कांग्रेस की दिग्गज नेता मोहसिना किदवई का इंतकाल — एक युग का अंत, जानिए उनके जीवन के अहम पहलू

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को 94 वर्ष की आयु में इंतकाल हो गया। उनके दामाद रजीउर रहमान किदवई ने बताया कि वह उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थीं और उन्होंने नोएडा के मेट्रो अस्पताल में अंतिम सांस ली। दिल्ली के निजामुद्दीन कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे-खाक किया गया। उनके जाने से कांग्रेस पार्टी और पूरे देश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। मोहसिना किदवई को कांग्रेस आलाकमान और विशेषकर गांधी परिवार के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को हुआ था। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और शुरुआत से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। वे उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रहने वाली थीं। वे शुरू से ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ी रहीं और पार्टी की नीतियों तथा विचारधारा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उत्तर प्रदेश की राजनीति से की शुरुआत

मोहसिना किदवई 1960 और 1970 के दशक में उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद की भी सदस्य रहीं और उत्तर प्रदेश की कई कांग्रेस सरकारों में मंत्री भी रहीं।  यूपी की जमीनी राजनीति से उनका गहरा जुड़ाव रहा और वे आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थीं।

आजमगढ़ उपचुनाव 1978 — वो ऐतिहासिक जीत जिसने सियासत बदल दी

1977 का दौर इंदिरा गांधी के लिए सबसे कठिन समय था। जनता पार्टी की लहर थी और बड़े-बड़े दिग्गज पीछे हट रहे थे। जब इंदिरा जी ने आजमगढ़ उपचुनाव के लिए कमलापति त्रिपाठी से चुनाव लड़ने को कहा, तो उन्होंने मना कर दिया। उस कठिन समय में मोहसिना किदवई ने अपनी नेता की आवाज पर बिना किसी हिचकिचाहट के आजमगढ़ की राह पकड़ी। मोहसिना किदवई का राष्ट्रीय राजनीति में आगमन 1978 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में जीत से हुआ। आपातकाल और कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने के बाद इस उपचुनाव में जीत ने न सिर्फ किदवई को राष्ट्रीय राजनीति के अर्श पर पहुंचा दिया, बल्कि कांग्रेस में नई जान फूंकी।

मेरठ से तीन बार सांसद — इतिहास रचने वाली नेता

वे उत्तर प्रदेश के मेरठ निर्वाचन क्षेत्र से छठी लोकसभा के लिए चुनी गईं और सातवीं तथा आठवीं लोकसभा में भी इस सीट पर बनी रहीं, यानी उन्होंने तीन बार मेरठ से सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व किया। 1980 के लोकसभा चुनाव में मोहसिना किदवई ने जनता पार्टी (सेक्युलर) के उम्मीदवार हरीश पाल को 57,217 वोटों से हराया। इसके बाद 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें दोबारा मैदान में उतारा, जहां उन्होंने लोकदल के मंजूर अहमद को 96,518 वोटों से पराजित किया। वे मेरठ की पहली महिला सांसद थीं — एक ऐसी उपलब्धि जो उन्हें इतिहास में अमर करती है।

केंद्रीय मंत्री के रूप में — रेल, सड़क और हवाई — तीनों एक साथ!

किदवई राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य, परिवहन और शहरी विकास मंत्री रहीं। मोहसिना किदवई के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जो न उनसे पहले किसी के पास था और न बाद में — वह देश की एकमात्र ऐसी मंत्री रहीं जिनके पास रेल, सड़क और नागरिक उड्डयन जैसे तीन महत्वपूर्ण विभाग एक साथ थे। बाद में इन विभागों को अलग-अलग मंत्रालयों में विभाजित कर दिया गया।

राज्यसभा में भी लंबी सेवा

मोहसिना किदवई दो बार छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सदस्य भी चुनी गईं और 2004–2010 तथा 2010–2016 तक राज्यसभा में सक्रिय रहीं। इस तरह उन्होंने संसदीय जीवन में लगभग चार दशकों तक अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

पार्टी संगठन में भी अहम जिम्मेदारियाँ

किदवई अतीत में कांग्रेस की कार्यकारी समिति और पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुकी थीं। वह कांग्रेस कार्य समिति की सदस्य और पार्टी संगठन में कई अन्य पदों पर रहीं।

नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली सांसद राहुल गांधी ने कहा कि ‘वे कांग्रेस पार्टी की एक अत्यंत वरिष्ठ और वफादार नेता थीं, जिनका पूरा जीवन जनसेवा का उदाहरण रहा है। अपनी सादगी, सौम्यता और गरिमापूर्ण राजनीतिक सफलता से उन्होंने देश की महिलाओं की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।’ राजस्थान के कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि उनकी सहजता और पार्टी के प्रति समर्पण सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगे।

विरासत और योगदान

वे कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में से थीं जिन्होंने पार्टी के कई उतार-चढ़ाव देखे और अपना पूरा जीवन पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित कर दिया। उत्तर प्रदेश की जमीनी राजनीति से लेकर दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक, उनके लंबे और बेदाग राजनीतिक योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। मोहसिना किदवई का पूरा जीवन इस बात का प्रमाण है कि सादगी, समर्पण और संघर्ष से एक साधारण महिला भी असाधारण ऊंचाइयां छू सकती है। उनकी विदाई के साथ भारतीय राजनीति का एक स्वर्णिम अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया।

 

यह भी पढ़ें : नोएडा प्राधिकरण बोर्ड की 222वीं बैठक: किसानों और भूखंड स्वामियों के लिए बड़े फैसले, ‘न्यू नोएडा’ की जमीन दरों को मिली मंजूरी

यहां से शेयर करें