नकली पनीर पर जंग: FSSAI का ऐतिहासिक फैसला, बाजार से बाहर होगा सिंथेटिक पनीर, आम जनता में मची खलबली

नकली पनीर पर जंग: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) उन गैर-मानकीकृत डेयरी एनालॉग उत्पादों को बाजार से हटाने पर विचार कर रहा है जो असली पनीर की नकल करते हैं और इसके पीछे उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी, पोषण की हानि और डेयरी किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की गंभीर चिंताएं हैं। मामले से जुड़े दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। यह फैसला उस वक्त आया है जब पूरे देश में नकली पनीर को लेकर आम जनता में गहरा आक्रोश है और कई राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की जा रही है।

क्या है ‘एनालॉग पनीर’ — समझिए पूरा मामला

यह विवाद तब सुर्खियों में आया जब अक्टूबर 2024 में गुरुग्राम के एक सोशल मीडिया यूज़र ने आरोप लगाया कि फूड डिलीवरी कंपनी Zomato ने वनस्पति तेल से बना ‘फर्जी पनीर’ सप्लाई किया, जिसे प्लेटफॉर्म पर ‘एनालॉग पनीर’ के नाम से सूचीबद्ध किया गया था।FSSAI के अनुसार, ‘एनालॉग’ उत्पाद वह होता है जिसमें दूध के घटकों को पूरी तरह या आंशिक रूप से गैर-डेयरी सामग्री से बदल दिया जाता है, लेकिन अंतिम उत्पाद पारंपरिक डेयरी उत्पाद जैसा दिखता है। असली पनीर की तुलना में सिंथेटिक पनीर लगभग आधी कीमत पर मिलता है, लेकिन इसमें इमल्सीफायर, स्टार्च और घटिया वनस्पति तेल होते हैं। कृत्रिम पनीर अक्सर स्टार्च, सिंथेटिक दूध (यूरिया, डिटर्जेंट और पानी का मिश्रण) और हानिकारक योजकों से तैयार किया जाता है, जो पाचन विकार, किडनी और लीवर की समस्याओं और कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसी बीमारियाँ पैदा कर सकता है।

FSSAI का कड़ा रुख — क्या-क्या होगा?

नियामक का प्रस्ताव है कि गैर-डेयरी सामग्री जैसे वनस्पति तेल से बने पनीर के विकल्पों पर ‘पनीर एनालॉग’ लेबल अनिवार्य किया जाए और किसी भी डेयरी-संबंधित शब्दावली के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। पहचान को आसान बनाने के लिए इन विकल्पों में खाद्य रंग मिलाने का प्रस्ताव है, ताकि वे असली सफेद डेयरी पनीर से अलग दिखें। विशेषज्ञ समिति ने नए गैर-मानकीकृत एनालॉग उत्पादों, विशेषकर पनीर के विकल्पों, पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। लगभग 1,000 मौजूदा लाइसेंसधारियों के लिए एक संक्रमण काल का प्रस्ताव भी है ताकि इस बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके। वैज्ञानिक जांच को मजबूत करने के लिए फैटी एसिड प्रोफाइलिंग और बीटा-सिटोस्टेरॉल परीक्षण जैसे उपकरण अपनाए जाएंगे, जिसमें 7 पीपीएम की सीमा निर्धारित की गई है।

महाराष्ट्र में पहले से लागू हुआ नियम

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 1 मई 2026 से राज्यभर के रेस्तरांओं को मेन्यू, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर एनालॉग पनीर और चीज़ के उपयोग का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया है।  यह कदम देश में सबसे पहले लागू होने वाले राज्य-स्तरीय नियमों में से एक है।

जमीनी हकीकत — सूरत से दिल्ली तक नकली पनीर के कारखाने

सूरत में एक अवैध कारखाने में पामोलिन तेल, मिल्क सॉलिड पाउडर, पानी और खतरनाक एसिड मिलाकर रोजाना 400 किलो नकली पनीर बनाया जा रहा था, जो दो साल से शहर के स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और फास्टफूड सेंटरों को सप्लाई हो रहा था। पुणे में खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन ने एक कारखाने पर छापा मारकर 1,400 किलोग्राम दूषित पनीर जब्त किया, जो ग्लिसरॉल मोनोस्टियरेट पाउडर और स्किम्ड मिल्क पाउडर से तैयार किया गया था।

