पास कर दिया, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने या सैनिकों को वापस बुलाने का निर्देश दिया गया है। चार रिपब्लिकन सांसदों (ब्रायन फिट्जपैट्रिक, थॉमस मैसी, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन) ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया। यह प्रस्ताव मुख्य रूप से प्रतीकात्मक है, लेकिन यह ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति के खिलाफ कांग्रेस में बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। युद्ध फरवरी 2026 में शुरू हुआ था और इसमें अमेरिकी सैनिकों की मौत के साथ-साथ तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक आर्थिक प्रभाव देखा गया है। सीनेट में पास होने की संभावना कम है और ट्रंप इसे वीटो कर सकते हैं, लेकिन यह राजनीतिक दबाव जरूर बढ़ाएगा।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
ईरान-इजरायल संघर्ष के विस्तार के रूप में लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई तेज हुई थी। मार्च से अब तक लेबनान में 3400 से अधिक मौतें हुई हैं। ईरान ने लेबनान में इजरायली हमलों को पूरे क्षेत्रीय संघर्ष का हिस्सा बताते हुए अमेरिका से बातचीत रोक दी थी। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति प्रमुख मुद्दे हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हाल ही में कुछ हमलों की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन युद्धविराम की कोशिशें सकारात्मक संकेत दे रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि लेबनान में स्थिरता ईरान सौदे की कुंजी साबित हो सकती है। तेल की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव है। यदि यह युद्धविराम टिका रहा, तो मध्य पूर्व में शांति की नई किरण दिख सकती है।स्थिति तेजी से बदल रही है। आगे की अपडेट के लिए विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर नजर रखें।

