भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ऐतिहासिक जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया है। आज अमित शाह की अध्यक्षता में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में पूर्व तृणमूल नेता और विपक्ष के पूर्व नेता सुवेंदु अधिकारी को पार्टी का नेता चुना गया है। वे राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सुवेंदु अधिकारी का नाम सर्वसम्मति से पास हुआ। अमित शाह केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में कोलकाता पहुंचे थे। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के साथ एयरपोर्ट पर भावुक स्वागत का माहौल देखा, जहां दोनों एक ही वाहन में सवार हुए और दक्षिणेश्वर काली मंदिर भी गए। यह तस्वीरें सुवेंदु के नाम पर मुहर लगने का संकेत दे रही थीं।
चुनावी जीत और सुवेंदु की भूमिका
भाजपा ने २०० से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर (भबानीपुर) में हराकर बड़ा उलटफेर किया। यह उनकी दूसरी बड़ी जीत है 2021 में उन्होंने नंदीग्राम से ममता को हराया था। अमित शाह की रणनीति के तहत सुवेंदु को ममता के खिलाफ मोर्चे पर खड़ा किया गया, जो सफल रहा। राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा भंग कर दी, जिसके बाद नई सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया। सुवेंदु अधिकारी जल्द ही गवर्नर हाउस जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
शपथ ग्रहण समारोह
शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर होगा, जो रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती (पोइशे बोइशाख) के दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री इस समारोह में शामिल होंगे। सूत्रों का कहना है कि सुवेंदु अधिकारी के साथ दो उप-मुख्यमंत्री (Deputy CMs) भी बनाए जा सकते हैं, ताकि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर उत्तरी बंगाल और अन्य समुदायों—को संतुलित प्रतिनिधित्व मिल सके। संभावित नामों में दिलीप घोष या अग्निमित्रा पॉल जैसे नेता शामिल हो सकते हैं।
सुवेंदु अधिकारी कौन हैं?
सुवेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी थे और मंत्री भी रह चुके हैं। दिसंबर 2020 में उन्होंने भाजपा जॉइन की। वे नंदीग्राम के स्थानीय नेता के रूप में जाने जाते हैं और विकास, उद्योग तथा कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर मुखर रहते हैं। उनकी जीत को “परिवर्तन” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रतिक्रियाएं
भाजपा नेताओं ने इसे “बंगाल का सूर्योदय” बताया। टीएमसी की ओर से अभी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी 15 वर्षों के शासन के अंत पर निराशा जता रही है। यह परिवर्तन पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया अध्याय खोलने वाला है। नई सरकार विकास, रोजगार, घुसपैठ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था सुधार पर फोकस करने की उम्मीद है।

