हालिया दिनों में भारतीय सिनेमा की दो बड़ी रिलीज ने अलग-अलग दिशाएं दिखाई हैं। एक तरफ पंजाब के दर्दनाक इतिहास पर आधारित ‘सतलुज’ (पहले ‘पंजाब 95’) ने दिलजीत दोसांझ के शानदार अभिनय के दम पर ताकतवर फिल्म बनकर उभरी है, वहीं आलिया भट्ट और शार्वरी की यश राज फिल्म ‘अल्फा’ मिश्रित समीक्षाओं और औसत बॉक्स ऑफिस के साथ आई है। साथ ही, साउथ इंडियन सिनेमा की पहली छमाही की बड़ी पैन-इंडिया फिल्मों में महिलाओं के चित्रण को लेकर लगातार विवाद और आलोचना हो रही है।
‘सतलुज’: दिलजीत की दमदार परफॉर्मेंस, सच्ची कहानी की जीत
हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित ‘सतलुज’ (ZEE5 पर रिलीज, अनकट वर्जन) 1990 के दशक के पंजाब में मानवाधिकार उल्लंघनों, जबरन गुमशुदगी और पुलिस अत्याचारों की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म जसवंत सिंह खालरा (दिलजीत दोसांझ) की कहानी है, जो इन अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाते हैं। समीक्षकों के अनुसार, फिल्म का टोन गंभीर और प्रभावशाली है। दिलजीत की परफॉर्मेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है—वे शांत लेकिन अटूट साहस के साथ खालरा का किरदार निभाते हैं। अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की जैसे कलाकारों ने भी मजबूत सहयोग दिया है। फिल्म सेंसर बोर्ड की मांगों के बावजूद अनकट रिलीज हुई, जिसे खालरा की पत्नी परमजीत कौर खालरा ने भी सराहा। कई आलोचक इसे साल की सबसे साहसी और बेहतरीन फिल्मों में शुमार कर रहे हैं। 3.5/5 जैसी रेटिंग्स के साथ फिल्म उन फिल्मकारों के लिए जीत है जो सच्ची घटनाओं, समय और जगह को बिना समझौता किए पेश करना चाहते हैं।
‘अल्फा’: आलिया की मेहनत, लेकिन स्क्रिप्ट और YRF स्पाई यूनिवर्स की निराशा
दूसरी ओर, शिव रावैल निर्देशित ‘अल्फा’ (YRF स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-केंद्रित फिल्म) 3 जुलाई को रिलीज हुई। आलिया भट्ट (सीता) और शार्वरी मुख्य भूमिकाओं में हैं, बॉबी देओल खलनायक और अनिल कपूर महत्वपूर्ण भूमिका में। Hrithik Roshan का कैमियो भी है।
समीक्षाएं मिश्रित: आलिया और शार्वरी की एक्शन और इंटेंसिटी की तारीफ हो रही है, लेकिन स्क्रिप्ट कमजोर, कहानी पूर्वानुमानित, प्लॉट होल्स और भावनात्मक गहराई की कमी बताई जा रही है। कई समीक्षक इसे “stale spectacle” या “YRF स्पाई यूनिवर्स का एक और मिसस्टेप” कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर क्रिंज, बोरिंग और लॉजिकलेस होने की आलोचना आम है, हालांकि कुछ शुरुआती रिएक्शंस ने एक्शन और परफॉर्मेंस को पसंद किया।
बॉक्स ऑफिस: पहले दिन भारत में लगभग ₹9 करोड़ नेट (विश्व स्तर पर ₹15-16 करोड़ ग्रॉस) का अनुमान। ओपनिंग औसत रही, वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करेगी। सोशल मीडिया पर बहस तेज है—कुछ आलिया की “अल्फा” एनर्जी की तारीफ कर रहे हैं, तो कई YRF यूनिवर्स की गिरावट और महिलाओं की भूमिकाओं के ट्रीटमेंट पर सवाल उठा रहे हैं।
साउथ सिनेमा की पहली छमाही: बड़ी फिल्मों में महिलाओं का चित्रण विवादास्पद
इसी बीच, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में साउथ (तेलुगु, तमिल, कन्नड़) सिनेमा की 2026 की पहली छमाही की बड़ी पैन-इंडिया फिल्मों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ‘द रजा साब’, ‘पेद्दी’ (राम चरण, जहांवि कपूर), ‘KD: The Devil’ आदि में महिलाओं को साइडलाइन, ऑब्जेक्टिफाई या कम केयर के साथ दिखाने का आरोप लगा। ‘पेद्दी’ में जहांवि के किरदार की फ्रेमिंग और एक सीन पर भारी बैकलैश पड़ा, डायरेक्टर ने सीन चेंज का वादा किया। कन्नड़ फिल्म के सॉन्ग पर महिलाओं को डिमिनिश करने का आरोप, गाने हटाए गए। ‘टॉक्सिक’ (यश) के प्रमोशनल टीजर में महिलाओं (नयनतारा, कियारा आदि) को बैकफुट पर रखने पर आलोचना। इसके विपरीत, छोटी बजट की ‘मां इंती बंगारम’ (समांथा) जैसी फिल्मों ने महिला-केंद्रित कहानी से सफलता पाई।
रिपोर्ट का निष्कर्ष: पैन-इंडिया महत्वाकांक्षा के साथ बड़ी फिल्मों में महिलाओं की भूमिकाएं सिकुड़ रही हैं—वे नर-केंद्रित कहानी की सजावट बनकर रह जा रही हैं। दर्शक इसे नोटिस कर रहे हैं; सफल फिल्में वे हैं जहां महिलाओं की एजेंसी और कहानी में वास्तविक जगह है।
समग्र विश्लेषण
ये रिलीज और ट्रेंड्स भारतीय सिनेमा में बड़े बदलाव का संकेत देते हैं। ‘सतलुज’ जैसे फिल्में साहस और सच्चाई दिखाती हैं, जबकि ‘अल्फा’ और कई साउथ ब्लॉकबस्टर्स स्क्रिप्ट, महिलाओं के चित्रण और मूल नवाचार की कमी से जूझ रहे हैं। सोशल मीडिया पर दर्शक अब ज्यादा जागरूक हैं—वे सिर्फ स्टार पावर या स्केल नहीं, बल्कि कहानी, सम्मानजनक रोल और लॉजिक चाहते हैं। आने वाले समय में बॉलीवुड और साउथ दोनों को इस फीडबैक पर गौर करना होगा, वरना बड़े बजट की महत्वाकांक्षाएं बार-बार धराशायी होती रहेंगी। फिल्म प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य की रिलीज इन कमियों को दूर करेंगी।

