ईरान युद्ध की आग में झुलस रहे अमेरिकी नागरिक, थाली से लेकर पेट्रोल पंप तक सब कुछ महँगा

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से तेल, खाद और खाद्यान्न की आपूर्ति श्रृंखला चरमराई सी गई है, अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 3.8% पर पहुँचा, ईरान युद्ध की लपटें अब अमेरिकी नागरिकों की रसोई तक पहुँच गई हैं। अमेरिकी श्रम विभाग के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सालाना आधार पर 3.8 प्रतिशत पर पहुँच गया जो मई 2023 के बाद का सबसे ऊँचा स्तर है। किराने की दुकानों से लेकर रेस्तराँ तक हर जगह आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ता जा रहा है।

थाली से लेकर पेट्रोल पंप तक सब कुछ महँगा

घर में खाने के लिए ख़रीदे जाने वाले खाद्य पदार्थों की क़ीमतें अप्रैल में एक साल पहले की तुलना में 2.9 प्रतिशत बढ़ीं जो अगस्त 2023 के बाद इस श्रेणी में सबसे तेज़ बढ़ोतरी है। बाहर खाने रेस्तराँ और फ़ास्ट फ़ूड — की क़ीमतें भी चढ़ीं, जिससे कुल मिलाकर खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर 3.2 प्रतिशत हो गई।  ताज़ी सब्ज़ियों और फलों के दाम 6.5 प्रतिशत, और मांस के दाम 8.8 प्रतिशत तक उछले। गोमांस (बीफ़) की क़ीमत पिछले साल के मुक़ाबले 14.8 प्रतिशत महंगी हो गई। कॉफ़ी 18.5 प्रतिशत, और मेक्सिको से आयातित टमाटर पर लगाए गए 17% शुल्क के कारण टमाटर के दाम 40 प्रतिशत तक बढ़ गए। कुछ राहत की बात ज़रूर है: अंडे की क़ीमतें 39 प्रतिशत गिरीं, क्योंकि बर्ड फ्लू के कारण नष्ट हुए पोल्ट्री फ़ार्म धीरे-धीरे फिर से सक्रिय हो रहे हैं। मक्खन (बटर) भी 5.8 प्रतिशत सस्ता हुआ।

ईरान युद्ध — असली ख़लनायक

फ़रवरी 2026 में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बाद ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार पर रोक लग गई। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे “वैश्विक तेल बाज़ार के इतिहास का सबसे बड़ा आपूर्ति व्यवधान” बताया है।  कच्चे तेल की क़ीमत (ब्रेंट क्रूड) अप्रैल के अंत तक 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई, जो युद्ध से पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी। पेट्रोल (गैसोलीन) की क़ीमत राष्ट्रीय औसत 4.50 डॉलर प्रति गैलन हो गई जो एक साल पहले 3.14 डॉलर थी। ईंधन की यह आग सीधे खाने की थाली तक पहुँच गई, क्योंकि डीज़ल से चलती हैं मछली पकड़ने वाली नावें, ट्रैक्टर और 83 प्रतिशत अमेरिकी माल ढुलाई करने वाले ट्रक। होर्मुज़ की नाकेबंदी से उर्वरक (खाद) की आपूर्ति में भी अड़चन आई ठीक उस समय जब उत्तरी अमेरिकी किसान अपनी बुआई का मौसम शुरू कर रहे थे। इलिनोई विश्वविद्यालय के विश्लेषण के अनुसार केंद्रीय इलिनोई में उर्वरक की लागत प्रति एकड़ 20 डॉलर से अधिक बढ़ गई।

झींगा मछुआरों से लेकर कॉफ़ी तक हर तरफ़ मार

साउदर्न श्रिम्प अलायंस जो आठ राज्यों के झींगा मछुआरों का प्रतिनिधित्व करती है का कहना है कि कई नावें इस वसंत ऋतु में बंदरगाह से निकली ही नहीं, क्योंकि डीज़ल की लागत इतनी ऊँची है कि झींगा बेचकर वह वसूल ही नहीं होती। आमतौर पर ईंधन की लागत इन मछुआरों के कुल खर्च का 30 से 50 प्रतिशत होती है। बोस्टन कॉलेज के अर्थशास्त्री ब्रायन बेथून ने होर्मुज़ की स्थिति को शरीर की मुख्य रक्त वाहिका से जोड़ते हुए कहा — “जब यह बंद हो जाती है तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।” उनके मुताबिक़ अगर जल्द समाधान निकला तो भी आपूर्ति श्रृंखला सामान्य होने में दो महीने लगेंगे, और निराशावादी परिदृश्य में छह से नौ महीने।

फ़ेडरल रिज़र्व की दुविधा, मज़दूरों की तकलीफ़

ऊर्जा और खाद्य पदार्थों को हटाकर देखा जाए तो ‘कोर CPI’ भी 2.8 प्रतिशत पर है, जो फ़ेडरल रिज़र्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफ़ी ऊपर है। वास्तविक औसत प्रति घंटा वेतन महीने भर में 0.5 प्रतिशत और सालाना आधार पर 0.3 प्रतिशत घटा यानी महंगाई की तुलना में आम कामगार की कमाई कम हो रही है। फ़ेड ने इस साल अभी तक ब्याज दरें स्थिर रखी हैं, लेकिन बाज़ार में साल के अंत तक दर बढ़ाए जाने की संभावना लगभग 30 प्रतिशत तक पहुँच गई है।

वैश्विक असर — ग़रीब देशों पर सबसे भारी बोझ

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार होर्मुज़ से लगभग 25-30 प्रतिशत वैश्विक तेल और 20 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) गुज़रती है। एशिया और अफ्रीका के कई देश पहले से ही बढ़ती क़ीमतों पर भी ज़रूरी आपूर्ति पाने में संघर्ष कर रहे हैं। निम्न आय वाले देशों पर सबसे अधिक मार पड़ रही है, जहाँ उपभोग का 43 प्रतिशत हिस्सा खाद्य पदार्थों पर खर्च होता है।

राजनीतिक दाँव पर मध्यावधि चुनाव

खाद्य महंगाई नवंबर के मध्यावधि चुनाव में बड़ा मुद्दा बनने की ओर है। 2024 के अपने चुनाव प्रचार में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बेकन, अनाज और अन्य किराने के सामान की क़ीमतें गिनाकर वोट माँगे थे। ट्रम्प ने महंगाई घटाने का वादा किया था, लेकिन संतरे के जूस के दाम 22 प्रतिशत और गोमांस (ग्राउंड बीफ) के दाम 18 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। मूडीज़ के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क ज़ांडी ने साफ़ शब्दों में चेताया  “अमेरिकी परिवारों को आने वाले समय में भी इस महंगाई से जूझना पड़ेगा, और यह स्थिति काफ़ी समय तक बनी रहेगी।” होर्मुज़ जलडमरूमध्य का संकट अभी थमा नहीं है और जब तक वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य नहीं होती, अमेरिकी रसोई की मुश्किलें भी कम होने के आसार नज़र नहीं आते।

यह भी पढ़ें: ट्रंप की चीन यात्रा से पहले ईरान युद्ध की छाया, अमेरिकी जेब पर बोझ, पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल 

यहां से शेयर करें