नोएडा प्राधिकरण के सिविल ठेकों में कथित अनियमितता, जीएम के पीएस समेत 4 कर्मचारियों से पूछताछ

नोएडा/गौतमबुद्ध नगर। नोएडा प्राधिकरण के सिविल से जुड़े ठेकों में कथित अनियमितताओं के मामले में जांच एजेंसियों ने सोमवार-मंगलवार (28-29 सितंबर 2026) को चार कर्मचारियों को पूछताछ के लिए उनके घरों से दस्तावेजों सहित उठाया है। इनमें प्राधिकरण के महाप्रबंधक (जीएम) के निजी सचिव (पीएस)/निजी सहायक (पीए) और सर्किल-10 के सुपरवाइजर भी शामिल बताए जा रहे हैं। फिलहाल उनसे गहन पूछताछ चल रही है।

सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस टीम ने सोमवार को सेक्टर-6 में कार्रवाई करते हुए जीएम आर.के./ए.के. अरोड़ा (अशोक कुमार अरोड़ा) के निजी सहायक बताए जा रहे रजनीश त्यागी और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया। दोनों के पास लाखों रुपये की नकदी मिलने की प्रारंभिक सूचना है, हालांकि सटीक राशि और अन्य बरामदगी का आधिकारिक ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। चारों कर्मचारी पिछले कई दिनों से एजेंसियों की निगरानी में थे। उनके कामकाज, संबंधित फाइलों और दस्तावेजों की गहन जांच के बाद उन्हें पूछताछ के लिए ले जाया गया। एजेंसियां कर्मचारियों से मिले दस्तावेजों का प्राधिकरण के रिकॉर्ड से मिलान कर रही हैं।

जांच सिर्फ ठेकों तक सीमित नहीं है। एजेंसियां भंगेल और सलारपुर में बनी अवैध इमारतों से जुड़े कथित पैसों के लेनदेन (कैश फ्लो) की भी जांच कर रही हैं। यह देखा जा रहा है कि अवैध निर्माण के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और इससे जुड़े लोगों के बीच पैसों का लेनदेन किस स्तर पर हुआ। एजेंसियां ठेका प्रक्रिया, फाइलों पर हुए फैसले, भुगतान और अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका खंगाल रही हैं। मामला प्राधिकरण के एक बड़े अधिकारी के साथ मिलकर कथित अनियमितता के जरिए ठेकेदार को फायदा पहुंचाने से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्राधिकरण के कुछ और अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

महाप्रबंधक ए.के. अरोड़ा प्राधिकरण में सिविल विभाग से जुड़े रहे हैं और पिछले कुछ समय में विभिन्न सेक्टरों के निरीक्षण तथा सफाई-व्यवस्था संबंधी कार्यों में सक्रिय रहे हैं। विजिलेंस की इस कार्रवाई के पीछे की सटीक शिकायत या आरोप अभी स्पष्ट नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार संबंधी सूचना के आधार पर हुई।

अभी तक नोएडा प्राधिकरण या विजिलेंस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले की आगे जांच जारी है। पूछताछ के दौरान क्या खुलासे होते हैं, नकदी का स्रोत क्या है और क्या कोई और नाम सामने आता है, यह स्पष्ट होने पर ही पूरी तस्वीर सामने आएगी।

नोएडा प्राधिकरण पिछले कुछ वर्षों में कई घोटालों और अनियमितताओं के आरोपों से घिरा रहा है। सुपरटेक ट्विन टावर्स प्रकरण, मुआवजा संबंधी मामले, भूमि आवंटन और अन्य मुद्दों पर जांच एजेंसियों की नजर रही है। ऐसे में विजिलेंस की यह नई कार्रवाई प्राधिकरण के अंदर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है। जांच के नतीजे आने तक रजनीश त्यागी और अन्य व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट नहीं हो पाई है। अधिकारी स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

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