डेयरी उद्योग की प्रतिक्रिया

भारतीय डेयरी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आर.एस. सोढ़ी ने कहा कि ‘पनीर एनालॉग’ शब्द ही विवादास्पद है, क्योंकि पनीर परिभाषा से ही एक डेयरी उत्पाद है। FSSAI के मौजूदा नियमों के तहत किसी भी गैर-डेयरी उत्पाद के लिए डेयरी शब्दावली का उपयोग नहीं किया जा सकता। सोढ़ी ने कहा, “पनीर खुला नहीं बेचा जाना चाहिए। केवल पैकेज्ड बिक्री से ही उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित हो सकता है कि वे क्या खरीद रहे हैं।” मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल के उप प्रबंध निदेशक जयतीर्था चारी ने कहा, “असली डेयरी उत्पादों और एनालॉग के बीच स्पष्ट अंतर उपभोक्ता विश्वास की रक्षा के लिए जरूरी है। मदर डेयरी उपभोक्ताओं को प्रामाणिकता और गुणवत्ता पर शिक्षित करने की पहल में निवेश कर रही है।”

बाज़ार की संरचना — चुनौती कहाँ है?

भारत के पनीर बाज़ार की संरचना नियमन को और जटिल बनाती है — अमूल, मदर डेयरी, पराग मिल्क फूड्स और कंट्री डिलाइट जैसे संगठित ब्रांड कुल पनीर बिक्री का केवल लगभग 10% हिस्सा रखते हैं। शेष बाज़ार असंगठित क्षेत्र के हाथ में है, जहाँ गैर-डेयरी विकल्पों को अक्सर बिना किसी खुलासे के असली पनीर के रूप में बेचा जाता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नकली पनीर का यह कारोबार वर्षों से चल रहा था और सरकार ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कठोर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं और पीड़ित उपभोक्ताओं को मुआवजा मिले। सत्ता पक्ष के नेताओं ने FSSAI के इस कदम की सराहना करते हुए इसे “उपभोक्ता हितों की रक्षा में मोदी सरकार की प्रतिबद्धता” बताया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस प्रतिबंध को खाद्य सुरक्षा कानून 2006 की धारा 21 के तहत अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) से जोड़कर देखा जा रहा है।

आम जनता में क्या है माहौल?

सोशल मीडिया पर #SyntheticPaneer और #FakePaneer हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। लोग घर पर ही पनीर की शुद्धता जाँचने के तरीके शेयर कर रहे हैं —पनीर में आयोडीन की कुछ बूंदें डालने पर यदि वह नीला हो जाए तो स्टार्च की उपस्थिति का संकेत मिलता है, जो यह दर्शाता है कि पनीर सिंथेटिक हो सकता है। दिल्ली, मुंबई, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों की गृहिणियों ने बताया कि वे अब बाहर से पनीर खरीदने से डरने लगी हैं। कई परिवारों ने घर पर ही पनीर बनाना शुरू कर दिया है।

आगे क्या?

FSSAI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “ये सिफारिशें केंद्रीय सलाहकार समिति (CAC) की बैठक में चर्चा की गई थीं। यह मामला अभी समीक्षा और परामर्श के अधीन है और अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।” FSSAI ने स्पष्ट किया है कि मिलावटी या नकली उत्पादों को असली दूध, पनीर या खोया बताकर बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पनीर भारतीय रसोई की आत्मा है — शादी की थाली से लेकर रोज़ की सब्जी तक। जब इस पवित्र खाद्य पदार्थ में ही मिलावट होने लगे तो यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि लाखों डेयरी किसानों के जीवन और उपभोक्ता के भरोसे का भी मामला बन जाता है। FSSAI का यह कदम स्वागत योग्य है — लेकिन असली परीक्षा होगी इसके प्रभावी क्रियान्वयन में।

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