पुलिस चौकी के सामने ‘कानून’ की खुलेआम धज्जियाँ,  फुटपाथ पर जड़ा अस्पताल का अवैध होर्डिंग, राहगीरों की जान दाँव पर

एक मूर्ति पर ‘Swastham Medicare’ के विज्ञापन बोर्ड ने किया फुटपाथ का अतिक्रमण; GNIDA की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई, एक तरफ ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) अतिक्रमण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का ढिंढोरा पीट रहा है बुलडोजर चला रहा है, अभियान के बाद अभियान चला रहा है और दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक मूर्ति इलाके में एक निजी अस्पताल का विशाल विज्ञापन बोर्ड फुटपाथ के बीचों-बीच डटा हुआ है। और वह भी कहाँ? सीधे चेरी काउंटी पुलिस चौकी के ठीक सामने। यह दृश्य न केवल प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलता है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल भी खड़ा करता है।

क्या है पूरा मामला?

स्थानीय निवासियों और राहगीरों की शिकायतों के आधार पर सामने आई इस खबर में पता चला है कि ‘Swastham Medicare’ नाम के एक निजी अस्पताल का बड़ा विज्ञापन बोर्ड दो लोहे के खंभों के सहारे फुटपाथ पर पक्के तरीके से गाड़ दिया गया है। इसके लिए फुटपाथ की टाइल्स तोड़ी गई हैं और कंक्रीट भरकर खंभे खड़े किए गए हैं यानी सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाकर निजी मुनाफे का विज्ञापन। इस बोर्ड ने फुटपाथ की चौड़ाई का बड़ा हिस्सा घेर लिया है। जो थोड़ी-बहुत जगह बचती है, वह भी बुजुर्गों, दिव्यांगों, बच्चों या व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए पर्याप्त नहीं है। नतीजा यह है कि राहगीरों को अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पर उतरकर चलना पड़ रहा है।

कानून क्या कहता है?

भारत में आउटडोर विज्ञापन के लिए कड़े नियम लागू हैं। जन सुरक्षा के हित में रोड मीडियन और फुटपाथ पर होर्डिंग्स लगाने पर नियमों के तहत स्पष्ट रोक है, और इस तरह के बोर्ड पैदल चलने वालों और वाहन चालकों — दोनों के लिए खतरा पैदा करते हैं। इसके बावजूद नियमों का खुलेआम उल्लंघन जारी है। मुंबई जैसे महानगर में भी हालिया संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत फुटपाथों पर किसी भी प्रकार का विज्ञापन लगाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है यह निर्णय शहर की सुरक्षा और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। उत्तर प्रदेश में भी स्थानीय विकास प्राधिकरण से लिखित अनुमति लेना और निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य है  जिसका यहाँ स्पष्ट रूप से उल्लंघन हो रहा है।

‘जीरो टॉलरेंस’ की हकीकत क्या है?

GNIDA समय-समय पर बड़े-बड़े दावे करता रहता है। हाल ही में प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर ग्राम भनौता में 40 हजार वर्ग मीटर की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया और अधिकारियों ने भविष्य में भी जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रखने का वादा किया। लेकिन जब पुलिस चौकी के सामने ही फुटपाथ पर अवैध बोर्ड खड़ा हो और उस पर कोई कार्रवाई न हो, तो यह ‘जीरो टॉलरेंस’ महज एक खोखला नारा बनकर रह जाता है। स्थानीय निवासियों में यह बात छुपी नहीं है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिना किसी स्पष्ट नीति के इस तरह के अतिक्रमण कैसे जड़ें जमा लेते हैं आरोप है कि इसके पीछे ‘मासिक शुल्क’ का एक अघोषित सिस्टम काम करता है, यही कारण है कि कार्रवाई के नाम पर कभी-कभी सामान जब्त तो होता है, लेकिन चंद दिनों बाद वही अतिक्रमण वापस अपनी जगह पर मिलता है।

यह समस्या सिर्फ ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं

फुटपाथों पर अवैध होर्डिंग का यह दर्द देशव्यापी है। मुरादाबाद जैसे शहरों में शहर के भीतर और निगम सीमा के बाहर भी बड़े पैमाने पर अवैध रूप से होर्डिंग-यूनिपोल लगाए गए हैं जिन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही; इन अवैध विज्ञापनों से नगर निगम को राजस्व का भी बड़ा नुकसान हो रहा है और बरसात व तेज हवा में ऐसे बेतरतीब बोर्ड के गिरने का खतरा भी बना रहता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करते हुए इंदौर नगर निगम को निर्देश देना पड़ा कि वह डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करे। यह इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन नहीं जागता, तो अदालत को जगाना पड़ता है।

दुर्घटना का इंतजार क्यों?

विशेषज्ञों का कहना है कि फुटपाथ पर इस तरह के बोर्ड लगाना कई स्तरों पर खतरनाक है। रात के अंधेरे में या बारिश के मौसम में जब राहगीर को फुटपाथ छोड़कर सड़क पर उतरना पड़ता है, तो तेज रफ्तार वाहनों से टकराने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। सार्वजनिक सड़कें और फुटपाथ नागरिकों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही के लिए होते हैं, और अतिक्रमण के कारण पैदल यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है — साथ ही यातायात जाम और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।

स्थानीय निवासियों में आक्रोश

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस बारे में स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा “पुलिस चौकी के ठीक सामने यह बोर्ड खड़ा है। अगर यहाँ भी नियम लागू नहीं हो सकते, तो बाकी जगहों से क्या उम्मीद रखें?” एक अन्य निवासी का कहना था “रात को इस रास्ते से गुजरना डरावना लगता है। बोर्ड की वजह से फुटपाथ पर जगह नहीं, और सड़क पर तेज गाड़ियाँ। कोई हादसा होने का इंतजार है क्या?”

क्या होनी चाहिए कार्रवाई?

कानूनी जानकारों के अनुसार GNIDA और स्थानीय पुलिस प्रशासन को तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए, बोर्ड को 24 घंटे के भीतर हटाया जाए और टाइल्स की क्षतिपूर्ति संबंधित अस्पताल से वसूली जाए। ‘Swastham Medicare’ अस्पताल के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति विनाश निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए।  GNIDA अपने क्षेत्र में सभी अनधिकृत होर्डिंग्स का सर्वेक्षण करवाए और स्ट्रक्चरल ऑडिट सुनिश्चित करे। GNIDA ने हाल ही में ISRO के सहयोग से नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के साथ MoU साइन किया है, जिसके तहत उपग्रह चित्रों और AI से अतिक्रमण की सटीक पहचान होगी। इस तकनीक का उपयोग फुटपाथों पर अवैध होर्डिंग की निगरानी के लिए भी किया जाना चाहिए।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ‘सुनियोजित शहर’ के नाम पर जो विकास परोसा जा रहा है, उसकी असलियत चेरी काउंटी के उस फुटपाथ पर साफ दिखती है जहाँ एक अस्पताल का बोर्ड ही ‘मरीज’ बन गया है मरीज उस व्यवस्था का, जो दिखावे के अभियान तो चलाती है, पर पुलिस चौकी के सामने खड़े अवैध बोर्ड को हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। सवाल यह है कि कार्रवाई तब होगी जब कोई हादसा हो जाए — या उससे पहले? पाठकों से अपील, यदि आपके इलाके में भी फुटपाथ पर अवैध होर्डिंग या अतिक्रमण है, तो GNIDA के हेल्पलाइन नंबर 0120-2336030 अथवा CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।​​​​​​​​​​​​​​​​

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