लोटस जिंग सोसाइटी में पेयजल संकट, नोएडा के कई हिस्सों में पानी की किल्लत जारी, निवासियों ने सड़क जाम कर किया विरोध

सेक्टर-168 स्थित लोटस जिंग सोसाइटी में पिछले पांच दिनों से जारी पेयजल संकट रविवार को तेज प्रदर्शन में बदल गया, जब परेशान निवासी मुख्य सड़क पर उतरकर लगभग एक घंटे तक चक्का जाम कर दिल्ली-नोएडा मार्ग पर जाम लगा दिया। प्रदर्शन के बाद पहुंची पुलिस द्वारा समझाइश के बाद परिस्थित‍ि सामान्य हुई, लेकिन सोसाइटी के 1200 से अधिक परिवारों की समस्याएं अनसुलझी बनी हुई हैं।

क्या हुआ: शिकायतों के मुताबिक सोसाइटी में जलापूर्ति के लिए लगे तीनों मोटरें विभागीय रखरखाव के अभाव के कारण पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। रखरखाव एजेंसी द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद आज तक कोई स्थायी मरम्मत नहीं की गई और एजेंसी के कर्मचारी निवासियों के फोन तक नहीं उठा रहे। लाये जा रहे टैंकर भी अपर्याप्त बताए जा रहे हैं। इस वजह से लोग दैनिक जरूरतों के लिए रिश्तेदारों के घरों पर जाने और कुछ मामलों में अस्थायी पलायन तक को विवश हो गए हैं।

निवासियों की स्थिति: सोसाइटी निवासी हेमंत सिधाना और अतुल भारद्वाज ने कहा, “पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करना चिंताजनक है।” श्रेय दीक्षित ने बताया कि टैंकर आपूर्ति अनियमित और कम है, जिससे घर-घर में पानी पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा। कई बुजुर्ग और बच्चों वाले परिवार विशेष रूप से प्रभावित हैं। निवासियों ने सेक्टर-137 थाना में आगाह (IRP) दर्ज कराई है और रखरखाव एजेंसी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की शुरुआत कर दी है।

रखरखाव एजेंसी का बयान: रखरखाव एजेंसी ने बताया कि पाइपलाइन और मोटरों में तकनीकी खराबी आने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है और उसे जल्द से जल्द ठीक करने के लिए तकनीकी टीम भेजी जा रही है। एजेंसी का कहना है कि आवश्यक पुर्जे मंगवाने और मरम्मत के लिए प्रक्रियाएं जारी हैं, लेकिन समय लग सकता है। एजेंसी ने टैंकर आपूर्ति बढ़ाने का आश्वासन भी दिया है, परंतु निवासियों का कहना है कि अब तक व्यवहारिक मदद नहीं मिली है।

नोएडा—ग्रेटर नोएडा में स्थिति: लोटस जिंग समुदाय की तरह नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अन्य कुछ सेक्टरों में भी पानी की किल्लत की शिकायतें मिली हैं। विशेषतः सूचक क्षेत्रों और नए विकसित आवासीय कॉलोनियों में निम्नलिखित समस्याएँ दिखाई दे रही हैं: सेक्टर 168, 137 और आसपास के हिस्सों में इंजीनियरिंग तंत्र और नलों की कमजोर स्थिति, बैकअप सिस्टम की कमी। ग्रेटर नोएडा के कुछ विस्तार क्षेत्र (विशेषकर समीपवर्ती इंडस्ट्रियल और नए आवासीय कॉलोनियों) में पाइपलाइन दबाव और ट्रीटमेंट क्षमताओं का अभाव। मॉनसून से पहले जलस्त्रोतों का कम होना और भूमिगत जल स्तर में गिरावट के कारण निजी और सार्वजनिक आपूर्ति पर असर।

उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों की ताजा स्थिति:

