Devika Gold Homes Greater Noida West Gate Dispute: निवासियों का आरोप, बिल्डर ने बिना सहमति बांटा प्रोजेक्ट, प्राधिकरण की नाकामी से आक्रोश

Devika Gold Homes Greater Noida West Gate Dispute: ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-1 स्थित देविका गोल्ड होम्स सोसायटी और ट्राइडेंट रेशो प्रोजेक्ट के बीच बने गेट को बंद किए जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। निवासियों का आरोप है कि बिल्डर ने बिना उनकी सहमति के एक ही प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांट दिया और बीच का गेट बंद कर दिया, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

सोसायटी में करीब 690 परिवार रह रहे हैं। प्रोजेक्ट की शुरुआत 2010 में हुई थी और पहले फेज के 6 टावरों में 2020 में पजेशन दिया गया। निवासियों के अनुसार, बिल्डर प्रबंधन ने यूपी रेरा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की मंजूरी के बिना ही दूसरे हिस्से (4 टावर) को ‘ट्राइडेंट एंबेसी’ के नाम पर बेच दिया, जहां अब ‘ट्राइडेंट रेशो’ नाम से नया प्रोजेक्ट विकसित हो चुका है और करीब 100 परिवार रहने भी आ गए हैं। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दस्तावेजों में इस नए प्रोजेक्ट का कोई उल्लेख नहीं है। पूरी जमीन आज भी मूल बिल्डर के नाम पर दर्ज है। सोसायटी निवासी शशि शेखर और एओए अध्यक्ष अनुराग खरे ने बताया कि पजेशन के समय ब्रोशर में दो गेट दिखाए गए थे, लेकिन अब केवल मुख्य गेट ही चालू है, जिससे लगातार जाम और परेशानी होती है। पीछे वाला गेट जमीन बेचने के बाद बंद कर दिया गया।

प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल

निवासियों और एओए ने इस मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से शिकायत की थी। प्राधिकरण की टीम ने गेट खुलवाया भी, लेकिन टीम के जाते ही इसे दोबारा बंद कर दिया गया। इससे निवासियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने प्राधिकरण पर आंखें मूंदने का आरोप लगाया है। ट्राई-पार्टी मीटिंग में भी निवासियों ने गेट, कनेक्टिविटी, बेसिक सुविधाओं (लिफ्ट, पार्किंग, सिक्योरिटी, एसटीपी, फायर सिस्टम आदि) और प्रोजेक्ट डिवीजन का मुद्दा उठाया था। बिल्डर पर आधा प्रोजेक्ट बिना सहमति बेचने का आरोप लगाया गया।

अन्य मुद्दे

यह विवाद अकेला नहीं है। सोसायटी में रजिस्ट्री लंबे समय से लंबित थी। जनवरी 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिल्डर और प्राधिकरण को तीन माह के अंदर रजिस्ट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे निवासियों को राहत मिली। याचिका दीपक दूबे के नेतृत्व में दायर की गई थी। इसके अलावा, एओए की कार्यशैली पर भी सवाल उठे हैं। निवासियों ने चुनाव कराने की मांग की और रजिस्ट्रार से शिकायत की। बेसिक सुविधाओं की कमी, रखरखाव, बेसमेंट में पानी-कूड़ा जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। बिल्डर पर बकाया और हैंडओवर संबंधी विवाद भी जारी हैं। निवासी अब प्राधिकरण, रेरा और अदालत से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि ब्रोशर में वादे अनुसार दो गेट, बेहतर कनेक्टिविटी और पूर्ण सुविधाएं सुनिश्चित हो सकें। इस मामले में बिल्डर पक्ष से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट्स और निवासी शिकायतों पर आधारित है। आगे की जांच और आधिकारिक अपडेट के लिए प्राधिकरण या रेरा से संपर्क करें।

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