केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुरू की बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली

New Delhi news  केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को दिल्ली के यूईआर-द्वितीय कॉरिडोर स्थित मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली का उद्घाटन किया। यह देश का दूसरा एमएलएफएफ टोल प्लाजा है। इससे पहले गुजरात के सूरत-भरूच खंड स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर इस प्रणाली की शुरूआत की गई थी। समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा, अजय टम्टा, पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सहरावत, उत्तर पश्चिम दिल्ली के सांसद योगेंद्र चंदौलिया तथा एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नई एमएलएफएफ प्रणाली लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति धीमी करने की जरूरत नहीं होगी। हाई-रेजोल्यूशन कैमरे, एएनपीआर तकनीक, आरएफआईडी, रडार, लिडार और फास्टैग आधारित डिजिटल नेटवर्क के जरिए वाहन की पहचान कर उसके खाते से स्वत: टोल शुल्क कट जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले टोल प्लाजा पर लंबी कतारों के कारण यात्रियों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते थे, लेकिन नई प्रणाली से ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी और यात्रा अधिक सुगम होगी।
टोल संग्रह में बढ़ेगी पारदर्शिता
गडकरी ने बताया कि फास्टैग लागू होने के बाद टोल संग्रह में बड़ा इजाफा हुआ है। अब एमएलएफएफ प्रणाली से टोल संग्रह की लागत 15 प्रतिशत से घटकर केवल 4 प्रतिशत रह जाएगी, जिससे हर साल हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी। साथ ही चोरी और राजस्व रिसाव भी पूरी तरह समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली डिजिटल इंडिया और स्मार्ट मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ेगी।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
गडकरी ने कहा कि लगातार वाहन चलने से ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। अध्ययनों के अनुसार इस प्रणाली से हर वर्ष करोड़ों रुपये के ईंधन की बचत तथा हजारों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि सरकार कचरे और पराली के उपयोग से सड़क निर्माण में भी नई तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। प्लास्टिक, ग्लास, रबर और बायो-बिटुमिन का उपयोग कर पर्यावरण अनुकूल सड़कें तैयार की जा रही हैं।
नौ राज्यों के 17 टोल प्लाजा होंगे शामिल
एनएचएआई के अनुसार पहले चरण में नौ राज्यों के 17 टोल प्लाजा को एमएलएफएफ प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। गुजरात और दिल्ली के बाद हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम के कई टोल प्लाजा को भी चरणबद्ध तरीके से इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। दूसरे चरण में मार्च 2027 तक 108 से अधिक टोल प्लाजा को इस तकनीक के दायरे में लाने की योजना है।

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