नयारा एनर्जी ने बढ़ाया कीमत: पेट्रोल ₹5.30 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा; ईरान युद्ध और 35 दिन के शटडाउन का असर

नयारा एनर्जी ने बढ़ाया कीमत: रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नयारा एनर्जी (Nayara Energy) ने मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध और अपनी रिफाइनरी के 35 दिन के मेंटेनेंस शटडाउन के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5.30 प्रति लीटर और डीजल की कीमत में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि की है। यह बढ़ोतरी देशभर के नयारा के रिटेल आउटलेट्स पर लागू हुई है।

नयारा एनर्जी की वडिनार (गुजरात) रिफाइनरी अप्रैल की शुरुआत से लगभग 35 दिनों के लिए बंद रहेगी। इस दौरान भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता का करीब 8 प्रतिशत प्रभावित होगा। कंपनी ने मेंटेनेंस का काम पहले से प्लान किया था, लेकिन यह शटडाउन ऐसे समय में हो रहा है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर दबाव है।

क्यों बढ़ी कीमतें?

वैश्विक स्तर पर रिफाइंड प्रोडक्ट्स (पेट्रोल, डीजल, ATF) की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। ईरान युद्ध के कारण भारत के कच्चे तेल आयात और सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है। शटडाउन के दौरान उत्पादन रुकने से घरेलू उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है, जिसके चलते कंपनी ने मार्जिन बचाने और लागत कवर करने के लिए कीमतें बढ़ाई हैं।

सरकार और अन्य कंपनियों की स्थिति:
अभी तक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) ने रिटेल पेट्रोल और डीजल की सामान्य कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। सरकार लगातार आश्वासन दे रही है कि देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और पैनिक बुकिंग न करें। हालाँकि, प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। नयारा एनर्जी ने कहा है कि उसके पास पर्याप्त बफर स्टॉक है और शटडाउन के दौरान सप्लाई में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी। अन्य रिफाइनरियां भी अपनी क्षमता बढ़ाकर कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं।

ताजा अपडेट (26 मार्च 2026):

नयारा की यह कीमत बढ़ोतरी आज से प्रभावी मानी जा रही है। अभी तक देशभर में सामान्य पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कुछ निजी आउटलेट्स पर असर दिख सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा या शटडाउन का असर बढ़ा तो आगे और दबाव पड़ सकता है। यह घटना मध्य पूर्व संकट के भारत पर पड़ रहे प्रभाव को स्पष्ट रूप से दिखाती है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही ईंधन भरवाएं। पेट्रोलियम मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। यदि आगे कोई नया विकास (जैसे सरकारी हस्तक्षेप या अन्य कंपनियों की प्रतिक्रिया) होता है तो अपडेट किया जाएगा।

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