स्काईरूट एयरोस्पेस के ‘मिशन आगमन’ ने खोला नया अध्याय, पीएम मोदी ने दी बधाई
Vikram-1: नई दिल्ली। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने शनिवार को नया इतिहास रच दिया। हैदराबाद की निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ का ‘मिशन आगमन’ के तहत सफल प्रक्षेपण किया। इसके साथ ही भारत पहली बार किसी निजी कंपनी द्वारा विकसित लॉन्च व्हीकल के जरिए उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ गया।
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श्रीहरिकोटा से हुआ प्रक्षेपण
विक्रम-1 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। यह चार चरणों वाला स्वदेशी रॉकेट तेज, किफायती और मांग के अनुरूप लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
3डी-प्रिंटेड इंजन बना सबसे बड़ी खासियत
विक्रम-1 के ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल में पहली बार पूरी तरह 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन का इस्तेमाल किया गया है। यह भारतीय ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल में इस तकनीक का पहला प्रयोग है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष तकनीक के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
अंतरिक्ष में भेजे गए खास पेलोड
मिशन के साथ लैब में तैयार डायमंड लोटस, माइक्रोआर्ट, 18 कैरेट सोने से बना सूक्ष्म रॉकेट तथा वैज्ञानिक सी.वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं अंतरिक्ष में भेजी गईं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित ‘वंदे मातरम्‘ पोस्टकार्ड और स्काईरूट टीम व शुभचिंतकों के संदेश भी मिशन का हिस्सा बने।
भारत की स्पेस इंडस्ट्री को मिलेगा नया बल
2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के बाद भारत में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप सामने आए हैं। करीब 8.4 अरब डॉलर की भारतीय स्पेस इकॉनमी में विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का ऐतिहासिक क्षण बताते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मिशन देश के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की सोच का प्रतीक है तथा निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
विक्रम-1 रॉकेट की क्या खासियत है?
- विक्रम-1 रॉकेट का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक, डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है।
- विक्रम-1 एक 24 मीटर लंबा ऑर्बिटल क्लास रॉकेट है, जिसे छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए तैयार किया गया है।
- यह पूरी तरह हल्के कार्बन-कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर से बना है, जिससे इसका वजन कम और क्षमता अधिक हो जाती है।
- कंपनी के अनुसार कार्बन फाइबर सबसे मजबूत स्टील की तुलना में लगभग पांच गुना हल्का होता है, जिससे रॉकेट अधिक दक्ष बनता है।
- रॉकेट में तीन सॉलिड प्रोपल्शन स्टेज हैं, जबकि सबसे ऊपर एक ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है।
- यही मॉड्यूल एक ही मिशन में कई उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करने में मदद करेगा।
- विक्रम-1 को 450 किलोमीटर की लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।Vikram-1:

