नोएडा कचरा संकट से शहर बेहाल: अनुबंधित कंपनी पर रोष, कई वेंडरों वाला मॉडल लागू करने की मांग

नोएडा की स्वच्छता व्यवस्था पिछले कुछ हफ्तों से गड़बड़ा रही है और हालिया हड़तालों ने शहर में कचरे के ढेर लगा दिए हैं। सेक्टर-105 के RWA अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) ने रविवार को कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अनुबंधित सफाई कंपनी की बार-बार की हड़तालों और अनियमित सेवाओं के कारण निवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने नोएडा प्राधिकरण से दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त व दंडात्मक कार्रवाई तथा उसे ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठाई है। दिव्य कृष्णात्रेय ने बताया कि कई बार शिकायत के बाद भी कंपनी ने व्यवस्था सामान्य नहीं की और उसका रवैया गैर-जिम्मेदाराना तथा जनता को बंधक बनाने वाला रहा। “हमारी कॉल्स और शिकायतों के बावजूद कंपनी ने समय पर कचरा नहीं उठाया, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है,” दिव्य ने कहा। उन्होंने कहा कि यदि प्राधिकरण ने तत्काल कदम नहीं उठाए तो RWA और नागरिक मिलकर और कड़े कदम उठाने के लिए विवश होंगे। महासचिव राजीव दुबलिश ने कहा कि पूरे शहर की सफाई केवल एक कंपनी के भरोसे छोड़ना “प्राधिकरण की बड़ी भूल” रही है। उन्होंने कहा, “एक से अधिक वेंडर होने पर कोई भी कंपनी अपनी मनमानी से पूरे शहर की व्यवस्था बाधित नहीं कर पाएगी। बहु-कंपनी मॉडल लागू करने से प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही बढ़ेगी, और आपातकाल में बैकअप व्यवस्था भी रहेगी।” राजीव ने प्राधिकरण से तत्काल पारंपरिक टेंडर प्रक्रिया पर फिर से विचार कर बहु-कंपनी मॉडल को लागू करने का आग्रह किया।

निवासियों का गुस्सा और स्वास्थ्य चिंता

सेक्टरों व सोसायटियों में जमा कचरे के कारण बदबू और मच्छर-जनित बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। कई होम्सटेशन समितियों ने स्थानीय अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी हैं और कॉल टू एक्शन के तहत सफाई न होने पर आवाज उठाने की बात कही है। एक वरिष्ठ निवासी ने बताया, “सही समय पर कचरा न उठाने से रोज़मर्रा की ज़िन्दगी प्रभावित हो रही है — स्कूलों के बाहर, सड़कों पर और पीने के पानी के निकट कचरा जमा हो रहा है।”

प्राधिकरण की मौजूदा स्थिति और संभावित कदम

नोएडा प्राधिकरण ने अभी तक इस बाबत आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से पहले मामले की जांच शुरू कर दी है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन मिलने पर अनुबंध रद्द या जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं प्रवधानों पर पुनर्विचार करते हुए बहु-कंपनी मॉडल पर विचार करने की बात भी कही जा रही है ताकि सेवा की विश्वसनीयता और मानक सुनिश्चित किए जा सकें।

विशेषज्ञों की राय

नगरपरिवहन और वैस्ट मैनेजमेंट विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े शहरी क्षेत्रों में बहु-वेंडर मॉडल अधिक प्रभावी रहता है क्योंकि यह जोखिम बाँटता है और आपातस्थिति में सर्विस बाधा को कम करता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि टेंडर शर्तों में स्पष्ट पेनल्टी क्लॉज, सर्विस-लेवल एग्रीमेंट (SLA), और महीनेवार प्रदर्शन रिपोर्टिंग जैसी शर्तें जोड़ी जाएँ। साथ ही, सामुदायिक निगरानी और आरडब्ल्यूए के साथ समन्वय सुविधाजनक बनाने से सेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

आगे का परिदृश्य

RWA सेक्टर-105 ने नोएडा प्राधिकरण से शीघ्र और कड़े निर्देश जारी करने की अपील की है, जिसमें अनुबंधित कंपनी की सेवाओं का तुरंत ऑडिट, उल्लंघन पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई और भविष्य के लिए बहु-कंपनी मॉडल लागू करने की रूपरेखा शामिल हो। यदि प्राधिकरण ने इन मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं की तो RWA और नागरिक प्रतिनिधि आगे सार्वजनिक विरोध एवं कानूनी कदम उठाने का संकेत दे चुके हैं।

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