मुंबई की सड़कों पर पानी-पानी, लेकिन घरों के नल सूखे, जानिए यह विरोधाभास क्यों

बारिश से जलमग्न सड़कें, फिर भी जलाशयों में सिर्फ सात प्रतिशत पानी शेष; बीएमसी की चिंता बरकरार

मानसून की पहली तेज बारिश ने बुधवार को मुंबई की रफ्तार थाम दी। अंधेरी सबवे पानी में डूब गया, पश्चिमी द्रुतगति मार्ग पर वाहन रेंगते नजर आए और शहर के कई इलाकों में 24 घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार शहर के कई हिस्सों में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लेकिन इसी दौरान बीएमसी प्रशासन के लिए चिंता का विषय कुछ और ही था शहर को पेयजल आपूर्ति करने वाले सातों जलाशयों में जल भंडार बेहद निचले स्तर पर बना हुआ है।

विरोधाभास की जड़ क्या है

सड़कों पर जमा बारिश का पानी और जलाशयों में पहुंचने वाला पानी, दोनों अलग-अलग रास्तों और अलग-अलग रफ्तार से इकट्ठा होते हैं। शहर की सघन बसावट में तेज बारिश से जल निकासी व्यवस्था कुछ ही घंटों में चरमरा जाती है, खासकर जब नालियां जाम हों या पानी की मात्रा संभालने लायक न हो। इसके उलट, जलाशयों को भरने में हफ्तों और महीनों तक लगातार बारिश की जरूरत पड़ती है, क्योंकि वे मुंबई, ठाणे और नासिक जिलों में फैले अपने जलग्रहण क्षेत्रों की बारिश पर निर्भर हैं।

मुंबई को अपर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, तुलसी और विहार इन सात जलाशयों से पानी मिलता है। बीएमसी के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 29 जून तक इन जलाशयों में उपयोग योग्य जल भंडार घटकर महज 6.93 प्रतिशत रह गया था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 39.5 प्रतिशत था। अपर वैतरणा और तानसा जैसे जलाशयों में तो उपयोग योग्य पानी लगभग समाप्त हो चुका था।

देरी से आया मानसून बना बड़ी वजह

इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून मुंबई में सामान्य से देर से 23 जून को दाखिल हुआ, जबकि आमतौर पर यह 10 जून के आसपास पहुंचता है। इस देरी के दौरान भी शहर रोजाना करीब 4,000 मिलियन लीटर पानी जलाशयों से खींचता रहा, जबकि भरपाई उतनी नहीं हो पाई। मानसून की शुरुआत के बाद भी पहले 48 घंटों की अच्छी बारिश के बाद बादल थमे रहे, और पूरे जून महीने में देशभर में बीते 146 वर्षों का सबसे सूखा जून दर्ज किया गया, जिसका सीधा असर मुंबई के जलाशयों पर पड़ा।

हालिया बारिश से मिली आंशिक राहत

हालांकि पिछले दो दिनों की लगातार तेज बारिश ने जलापूर्ति व्यवस्था को कुछ राहत जरूर दी है। मंगलवार को कुल जल भंडार 97,666 मिलियन लीटर (6.75 प्रतिशत) था, जो बुधवार सुबह तक बढ़कर 1,03,871 मिलियन लीटर यानी 7.31 प्रतिशत हो गया। मध्य वैतरणा और विहार जैसे छोटे जलाशयों में जलस्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई विहार का भंडार 45.13 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो सातों जलाशयों में सबसे अधिक है। औद्योगिक इस्तेमाल वाली पवई झील भी ओवरफ्लो हो गई, जिससे उद्योगों को मिलने वाली 20 प्रतिशत जल कटौती में राहत की उम्मीद जगी है। बावजूद इसके, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह राहत अस्थायी है। मुंबई की रोजाना जरूरत करीब 4,000-4,600 मिलियन लीटर पानी की है, और 15 मई से शहर में पहले से ही 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू है। भंडार 8 प्रतिशत से नीचे जाने पर बीएमसी ने राज्य सरकार से अतिरिक्त आरक्षित पानी लेना भी शुरू कर दिया था।

आगे क्या

मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे और पालघर के लिए आगामी दिनों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए तेज हवाओं के साथ और बारिश की आशंका जताई है। बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि यदि जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का यही सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है। फिलहाल शहर की उम्मीदें पूरी तरह जुलाई की बारिश पर टिकी हैं।

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