नोएडा प्राधिकरण की मिक्स लैंड यूज पॉलिसी: “खास” के लिए राहत, “आम” के लिए आफत,कन्वर्जन हुआ अब और भी महंगा

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण द्वारा हाल ही में प्रभावी की गई ‘मिक्स लैंड यूज पॉलिसी’ (मिश्रित भूमि उपयोग नीति) ने आम आवासीय भूखंड स्वामियों की चिंता बढ़ा दी है। नीति के विश्लेषण से साफ है कि जहाँ उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रियायतें दी गई हैं, वहीं रिहायशी क्षेत्रों में रहने वाले आम लोगों के लिए अपने भूखंड का कन्वर्जन कराना अब एक खर्चीला सौदा साबित होगा।

कन्वर्जन का गणित: आवासीय बनाम औद्योगिक

इस नई नीति के तहत आवासीय भूखंड के एक हिस्से को व्यावसायिक (Commercial) उपयोग में बदलने के लिए जो शुल्क निर्धारित किया गया है, वह काफी अधिक है।

  • आवासीय भूखंड (Residential): यदि कोई व्यक्ति अपने आवासीय प्लॉट के कुछ हिस्से पर कमर्शियल गतिविधि करना चाहता है, तो उसे उस सेक्टर के आवासीय सर्किल रेट और वाणिज्यिक सर्किल रेट के बीच के अंतर का 50 प्रतिशत शुल्क प्राधिकरण को देना होगा।
  • औद्योगिक भूखंड (Industrial): इसके उलट, उद्योगों के लिए यह नीति काफी उदार है। औद्योगिक भूखंडों पर मिक्स लैंड यूज के लिए सर्किल रेट के अंतर का मात्र 25 प्रतिशत शुल्क ही देना होगा।

आम जनता पर पड़ेगा बोझ

इस भारी अंतर का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो अपने छोटे आवासीय भूखंडों में छोटी दुकान या ऑफिस खोलकर जीविका चलाना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 50 प्रतिशत की लेवी (Levy) इतनी अधिक है कि मध्यम वर्ग के लिए इसे वहन करना लगभग असंभव होगा। इससे लोग कानूनी तरीके से कन्वर्जन कराने के बजाय हतोत्साहित होंगे, जिससे अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

“खास” के लिए राहत, “आम” के लिए आफत?

नीति के प्रावधानों को देखकर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस पॉलिसी का ढांचा कुछ खास वर्ग या बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहुँचाने के लिए तैयार किया गया है। जहाँ उद्योगों को आधी दर पर कन्वर्जन की सुविधा मिल रही है, वहीं रिहायशी सेक्टरों में रहने वाले लोग दोहरी मार झेल रहे हैं। नोएडा के पॉश सेक्टरों में आवासीय और वाणिज्यिक सर्किल दरों में जमीन-आसमान का अंतर है, ऐसे में 50 प्रतिशत की भारी रकम चुकाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

सेक्टरों के विकास पर असर

प्राधिकरण का तर्क है कि इस नीति से शहर में व्यवस्थित तरीके से मिक्स लैंड यूज को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन धरातल पर स्थिति अलग दिख रही है।

मुख्य बिंदु:

  • आवासीय से कमर्शियल कन्वर्जन पर 50% सर्किल रेट अंतर का शुल्क।
  • औद्योगिक से मिक्स यूज कन्वर्जन पर केवल 25% का शुल्क
  • बढ़ते शुल्क के कारण छोटे भूखंड स्वामियों में निराशा।

नोएडा प्राधिकरण की इस नीति ने एक बार फिर विकास के मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के नियोजित विकास के नाम पर आवासीय सेक्टरों में कन्वर्जन को इतना महंगा बना दिया गया है कि आम नागरिक अब इस विकल्प से दूरी बनाने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्राधिकरण इस विसंगति को दूर करने के लिए शुल्क दरों में कोई संशोधन करता है या नहीं।

 

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