लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग सेंटर वाली इमारत में हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवा छात्रों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने पूरे राज्य में अवैध कोचिंग संस्थानों, गेमिंग जोन और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग (DIOS) और फायर विभाग की संयुक्त टीमें बड़े पैमाने पर छापेमारी कर रही हैं। हाल ही में सेक्टर-104 स्थित ‘ओम एजुकेशन’ कोचिंग सेंटर को पूरी तरह सील कर दिया गया। यह संस्थान बिना पंजीकरण और फायर एनओसी के अवैध रूप से चल रहा था। सूत्रो द्वारा दी गई खबर के असर पर यह कार्रवाई हुई। सेक्टर-49 में ‘बासु क्लासेस’ समेत अन्य संस्थानों पर भी छापे पड़े हैं।
वर्तमान स्थिति
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के आंकड़ों के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर जिले में केवल 35 कोचिंग संस्थान पूरी तरह पंजीकृत और वैध हैं। पुराने आंकड़ों में 2002 के आसपास 60 रजिस्टर्ड बताए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में सैकड़ों संस्थान अनियमित रूप से चल रहे हैं। पहले भी 32 से अधिक अवैध कोचिंग सेंटरों को बंद किया जा चुका है। कई जगहों पर कोचिंग के नाम पर अनधिकृत स्कूल (कक्षा 1 से 12वीं तक) चलाए जा रहे थे, जिन पर भी नकेल कसी जा रही है। संयुक्त टीमें पूरे जिले में मैपिंग और निरीक्षण कर रही हैं। बेसमेंट, तंग व्यावसायिक इमारतों और बिना एग्जिट पॉइंट वाले स्थानों पर विशेष नजर है।
आगे की कार्रवाई
सिटी मजिस्ट्रेट, DIOS और फायर विभाग की कमेटी के निर्देश पर, बिना रजिस्ट्रेशन वाले सभी संस्थानों को तत्काल सील किया जाएगा (उत्तर प्रदेश कोचिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत)। फायर एनओसी और सुरक्षा उपकरणों की अनिवार्य जांच; कमी पर भारी जुर्माना और बंदी। बेसमेंट क्लासरूमों पर पूर्ण प्रतिबंध; पहले भी कई बड़े संस्थानों के बेसमेंट लॉक किए गए। संचालकों और भवन मालिकों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई। छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्य स्तर पर प्रभाव
लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई, उसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और भवन मानकों को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। इसी कड़ी में कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में ‘फिजिक्स वल्लाह’ (Physics Wallah) के तुरंत बाद कानपुर में 16-22 कोचिंग सेंटर सील किए गए। मालवीय नगर (दिल्ली) अग्निकांड के बाद भी अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माणों पर सटीक कुल संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन लखनऊ हादसे के बाद राज्यव्यापी अभियान में सैकड़ों स्थानों पर छापे और सीलिंग हो रही है। विकास प्राधिकरणों द्वारा पुराने अवैध निर्माणों की समीक्षा चल रही है। ये कार्रवाइयां छात्रों की जान बचाने के लिए जरूरी हैं, लेकिन लंबे समय तक टिकाऊ समाधान के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाते हुए सख्त मॉनिटरिंग और नियमित ऑडिट की जरूरत है। अभिभावकों को भी सलाह दी जाती है कि केवल पंजीकृत, फायर-सेफ संस्थानों में ही बच्चों को भर्ती करें। जिला प्रशासन ने अपील की है कि कोई भी शिकायत या जानकारी DIOS कार्यालय या हेल्पलाइन पर दी जा सकती है। सुरक्षा पहले, शिक्षा बाद में — यह संदेश अब पूरे प्रदेश में गूंज रहा है।

