Half of the UPPCB posts are vacant: नोएडा-गाजियाबाद दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार, फिर भी प्रदूषण बोर्ड स्टाफ संकट से जूझ रहा

Half of the UPPCB posts are vacant: नोएडा। देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा और गाजियाबाद भले ही दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हों, लेकिन इनकी हवा को साफ रखने की जिम्मेदारी संभालने वाला उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) खुद गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। एक RTI (सूचना के अधिकार) क्वेरी से हुए खुलासे ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वीकृत पदों में से आधे खाली

पर्यावरणविद् अमित गुप्ता द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में सामने आया कि UPPCB में स्वीकृत 732 पदों में से वर्तमान में केवल 369 पद ही भरे हुए हैं। यानी 363 पद, यानी लगभग आधा कार्यबल, खाली पड़ा है। स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 2024 में 35 और 2025 में 30 कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए, जबकि इसी अवधि में भर्ती के नाम पर 2024 में सिर्फ 45 और 2025 में महज एक कर्मचारी की नियुक्ति हो सकी। यानी सेवानिवृत्ति की रफ्तार के मुकाबले नई भर्तियां नाममात्र की रहीं।

बजट खर्च करने में भी पिछड़ा बोर्ड

स्टाफ की इस भारी कमी का सीधा असर बोर्ड की कार्यक्षमता पर पड़ा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में UPPCB को 155 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था, जिसमें से बोर्ड सिर्फ 111 करोड़ रुपये यानी करीब 70% ही खर्च कर पाया। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष के 76% खर्च से भी कम है, जो दर्शाता है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपलब्ध धन का इस्तेमाल साल-दर-साल कम होता जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि जब निगरानी और क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त इंजीनियर व वैज्ञानिक अधिकारी ही नहीं होंगे, तो योजनाओं पर बजट खर्च कैसे हो पाएगा।

नोएडा-गाजियाबाद दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में

IQAir की 2025 वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट के मुताबिक, गाजियाबाद 183 के औसत AQI के साथ दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर रहा, जबकि नोएडा (172) और ग्रेटर नोएडा (168) भी शीर्ष 10 में शामिल रहे। इससे भी चिंताजनक बात यह रही कि गाजियाबाद जिले का लोनी क्षेत्र 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के वार्षिक औसत PM2.5 स्तर के साथ देश का सबसे प्रदूषित कस्बा बनकर उभरा। रिपोर्ट के अनुसार पूरे NCR क्षेत्र में PM2.5 का स्तर इस प्रकार दर्ज किया गया, दिल्ली: 99.6, गाजियाबाद: 89.2, नोएडा: 80.5, ग्रेटर नोएडा: 77.2| ये चारों शहर मध्य और दक्षिण एशिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहे, जो क्षेत्र में वायु गुणवत्ता संकट की गंभीरता को उजागर करता है।

मानसून से मिली अस्थायी राहत, लेकिन खतरा बरकरार

गौरतलब है कि मौजूदा मानसून सीजन में लगातार बारिश के चलते जुलाई 2026 में दिल्ली-एनसीआर की हवा फिलहाल ग्रीन जोन के करीब पहुंच गई है और नोएडा-गाजियाबाद के कई इलाकों का AQI भी काफी नीचे आ गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी है और मानसून बीतते ही सर्दियों में पराली दहन व पटाखों के दौर में प्रदूषण फिर खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है — ऐसे में बोर्ड में स्टाफ की स्थायी कमी अगली सर्दी में भी बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

भर्ती प्रक्रिया शुरू, लेकिन सवाल बरकरार

राहत की बात यह है कि UPPCB ने फरवरी 2026 में सहायक पर्यावरण अभियंता (Assistant Environmental Engineer) और सहायक वैज्ञानिक अधिकारी (Assistant Scientific Officer) के कुल 40 पदों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत 26 पद सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 पद सहायक वैज्ञानिक अधिकारी के लिए रखे गए थे। हालांकि पर्यावरणविदों का कहना है कि 363 खाली पदों के मुकाबले सिर्फ 40 पदों पर भर्ती ऊंट के मुंह में जीरा साबित होगी, और बोर्ड को कहीं बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाना होगा।

विशेषज्ञों की चिंता

पर्यावरणविद् अमित गुप्ता ने कहा कि जब तक बोर्ड में तकनीकी स्टाफ, इंजीनियर और निगरानी अधिकारियों की पर्याप्त संख्या नहीं होगी, तब तक प्रदूषण नियंत्रण के नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगे। फैक्ट्रियों और निर्माण स्थलों की नियमित जांच, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कार्रवाई और वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों का सुचारू संचालन — ये सभी काम पर्याप्त कार्यबल के बिना असंभव हैं।

यह भी पढ़ें: Earthcon Sanskriti Power Outage Update: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अर्थकॉन संस्कृति सोसाइटी में 4 दिनों से बिजली संकट, निवासियों में हाहाकार, RP और मेंटेनेंस टीम पर लापरवाही के आरोप

यहां से शेयर करें