सरकार ने 2 मई को किया था सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का ढोल, असली मुसीबत में रही खामोशी — उठे गंभीर सवाल
राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में गुरुवार की दोपहर अचानक आसमान में घटाटोप अंधेरा छा गया और देखते ही देखते तेज आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। मौसम विभाग (IMD) ने आज 4 जून के लिए दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया था। लेकिन यह अलर्ट केवल मौसम विभाग की वेबसाइट तक ही सिमटा रहा आम जनता के मोबाइल फोन पर कोई इमरजेंसी अलर्ट नहीं पहुंचा। तेज हवाओं के साथ भारी बारिश ने पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को प्रभावित किया। पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार, भजनपुरा और गोकलपुरी जैसे इलाकों में तेज धूलभरी आंधी चली, अचानक उठे धूल के गुबार से विजिबिलिटी कम हो गई। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी तेज आंधी चली, कई जगहों से पेड़ गिरने की खबरें आईं, जिससे ट्रैफिक प्रभावित हुआ और बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई।

तबाही का मंजर: पेड़ उखड़े, जाम लगे, बिजली गुल
दीनदयाल उपाध्याय मार्ग से लेकर आईटीओ के व्यस्त रास्तों पर मौसम का रौद्र रूप देखने को मिला। तेज हवाओं के कारण आईटीओ से भाजपा मुख्यालय की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर एक भारी-भरकम पेड़ उखड़कर सीधे सड़क पर आ गिरा, जिसकी चपेट में एक चलती गाड़ी भी आ गई। पेड़ गिरने की घटनाओं के कारण इन रास्तों पर आवाजाही बंद करनी पड़ी, जिससे दफ्तरों से घर लौट रहे हजारों लोग बीच रास्ते में फंस गए। तेज हवाओं की वजह से पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। पिछले कई दिनों से 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने हुए तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई।
सरकारी ‘अलर्ट सिस्टम’ का सच: ढोल बड़ा, आवाज़ गुम
यह घटना उस वक्त और शर्मनाक हो जाती है जब इसे महज एक महीने पहले की एक सरकारी घोषणा के साथ रखकर देखा जाए। 2 मई 2026 को भारत ने अपने नए सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम का देशभर में परीक्षण किया था, जिसमें देशभर के मोबाइल फोन पर तेज आवाज के साथ अलर्ट भेजे गए थे। इस परीक्षण के बाद सिस्टम को पूरे देश में लागू करने और आपदाओं की स्थिति में कई भारतीय भाषाओं में सभी मोबाइल हैंडसेट पर आपातकालीन अलर्ट भेजने की घोषणा की गई थी। NDMA ने दावा किया था कि यह SACHET प्रणाली जो C-DOT द्वारा विकसित की गई है, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह क्रियाशील है और अब तक 134 अरब से अधिक एसएमएस अलर्ट भेजे जा चुके हैं। लेकिन गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर में आए तूफान के दौरान आम लोगों के फोन पर एक भी अलर्ट नहीं आया, न एसएमएस, न सेल ब्रॉडकास्ट।
‘टेस्ट में पास, असल इम्तिहान में फेल’
2 मई के परीक्षण के दौरान दिल्ली-एनसीआर और देश की सभी राज्य राजधानियों को इस परीक्षण में शामिल किया गया था, जिसमें नागरिकों को घबराने से मना किया गया था क्योंकि यह एक अभ्यास मात्र था। तब गृह मंत्री अमित शाह और दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस प्रणाली को देश की आपदा प्रबंधन क्षमता में एक ऐतिहासिक कदम बताया था। लेकिन आज जब असली खतरा आया तो यह सिस्टम कहीं नजर नहीं आया। सोशल मीडिया पर लोगों के गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “2 मई को फोन बजाकर हमें डराया, आज जब सच में तूफान आया तो फोन खामोश रहा। इससे बड़ा मज़ाक क्या होगा?” दूसरे ने व्यंग्य किया, “ड्रेस रिहर्सल जबरदस्त, शो कैंसिल।”
विशेषज्ञों की राय: चेतावनी को ‘क्रियाशील चेतावनी’ में बदलना होगा
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि IMD का पूर्वानुमान जारी करना और नागरिकों तक उसे पहुंचाना दोनों अलग-अलग बातें हैं। पिछले हफ्ते 30 मई को दिल्ली-एनसीआर में आए तूफान के दौरान कुछ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया था जिसमें 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवाओं की चेतावनी थी। उस दौरान भी सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट की प्रभावशीलता पर सवाल उठे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी अवसंरचना तैयार कर लेना पर्याप्त नहीं है, इस सिस्टम को मौसम विभाग के वास्तविक अलर्ट से स्वतः जोड़ा जाना चाहिए, ताकि जब भी कोई ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी हो, वह तुरंत हर नागरिक के फोन तक पहुंचे।
मांग: संसद में उठे सवाल, जवाब दे सरकार
विपक्षी दलों ने इस घटना पर केंद्र सरकार को घेरते हुए मांग की है कि संसद में यह बताया जाए कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया यह अलर्ट सिस्टम आज खामोश क्यों रहा। उन्होंने NDMA और दूरसंचार मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि यदि यह प्रणाली केवल ड्रिल के लिए बनाई गई है तो जनता को सच बताया जाए। दिल्ली सरकार से भी सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने IMD के येलो अलर्ट के बाद कोई स्वतंत्र कदम उठाया या वह भी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रही।
पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी है यह अलर्ट?
दिल्ली-एनसीआर में रेतीले तूफान आम तौर पर राजस्थान के सूखे इलाकों में उठते हैं, खासकर मानसून से पहले के गर्म महीनों अप्रैल, मई और जून में। अवैध खनन, पहाड़ियों की कटाई और अनियंत्रित शहरीकरण ने इन तूफानों के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा कवच को कमज़ोर कर दिया है। ऐसे में जब प्राकृतिक ढाल कमजोर हो रही हो, तो तकनीकी ढाल यानी इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम, का दुरुस्त होना और भी जरूरी हो जाता है।

