फरीदाबाद से नोएडा और गाजियाबाद तक 56 किलोमीटर दूरी तय कर वह रूट जो शुरू में यात्रियों का 2 घंटे का सफर 30 मिनट में समेटने का वादा लेकर आया था, आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। 1989 में लगभग 1,000 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से शुरू हुए फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (FNG) ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का नोएडा में पड़ने वाला 23 किलोमीटर का हिस्सा अब तक केवल 11.6 किलोमीटर पर ही सीमित रह गया है, जिससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के बीच सीधी कनेक्टिविटी बाधित है।
नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कृष्णा करुणेश ने पिछले सप्ताह निर्माण में रुकावटों और देरी की स्थिति के मद्देनजर अधिकारियों से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। सीईओ के निर्देश पर तैयार की जा रही रिपोर्ट में सेक्टर-63 छिजारसी से सेक्टर-168 (यमुना तक) के बीच बचे हुए निर्माण कार्यों की बारीकी से समीक्षा की जा रही है ताकि लंबित बाधाओं का समाधान कराकर काम तेजी से पूरा किया जा सके।
क्या पूरा हुआ, क्या अधूरा
कुल 23 किमी वाले नोएडा हिस्से में केवल 11.6 किमी का निर्माण पूरा हुआ है; शेष लगभग 11.4 किमी लंबित है। गाजियाबाद की तरफ से छिजारसी के सामने प्रस्तावित 650 मीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनकर नहीं बन सकी है। वहां से 3.68 किमी आगे जाने पर बाईं ओर सर्विस रोड और दाहिनी ओर मुख्य सड़क तथा सर्विस रोड के काम अधूरे पड़े हैं। आगे 14.610 किमी पर प्रस्तावित एक और एलिवेटेड सेक्शन था, जिसकी कुल लंबाई 5.665 किमी निर्धारित थी; इसे लेकर अब नोएडा अथॉरिटी ने एलिवेटेड के बजाय सामान्य सड़क बनाने के विकल्प पर मंथन शुरू कर दिया है।
बाधाओं के कारण और विभागीय सहमति की जरूरत
अधिकारियों ने बताया कि कुछ हिस्सों में जमीन विवाद और पुरानी संरचनाओं के कारण काम थम गया है। नोएडा के सोरखा गांव के पास एक पुरानी संरचना से जुड़ा जमीन-हित विवाद अदालत में लंबित है, जिसके कारण उस खंड का निर्माण रोक दिया गया है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे का मार्ग हिंडन नदी और यमुना पर से गुजरता है, इसलिए सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की मंजूरी का इंतजार भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। कुछ हिस्से डूब क्षेत्र में आते हैं, इसलिए उन स्थानों पर निर्माण के लिये सिंचाई विभाग तथा संबंधित एजेंसियों की सहमति अनिवार्य बताई गई है।
विकल्प और प्रशासन की कार्रवाई
नोएडा अथॉरिटी अब दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रही है — प्रस्तावित एलिवेटेड संरचनाओं की जगह सामान्य सड़क बनाना या सिंचाई विभाग की शर्तों के अनुरूप उच्च-स्तरीय एलिवेटेड रोड का निर्माण कराना। अधिकारियों ने कहा है कि अगर सिंचाई विभाग से अनापत्ति पत्र और संबंधित भूमि विवादों का समाधान जल्दी हुआ तो बचे हुए हिस्सों का निर्माण शॉर्टलिस्टेड ठेकेदारों के माध्यम से तेजी से पूरा कराया जा सकता है।
स्थानीय और क्षेत्रीय प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि FNG एक्सप्रेसवे की देरी से न सिर्फ नोएडा-फरीदाबाद-गाजियाबाद के रोजमर्रा के आवागमन पर असर पड़ा है, बल्कि अंतर-नगर कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के बीच प्रत्यक्ष कनेक्शन न होने से ट्रैफिक का दबाव दूसरे मार्गों पर बढ़ा है और यात्रा समय कम करने की मूल योजना अधूरी रह गई है। सीईओ ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे हर बाधा का वर्गीकरण करके, जिम्मेदार विभागों और स्टेकहोल्डर्स की एक टाइमलाइन सहित विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। रिपोर्ट में जमीन संबंधी मामले, पर्यावरण/सिंचाई विभाग की अनुमति, एलिवेटेड बनाम सामान्य सड़क के तकनीकी और लागत-आधारित विकल्प, ठेकेदारों की ओवरऑल कम्पलीयन्स तथा संभावित वित्तीय लागत समायोजित करने का अनुरोध किया गया है।
आगे की प्रक्रिया
प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद एक त्वरित समन्वय बैठक बुलायी जाएगी, जिसमें सिंचाई विभाग, स्टेट पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट, जिला प्रशासन और कानूनी टीमों को शामिल किया जाएगा। अधिकारी ने आश्वस्त किया कि यदि कानूनी और तकनीकी अड़चनों का शीघ्र समाधान हुआ तो शेष हिस्सों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से अगले 12–18 महीनों में पूरा कराया जा सकता है, अन्यथा देरी और बढ़ने की संभावना बनी रहेगी।
नागरिकों की प्रतिक्रियाएँ और उम्मीदें
स्थानीय आवागमन करने वाले लोग और व्यापारिक समुदाय लंबे समय से इस परियोजना की पूर्णता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई छोटे व्यापारी और पिक-अप/टैक्सी चालक कहते हैं कि जब तक फुल कनेक्टिविटी नहीं मिलती, तब तक समय और ईंधन की लागत में कमी नहीं आएगी। वहीं कुछ निवासी कहते हैं कि अगर एलिवेटेड की जगह सामान्य सड़क बनाई जाती है तो निर्माण अवधि कम हो सकती है, पर लंबे समय में बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में यह स्थायी समाधान साबित होगा या नहीं, यह देखना बाकी है।
निष्कर्ष
37 साल बाद भी अधूरी FNG एक्सप्रेसवे परियोजना नोएडा के यातायात और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए एक चुनौती बनी हुई है। नोएडा अथॉरिटी की ताजा स्थिति रिपोर्ट और सीईओ के निर्देशों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि शेष तकनीकी, कानूनी और विभागीय अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाकर परियोजना को गति दी जाएगी। प्राधिकरण की अगली बैठक और रिपोर्ट में तय होने वाली टाइमलाइन परियोजना के भविष्य का रुख तय करेगी।