उत्तर प्रदेश: राज्य के ग्रामीण इलाकों और कुछ मध्य-शहरी क्षेत्रों में भी पानी की उपलब्धता असंतोषजनक है। खासकर उत्तर पूर्वी और ग्रामीण जिलों में बुनियादी नेटवर्क कमजोर रहने से समय-समय पर संकट उभरता रहता है। जिला स्तर पर कई जगहों पर टैंकर निर्भरता बढ़ी है।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: देश के कई शहरी केंद्रों में — विशेषकर तेजी से बढ़ते उपनगरों और इंडिया के नव-विकासित टाउनशिपों में — वितरण नेटवर्क और आपूर्ति प्रबंधन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों, अंतर्देशीय नगरों और जल संसाधन सीमित क्षेत्रों में सामान्य जनता को पिए जाने योग्य पानी जुटाने में परेशानी हो रही है।

आम जनता की राय:

स्थानीय निवासियों का मत है कि नगर निगम/रखरखाव एजेंसियों की सुस्ती और पारदर्शिता की कमी मुख्य कारण है। लोग चाहते हैं कि समस्या का त्वरित, स्थायी और पारदर्शी समाधान हो। कई लोग मांग कर रहे हैं कि आपातकालीन स्थितियों के लिए बोर-लेवल/सतही जल के वैकल्पिक स्त्रोत और नियमित टैंकर शेड्यूल घोषित किया जाए। नागरिक संगठनों और सोशल मीडिया पर भी इस मसले को लेकर गुस्सा दिख रहा है; कई लोग प्रशासन से जवाबदेही, मुआवजा या किराये कम करने की माँग कर रहे हैं जब वे आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं।

स्थानीय सरकार की कार्रवाई 

नोएडा अथॉरिटी और पानी आपूर्ति विभाग को पत्राचार और फोन शिकायतों के बाद तात्कालिक मरम्मत टीम भेजने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर एक्स्ट्रा टैंकर और मोबाइल वाटर-प्‍यूरिफिकेशन यूनिट्स की व्यवस्था समयबद्धता के साथ हुई है, पर नहीं सभी प्रभावित कॉलोनियों तक यह पहुँच पाया है। नगर निगम ने निवासियों को सूचना दी है कि मोटरों की मरम्मत के लिए आवश्यक पुर्ज़े मंगवाए जा रहे हैं और टर्बो पंप रिप्लेसमेंट/रि-इन्स्टालेशन का कार्य अगले 48–72 घंटे में पूरा करने का आश्वासन दिया गया है (अधिकृत बयान, 30 मई 2026)। पुलिस ने सार्वजनिक रास्ते पर जाम हटाने के लिए अनुकूलन किया, तथा मामला शांतिपूर्ण तरीके से हल हुआ, पर प्रशासन ने भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों पर अग्रिम संवाद के लिए स्थानीय प्रतिनिधियों से बैठक का वादा किया है।

तेज़ शहरीकरण और पुरानी/कमज़ोर आपूर्ति अवसंरचना के कारण छोटे-मध्यम आवासीय सैक्टरों में आपूर्ति बाधित हो रही है। तकनीकी खराबियों के साथ-साथ रखरखाव एजेंसियों की जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी इस संकट को बढ़ाती है। तात्कालिक राहत के साथ दीर्घकालिक समाधान के लिए इन बिंदुओं पर काम जरूरी है: नियमित प्रिवेंटिव रखरखाव और समय पर पुर्ज़ा उपलब्धता सुनिश्चित करना। आपातकालीन जल आपूर्ति के लिए मानक टैंकर शेड्यूल और जवाबदेही मैकेनिज्म। निवासियों के साथ संवाद: शिकायत-निवारण के लिए ऑनलाईन ट्रैकिंग और लोकल प्रतिनिधि बैठकें। दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए भू-जल संचयन, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और अतिरिक्त सप्लाई लाइन का विस्तार।  निवासियों की ओर से दर्ज IRP की जांच जारी है। नोएडा प्रशासन और रखरखाव एजेंसी के बीच आगामी 48–72 घंटे में तकनीकी टीम की रिपोर्ट और मरम्मत के कार्यप्रणाली की समय-सीमा सार्वजनिक की जाने की उम्मीद है। यदि मरम्मत में और देरी हुई तो आवासीय संगठनों ने बड़े पैमाने पर अदालत जाने और व्यापक विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

यह भी पढ़ें: नोएडा के सेक्टर-59 में स्पार्क मिंडा कंपनी में भीषण आग, अफरा-तफरी; दूर तक छाया धुएं का गुबार

यहां से शेयर करें