भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता: मोदी-ट्रंप की बैठक में उठे अहम मुद्दे, अब अंतिम चरण में वार्ता

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापार समझौते (ट्रेड डील) ने दोनों देशों के बीच अनिश्चितता पैदा की है। यह बात भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जी-7 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक के बाद कही। उन्होंने कहा कि संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और दोनों देशों के नेता इन्हें संभालते हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पेरिस में संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि मोदी-ट्रंप बैठक में व्यापार समझौता प्रमुख विषय रहा। यह बैठक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में जी-7 सम्मेलन के दौरान 17 जून को हुई। मिस्री ने जोर दिया कि पिछले एक साल से दोनों देशों के बीच कुछ अनिश्चितता बनी रही, जिसे दूर करने के लिए यह चर्चा जरूरी थी। अब वार्ता अंतिम चरण में पहुंच गई है और जल्द ही सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।

पृष्ठभूमि और पिछले घटनाक्रम

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) की रूपरेखा पर सहमति जताई थी, जिसमें अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा की। भारत की ओर से रूसी तेल आयात कम करने और अमेरिकी ऊर्जा तथा अन्य उत्पादों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे शामिल थे। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ नीतियों, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और अन्य वैश्विक कारकों के कारण बातचीत में रुकावटें आईं। ट्रंप प्रशासन की लेन-देन वाली (transactional) नीति के तहत बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएं, बौद्धिक संपदा और श्रम मुद्दों पर कड़ी बातचीत हुई। पिछले साल टैरिफ बढ़ोतरी और तनाव के बावजूद, दोनों पक्ष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत रखना चाहते हैं, खासकर चीन, ऊर्जा सुरक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग के संदर्भ में।

मोदी-ट्रंप बैठक के प्रमुख बिंदु

व्यापार पर फोकस: ट्रंप ने बैठक को “बहुत अच्छी” बताया और मोदी को “कठोर वार्ताकार” (tough negotiator) कहा। दोनों नेता समझौते को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे।
अन्य मुद्दे: भारतीय नाविकों की खाड़ी में सुरक्षा, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी चर्चा हुई। ट्रंप ने भविष्य में भारत आने का संकेत दिया।
सकारात्मक नोट: विदेश सचिव मिस्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने “महत्वपूर्ण प्रगति” की है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीआईबी) के बयान में भी व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में प्रगति का उल्लेख किया गया।

विशेषज्ञों का आकलन

विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच और निवेश, जबकि अमेरिका के लिए व्यापार घाटा कम करना और ऊर्जा सुरक्षा के अवसर। हालांकि, विवरण (devil in the details) अभी बाकी हैं और कानूनी तथा घरेलू राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता दूर करने से विदेशी निवेश बढ़ेगा और रुपया स्थिर होगा। भारत सरकार का रुख साफ है कि वह राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए पारस्परिक लाभ वाला समझौता चाहती है। विदेश सचिव मिस्री के बयान से लगता है कि दोनों पक्ष अब “निश्चितता” की ओर बढ़ रहे हैं। यह घटनाक्रम वैश्विक व्यापारिक अस्थिरता के समय में भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती को दर्शाता है। आगे की प्रगति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, खासकर जब दोनों नेता व्यक्तिगत स्तर पर अच्छे संबंध बनाए रखना चाहते हैं।

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