चाइल्ड पीजीआई नोएडा में बड़ा हादसा टला: वार्ड में बेड पर गिरी फॉल सीलिंग, मासूम बाल-बाल बचा, पिता घायल

जर्जर हो रही 1200 करोड़ की बिल्डिंग की पोल खुली, परिजनों में आक्रोश, प्रशासन ने बुलाई इंजीनियरिंग टीम

नोएडा के सेक्टर-30 स्थित सुपर स्पेशियलिटी बाल चिकित्सालय एवं स्नातकोत्तर शिक्षण संस्थान ‘चाइल्ड पीजीआई’ में बुधवार देर रात एक बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल के इमरजेंसी आईसीयू वार्ड में मरीज के बेड के ठीक ऊपर छत के प्लास्टर और फॉल सीलिंग का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया। हादसे के वक्त बेड पर 18 महीने की एक बच्ची भर्ती थी, जो महज कुछ मिनट पहले ही बेड से उतरकर नीचे फर्श पर खेलने लगी थी, इसी वजह से वह बाल-बाल बच गई। हालांकि बेड पर लेटकर आराम कर रहे उसके पिता इस हादसे की चपेट में आ गए और घायल हो गए।

घटना के वक्त मची अफरा-तफरी

अचानक हुई इस घटना से पूरे वार्ड में हड़कंप मच गया। आसपास मौजूद लोग और तीमारदार तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। घायल पिता को प्राथमिक उपचार दिया गया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन इस लापरवाही को लेकर मरीजों के परिजनों में गहरी नाराजगी देखी गई। घटना के तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और प्रभावित वार्ड को खाली कराकर सभी भर्ती मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल के एक वार्ड में मरीज के बेड के ऊपर अचानक फॉल सीलिंग का एक हिस्सा टूटकर गिरने से वार्ड में अफरा-तफरी मच गई और अस्पताल की बिल्डिंग की गुणवत्ता तथा मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

अस्पताल प्रबंधन का बयान

चाइल्ड पीजीआई के निदेशक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने इस घटना पर सफाई देते हुए बताया कि यह छत गिरने की नहीं, बल्कि फॉल सीलिंग का एक हिस्सा टूटकर गिरने की घटना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस हादसे में किसी भी बच्चे के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए गए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। निदेशक के अनुसार, सूचना मिलते ही इंजीनियरिंग टीम को तत्काल मौके पर बुलाकर मरम्मत कार्य शुरू कराया गया है।

पहले से जर्जर हालत में है अस्पताल की बिल्डिंग

यह कोई पहला मामला नहीं है। करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से बनी चाइल्ड पीजीआई की बिल्डिंग महज नौ साल में ही खराब रखरखाव के चलते जर्जर हो चुकी है। बिल्डिंग 2015 में बनकर तैयार हुई थी और इसके निर्माण पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। बिल्डिंग के रखरखाव पर हर साल लगभग 40 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत बताई जाती है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण और राजकीय निर्माण निगम से जरूरी नक्शे तक अब तक उपलब्ध नहीं हो सके हैं, जिससे मरम्मत कार्य प्रभावित होता रहा है। अस्पताल के कई हिस्सों में छत का प्लास्टर या फॉल्स सीलिंग पहले भी टूटकर गिर चुकी है। संस्थान में फाल्स सीलिंग करीब 30 फीसदी हिस्से में गिर चुकी है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को टपकते पानी के बीच ही इलाज का इंतजार करना पड़ता है। छत का प्लास्टर उखड़ने से ऊपर लगी एसी की केबल तक खुली नजर आती हैं। कुछ वार्डों में गहरी दरारें, पानी का रिसाव और छत के पैनल गायब होने जैसी समस्याएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे मरीज और उनके परिजन डरे-सहमे रहते हैं।

निर्माण स्थल पर मजदूर की भी हो चुकी है मौत

अस्पताल परिसर में जारी निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कुछ ही दिन पहले चाइल्ड पीजीआई में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान चौथी मंजिल पर काम कर रहे 35 वर्षीय मजदूर संतोष का अचानक संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह नीचे गिर गया और गंभीर चोटें आने से उसकी मौत हो गई थी। इस घटना ने भी अस्पताल परिसर में सुरक्षा इंतजामों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे।

परिजनों में आक्रोश, सुधार की मांग

बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं से मरीजों के परिजनों में अस्पताल प्रशासन के रख-रखाव को लेकर गहरी नाराजगी है। परिजनों का कहना है कि इलाज कराने आए मासूम बच्चों के ठीक ऊपर छत का हिस्सा गिरना बेहद खतरनाक है और यदि समय रहते सुरक्षा मानकों तथा मरम्मत कार्यों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने प्रभावित वार्ड की मरम्मत का काम शुरू करा दिया है और पूरी बिल्डिंग की सुरक्षा जांच कराने की बात कही जा रही है, लेकिन सरकारी सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर बार-बार सामने आ रही ये खामियां प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश करती हैं।

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