‘ऑपरेशन टाइगर’ की आँच में शिवसेना (UBT), विद्रोही सांसदों पर संजय राउत का वार,  “गद्दारों को नहीं छोड़ूँगा, इस्तीफ़ा दो और जाओ”

₹15 करोड़ प्रति सांसद की ‘खरीद’ का आरोप, दिल्ली में चल रहे सियासी दाँव-पेच

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर भूकंप की दहलीज पर खड़ी है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह से सात सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की अफवाहों ने पार्टी के भीतर हड़कंप मचा दिया है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के नाम से चर्चित इस सियासी खेल ने एक बार फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगा दिया है।

संजय राउत का देर रात विस्फोटक दावा

शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मंगलवार देर रात एक बड़ा आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए प्रति सांसद ₹15 करोड़ का अग्रिम भुगतान किया जा रहा है। राउत ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा — “अपना सपना मनी मनी! यह चौंकाने वाला और घृणास्पद है।” हालाँकि राउत ने किसी सांसद का नाम नहीं लिया और न ही कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया। उनका यह आरोप ऐसे समय में आया जब शिवसेना (UBT) के कुछ लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट से संपर्क में होने की अटकलें तेज़ हो चुकी हैं।

क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’?

केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता प्रतापराव जाधव ने हाल ही में दावा किया कि सभी UBT सांसद शिंदे के संपर्क में हैं। कई मीडिया रिपोर्टों में 7 जून को दिल्ली में एक गोपनीय बैठक का उल्लेख किया गया है जिसमें ठाकरे गुट के सात सांसद शामिल हुए और एकनाथ शिंदे भी मौजूद थे। शिंदे के बेटे और लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे पिछले छह महीनों से उद्धव खेमे के सांसदों से संपर्क साध रहे हैं और उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देने का प्रलोभन दिया जा रहा है। शिवसेना के MLC कृपाल तुमाने ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर बड़ा दावा किया — उन्होंने कहा कि सात UBT सांसदों से बातचीत अंतिम चरण में है और वे संसद के मानसून सत्र से पहले शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।

कौन हैं वे सांसद जो विद्रोह की राह पर?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव ये छह सांसद शिंदे गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं। शिवसेना (UBT) के पास अभी कुल नौ लोकसभा सांसद हैं। दल-बदल विरोधी कानून के तहत पार्टी बदलने के लिए कम से कम सात सांसदों को एकसाथ टूटना होगा। पार्टी की आंतरिक स्थिति पर सवाल तब और गहरे हो गए जब उद्धव ठाकरे की बुलाई गई एक हालिया बैठक में केवल चार सांसद ही शारीरिक रूप से उपस्थित हुए। पार्टी ने दावा किया कि बाकी सांसद फोन या वर्चुअल माध्यम से जुड़े, लेकिन यह सफाई अटकलों को शांत नहीं कर सकी।

दिल्ली बैठक रद्द, लेकिन संकट बरकरार

सूत्रों के अनुसार विद्रोही UBT सांसद बुधवार को दिल्ली में श्रीकांत शिंदे के आवास पर बैठक करने और इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मिलने की योजना में थे। दो सांसद राष्ट्रीय राजधानी पहुँच भी चुके थे और चार अन्य के आने की उम्मीद थी। हालाँकि बाद में स्पष्ट किया गया कि श्रीकांत शिंदे और UBT सांसदों के बीच कोई बैठक नहीं हुई और किसी भी कदम से पहले लोकसभा स्पीकर को औपचारिक पत्र देना होगा।

राउत की दो-टूक चेतावनी ‘गद्दारों को माफ नहीं करूँगा’

राउत ने विद्रोहियों पर तंज कसते हुए लिखा — “ऑपरेशन टाइगर के नाम पर नांदेड़ में चार्टर्ड विमान उतरा और दो सांसदों को उठा ले गया। ये लोग ऑटोरिक्शा में सफर करने की भी औकात नहीं रखते थे। ठाकरे परिवार की वजह से इनकी इतनी कीमत हुई कि चार्टर्ड प्लेन में उड़ रहे हैं।” साथ ही उन्होंने चेतावनी दी “सब कुछ हिसाब होगा।” राउत ने यह भी कहा “कायर भेड़ियों के भागने को ‘ऑपरेशन टाइगर’ क्यों कह रहे हो?”

शिंदे खेमे का जवाब ‘दरवाज़े खुले हैं’

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री सरनाईक ने खुले शब्दों में न्योता देते हुए कहा “यदि सांसद और विधायक अपनी नेतृत्व पर भरोसा नहीं कर सकते और वे बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों में विश्वास रखते हैं तो शिवसेना के दरवाजे उनके लिए खुले हैं।” वहीं, शिवसेना नेत्री शाइना एनसी ने किसी भी दल-तोड़ अभियान में हाथ होने से इनकार करते हुए कहा कि “किसी पार्टी को तोड़ने में कोई रुचि नहीं है।”

UBT का व्हिप जारी, सांसदों को दिल्ली तलब

इस संकट के बीच शिवसेना (UBT) ने अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है और उन्हें दिल्ली में एकत्रित होने का निर्देश दिया गया है। पार्टी का कहना है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सभी सांसद एकजुट हैं।

पृष्ठभूमि: 2022 का दर्द फिर ताज़ा

यह पूरा घटनाक्रम 2022 की उस ऐतिहासिक बगावत की याद दिला रहा है जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 40 से अधिक विधायकों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया था, जिससे महाराष्ट्र की MVA सरकार गिर गई थी। उसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को ‘असली शिवसेना’ का दर्जा दिया था। अब एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में इतिहास खुद को दोहराने की कोशिश कर रहा है — और मानसून सत्र से पहले के इस सियासी तूफान का असर आने वाले दिनों में देश की संसदीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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