महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से भूचाल आ गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को करारा झटका लगते हुए उसके 6 लोकसभा सांसद कल दोपहर 3 बजे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से शामिल होने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह कदम UBT गुट के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान साबित होगा और शिंदे गुट को एंटी-डिफेक्शन कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा।
घटनाक्रम और बागी सांसद
UBT के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने पिछले दिनों पार्टी की संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। ये सांसद हैं: संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी), नागेश पाटिल आष्टिकर (हिंगोली) और ओमप्रकाश राजे निंबालकर (धाराशिव)। इनमें से नागेश पाटिल आष्टिकर और ओमराजे निंबालकर ने पहले ही सार्वजनिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने की घोषणा कर दी है। आष्टिकर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि 18 जून के बाद उनके और अन्य बागी सांसदों के खिलाफ की गई टिप्पणियों ने उनका मन बदल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उद्धव ठाकरे या संजय राउत से नाराज नहीं हैं, लेकिन विकास कार्यों के लिए फंड की कमी और विपक्ष में होने की मजबूरी ने उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर किया। निंबालकर ने भी अपने समर्थकों से चर्चा के बाद फैसला लिया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष में रहकर ही जनता की समस्याएं हल की जा सकती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ चर्चा का जिक्र किया तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की जानकारी दी।
‘ऑपरेशन टाइगर’ की सफलता
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विकास को ‘ऑपरेशन टाइगर’ की सफलता बताया। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सफल हो गया है, शरीर स्वस्थ है। चिंता करने की जरूरत नहीं। जो आत्मचिंतन करना चाहते हैं, करें।” फडणवीस ने शिंदे गुट को बाल ठाकरे की असली शिवसेना करार दिया। एकनाथ शिंदे ने भी कहा, “जब मैं ऑपरेशन करता हूं तो उसे पूरा करके छोड़ता हूं।” उन्होंने बागी सांसदों पर UBT गुट द्वारा की गई आलोचना का जिक्र करते हुए “केमिकल लोचा” की बात कही।
उद्धव ठाकरे का पलटवार
उद्धव ठाकरे ने मुंबई के भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे हतोत्साहित नहीं हैं। उन्होंने BJP पर शिवसेना को “चुराने या खत्म करने” की कोशिश का आरोप लगाया और दावा किया कि “मेरे नेतृत्व वाली शिवसेना ही असली शिवसेना है।” उन्होंने बागी सांसदों को गद्दार करार दिया और उनके लिए प्रचार करने पर खेद जताया।
राजनीतिक प्रभाव
यह घटनाक्रम 2022 के शिंदे विद्रोह की याद दिलाता है, जब शिंदे गुट ने UBT को तोड़ा था। अब लोकसभा में UBT की ताकत काफी कमजोर हो जाएगी। शिंदे गुट को न केवल दो-तिहाई बहुमत मिलेगा बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भी इसका असर दिख सकता है। UBT गुट ने बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन अब औपचारिक विलय तय माना जा रहा है। यह विकास महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा देगा। शिंदे-फडणवीस गठबंधन मजबूत होता दिख रहा है, जबकि UBT गुट को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। कल दोपहर 3 बजे होने वाले कार्यक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है।सूत्रों के अनुसार, यह विलय एंटी-डिफेक्शन कानून से बचाव के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

