कोलकाता में बुलडोजर एक्शन: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी की भारी जीत के महज कुछ घंटों बाद राज्य की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक न्यू मार्केट (हॉग मार्केट) इलाके में बुलडोजर एक्शन की घटना ने राजनीतिक तनाव को नया मोड़ दे दिया है। टीएमसी ने इसे बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा “यूपी मॉडल” लाने की साजिश बताया है, जबकि कुछ स्थानीय लोगों ने इसे अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करार दिया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “कोलकाता के ऐतिहासिक न्यू मार्केट में बंगाली ‘परिवर्तन’ का मजा ले रहे हैं। पुलिस की अनुमति से विजय उत्सव के दौरान बुलडोजर से मीट शॉप्स तोड़ी गईं।” वीडियो में बीजेपी के झंडे लहराते दिख रहे हैं और भीड़ बुलडोजर के साथ संरचना तोड़ रही है। टीएमसी के न्यू मार्केट यूनियन ऑफिस को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) मौजूद थे लेकिन हस्तक्षेप नहीं किया।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं: ‘परिवर्तन’ vs ‘गुंडागर्दी’
सोशल मीडिया (विशेषकर एक्स) पर इस घटना ने तूफान खड़ा कर दिया है। टीएमसी और विपक्षी खेमे ने इसे “बीजेपी की बदले की राजनीति” और “बुलडोजर राज” बताया। कांग्रेस ने इसे मोदी-बीजेपी की नफरत की राजनीति से जोड़ा, जबकि कई यूजर्स ने इसे “अवैध अतिक्रमण हटाने” की कार्रवाई माना।
एक यूजर ने लिखा: “15 साल टीएमसी के अराजकता के बाद अब असली रूल ऑफ लॉ आएगा। कर्म है ये!” विपक्षी समर्थकों ने चेतावनी दी कि यह “मणिपुर जैसी स्थिति” बन सकती है, जहां कई जगह टीएमसी दफ्तरों पर हमले, आगजनी और लूट की खबरें आईं। बीजेपी समर्थक इसे “अवैध निर्माणों पर कार्रवाई” बता रहे हैं और टीएमसी शासन के दौरान हुए अतिक्रमणों का जिक्र कर रहे हैं। पोस्ट-पोल हिंसा की खबरें राज्य के अन्य हिस्सों से भी आ रही हैं, जिसमें आगजनी, वंदलीकरण और एक-दो मौतों की रिपोर्ट्स शामिल हैं। चुनाव आयोग ने स्थिति पर नजर रखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बांग्लादेश में उम्मीद की किरण: टीस्टा समझौता फिर चर्चा में
बीजेपी की जीत का असर सीमा पार भी दिख रहा है। बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) ने बीजेपी और सुवेंदु अधिकारी की सराहना की। पार्टी ने ममता बनर्जी पर टीस्टा जल बंटवारे समझौते को रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब बीजेपी शासन में भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत होंगे और लंबे समय से अटका टीस्टा प्रोजेक्ट आगे बढ़ सकता है।
‘विपक्ष मुक्त भारत’ की बहस तेज
बीजेपी की लैंडस्लाइड जीत (लगभग 207 सीटें) के बाद राजनीतिक विश्लेषक ‘विपक्ष मुक्त भारत’ की चर्चा कर रहे हैं। तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों ने अलग रुझान दिखाया, लेकिन बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत हो गया। सुवेंदु अधिकारी को बंगाल का ‘योगी’ बनाने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। आम जनता में मिश्रित भावनाएं हैं। एक तरफ व्यापारी वर्ग में दहशत है और दुकानें जल्दी बंद हुईं, दूसरी तरफ कई लोग “परिवर्तन” की उम्मीद जता रहे हैं। पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है।
विश्लेषण: यह घटना सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का आईना बन गई है। बीजेपी के लिए यह “कानून का राज” स्थापित करने का अवसर है, जबकि टीएमसी इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन की भूमिका और कानून-व्यवस्था की स्थिति तय करेगी कि बंगाल में सच्चा परिवर्तन आता है या नया चक्रव्यूह।

