शहर के अलग-अलग हिस्सों में गंदे और दूषित पानी की सप्लाई ने निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आम्रपाली गोल्फ होम्स एंड किंग्स वुड सोसायटी में शुक्रवार सुबह दो टावरों में पीले रंग का बदबूदार पानी आने से हड़कंप मच गया, वहीं नोएडा के सेक्टर-3 स्थित जनता फ्लैट में पिछले एक साल से जर्जर पाइपलाइन के कारण दूषित पानी की समस्या बनी हुई है।
किचन और आरओ तक पहुंचा गंदा पानी
आम्रपाली सोसायटी में रहने वाले निवासियों का आरोप है कि टावर डी और जे ब्लॉक के घरों की रसोई और आरओ मशीनों तक बदबूदार पानी पहुंच गया, जिससे पीने, खाना बनाने और नहाने तक के लिए पानी उपलब्ध नहीं रह गया। निवासी राणा प्रताप सिंह के अनुसार, सोसायटी में जलापूर्ति की समस्या लगातार बनी रहती है कभी सप्लाई बाधित होती है तो कभी पानी में इतनी बदबू आती है कि घरों में लगे आरओ सिस्टम तक खराब होने की नौबत आ गई। मजबूरी में कई परिवारों को खाना पकाने और पीने के लिए बाहर से पानी मंगवाना पड़ा। लोगों का कहना है कि मुख्य सप्लाई लाइन में एक बार फिर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का पानी मिल जाने से यह स्थिति बनी, जिससे निवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
AAOA अध्यक्ष बोले—नए बोरवेल की वजह से आई दिक्कत
सोसायटी के एडहॉक एओए अध्यक्ष राघवेंद्र यादव ने सफाई देते हुए बताया कि नए बोरवेल से सप्लाई शुरू करने के कारण शुरुआत में मिट्टीयुक्त पानी आया। उन्होंने कहा कि बोरवेल के पानी को दोबारा साफ कराया जा रहा है, साथ ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से गंगाजल की आपूर्ति बढ़ाने की अपील की गई है। गौरतलब है कि यह सोसायटी पहले भी कई मोर्चों पर सुर्खियों में रह चुकी है। बीते महीनों में यहां बेसमेंट में जलभराव और कचरे को लेकर डेंगू-मलेरिया फैलने की आशंका जताई गई थी, जिसके बाद ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के उल्लंघन पर प्राधिकरण ने सोसायटी पर 25,200 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके अलावा फरवरी 2026 में सैकड़ों निवासियों ने NBCC द्वारा अधूरी सोसायटी के हैंडओवर और एडहॉक एओए की कथित वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। इन घटनाओं से साफ है कि सोसायटी में बुनियादी सुविधाओं को लेकर निवासियों और प्रबंधन के बीच असंतोष लंबे समय से बना हुआ है।
सेक्टर-3 जनता फ्लैट: एक साल से जारी है संकट
उधर, नोएडा सेक्टर-3 स्थित जनता फ्लैट में जर्जर पाइपलाइन के चलते घरों में सीवर का पानी मिल रहा है। यह समस्या करीब एक साल से बनी हुई है। निवासियों के मुताबिक पाइपलाइन बदलने के लिए महीनों पहले टेंडर जारी हुआ था, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हो सका। इससे पहले भी दूषित पानी की आपूर्ति के कारण 300 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। पिछले दो हफ्तों में स्थिति और गंभीर हो गई है—कई निवासियों को पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें होने लगी हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद ग्रेनो प्राधिकरण की ओर से अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
बड़ा सवाल
दोनों मामलों ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा और नोएडा प्राधिकरण की जलापूर्ति व्यवस्था और रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निवासियों की मांग है कि प्रशासन स्थायी समाधान निकाले, न कि हर बार शिकायत के बाद अस्थायी सुधार पर टरका दे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों पर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई जा रही है।

