नई दिल्ली/नोएडा: ग्रेटर नोएडा के बहुचर्चित ग्रैंड वेनिस रियल एस्टेट धोखाधड़ी कांड में वर्षों से न्याय की राह देख रहे हजारों घर खरीदारों के लिए गुरुवार का दिन राहत लेकर आया। फरार चल रहे बिल्डर सतेंद्र कुमार उर्फ मोंटू भसीन को उत्तराखंड के नेपाल सीमावर्ती इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार, भसीन नेपाल के रास्ते देश छोड़कर भागने की फिराक में था। बीटा-2 थाने की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सूरजपुर स्थित सीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
क्या है ग्रैंड वेनिस घोटाला?
ग्रैंड वेनिस परियोजना ग्रेटर नोएडा में एक विशाल मॉल और कमर्शियल टावर के रूप में प्रस्तावित थी, जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जीवन भर की बचत निवेश की। मोंटू भसीन पर आरोप है कि उन्होंने फ्लैट खरीदारों को आवासीय इकाइयों का कब्जा नहीं दिया, निवेशकों के धन का दुरुपयोग किया और राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं। इस मामले में दिल्ली और उत्तर प्रदेश में करीब 63 FIR दर्ज की जा चुकी हैं।
प्रोजेक्ट से जुड़े निवेशकों ने भसीन पर धोखाधड़ी, फंड डायवर्जन और आवंटन में अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वर्ष 2019 में आरोपी को जमानत दी गई थी, लेकिन शर्तों के उल्लंघन के कारण सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जमानत रद्द कर दी।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला — जमानत रद्द, सरेंडर का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसले में भसीन की जमानत रद्द करते हुए उसे एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया। साथ ही, जमानत की शर्त के रूप में जमा कराए गए ₹50 करोड़ को जब्त करने का भी निर्देश दिया गया।
अदालत ने यह भी पाया कि कंपनी के फंड का उपयोग जमानत राशि जमा करने के लिए किया गया था, जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 185 का सीधा उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने भसीन पर 12 महीने तक नई जमानत याचिका दायर करने पर रोक लगाई और आदेश दिया कि उसका पासपोर्ट बिना अदालत की अनुमति के जारी नहीं किया जाएगा।
अदालत की अवमानना — समय सीमा बीती, सरेंडर नहीं हुआ
9 अप्रैल की समय सीमा बीत जाने के बाद भी भसीन न तो अधिकारियों के सामने पेश हुआ और न ही आठ अप्रैल को समय बढ़ाने की अपनी मांग खारिज होने के बाद भी उसने सरेंडर किया। इसके बजाय उसने कानूनी उपायों के ज़रिए मामले को लंबित रखने की कोशिश की। यह सुप्रीम कोर्ट की खुली अवमानना थी।
UP DGP को तलब, पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
जब भसीन ने अदालत के आदेशों की अनदेखी जारी रखी, तो सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों से सीधे सवाल किया कि जमानत रद्द होने के बाद उन्होंने भसीन को गिरफ्तार क्यों नहीं किया। कोर्ट ने यहाँ तक कहा कि “लगता है पुलिस भसीन के साथ मिली हुई है।” इसके बाद उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि भसीन सरेंडर करे।
चारों ओर से घेराबंदी — एयरपोर्ट अलर्ट, संपत्तियाँ फ्रीज
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को देशभर के सभी हवाई अड्डों पर लुकआउट नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। भसीन को 4 मई 2026 तक अपनी संपत्तियों और देनदारियों का पूरा विवरण देने का भी आदेश दिया गया। साथ ही उसकी सभी संपत्तियों को तत्काल फ्रीज करने और किसी भी तीसरे पक्ष को संपत्ति अधिकारों के हस्तांतरण पर पूर्ण रोक लगाई गई।
नेपाल बॉर्डर पर दबोचा गया — देश छोड़ने की थी योजना
जब 4 मई की सुनवाई नज़दीक आई और सुप्रीम कोर्ट ने भसीन को लुकसर जेल व कोटेक-1 थाने के पुलिस अधीक्षक के समक्ष तुरंत सरेंडर करने का कड़ा आदेश दिया, तब जाकर पुलिस हरकत में आई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बीटा-2 पुलिस ने उसे धर दबोचा। यूपी पुलिस ने भसीन को उत्तराखंड के नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र से गिरफ्तार किया। माना जा रहा है कि वह नेपाल के रास्ते विदेश भागने की योजना बना रहा था।
पीड़ितों में उत्साह — वर्षों बाद न्याय की किरण
ग्रैंड वेनिस बायर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से बार-बार अनुरोध किया था कि 2 अप्रैल के फैसले को सख्ती से लागू किया जाए। एसोसिएशन का आरोप था कि भसीन जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा था और न्यायिक आदेशों को खुलेआम ठुकरा रहा था। हजारों घर खरीदारों के लिए यह गिरफ्तारी एक बड़ी राहत है — ये वे लोग हैं जिन्होंने जिंदगी भर की कमाई इस प्रोजेक्ट में लगाई और वर्षों से दर-दर की ठोकरें खाते रहे।
राजनीतिक बवाल — देरी पर उठे सवाल
इस गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में ही सरेंडर का आदेश दे दिया था, तो यूपी पुलिस ने इतने हफ्तों तक कार्रवाई क्यों नहीं की और भसीन खुलेआम क्यों घूमता रहा? विपक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस और सत्ताधारी व्यवस्था की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं था। वहीं सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्देशों का पूर्ण पालन किया जा रहा है और यह गिरफ्तारी इसी का प्रमाण है।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
सोशल मीडिया पर आम नागरिकों ने भी खूब प्रतिक्रियाएं दी हैं। अधिकतर लोगों का कहना है कि बिल्डर माफिया के खिलाफ यह कार्रवाई बहुत देर से हुई। कई पीड़ित परिवारों ने लिखा कि उन्होंने जीवन भर की जमापूंजी इस प्रोजेक्ट में झोंक दी और वर्षों से भटकते रहे — अब कम से कम उन्हें न्याय की उम्मीद है।
अगली सुनवाई 4 मई को — सबकी नज़र सुप्रीम कोर्ट पर
मामले की अगली सुनवाई 4 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में होनी है, जहाँ कोर्ट पूरे प्रकरण में अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा करेगा। हजारों पीड़ितों की नज़रें अब इस सुनवाई पर टिकी हैं — उन्हें उम्मीद है कि अदालत न सिर्फ भसीन को दंडित करेगी, बल्कि उनके धन की वसूली के लिए भी ठोस कदम उठाएगी।

