नीट री-एग्जाम की मध्य रात्रि पर छात्रों का आक्रोश: धरनों और पार्टियों के बीच जारी मांग- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो

आज सुबह नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा (री-नीट) होने जा रही है, लेकिन छात्रों के मन में गहरा आक्रोश और अनिश्चितता बरकरार है। मई 2026 में हुए मूल परीक्षा के पेपर लीक घोटाले के बाद रद्द किए गए एग्जाम की छाया अब भी लंबी है। NTA ने 21 जून को दोपहर 2 बजे से 5:15 बजे तक पेन-पेपर मोड में परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है, जिसमें 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल होंगे। एडमिट कार्ड जारी हो चुके हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, लेकिन कई छात्रों के लिए यह ‘दोबारा’ सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि मानसिक तनाव और भविष्य की अनिश्चितता का प्रतीक बन गया है। कुछ छात्रों के लिए यह गम और भी गहरा है। पेपर लीक विवाद के बाद कम से कम 12 छात्रों की आत्महत्या की खबरें आई हैं, जिनमें गाजियाबाद के एक छात्र जतिन का मामला ताजा है, जो परीक्षा के तनाव में फंस गया था। कई अभ्यर्थी अभी भी मानसिक दबाव झेल रहे हैं, जबकि NTA ने मॉक ड्रिल और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया है। पेपर एयरलिफ्ट किए जा रहे हैं, सेटर्स को आइसोलेट किया गया है और केंद्रीय बलों की तैनाती हो रही है। फिर भी सोशल मीडिया पर लीक के नए दावे और टेलीग्राम बैन जैसे उपायों के बावजूद छात्रों का भरोसा डिगा हुआ है।

इसी बीच विपक्षी और छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में धरने चल रहे हैं। CJP ने देर रात तक पार्टी करते हुए भी धरना देने का आरोप झेला, लेकिन उनके समर्थक कहते हैं कि यह छात्रों की पीड़ा को आवाज देने का प्रयास है। अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता दी और कहा कि शिक्षा व्यवस्था में गहरा सुधार जरूरी है। CJP के प्रदर्शनों में छात्र नेता नेहा बोरा जैसी युवा आवाजें भी मुखर हुई हैं, जो सरकार पर सवाल उठा रही हैं। छात्र यूनियन लीडर्स, SFI (स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) और अन्य संगठनों ने भी मंत्रालय तक मार्च निकालने की कोशिश की, हालांकि पुलिस ने उन्हें रोका। कांग्रेस, CPI(ML) और अन्य दलों के छात्र विंग भी प्रधान के इस्तीफे और NTA के खात्मे की मांग कर रहे हैं। CJP के लीडर्स दीपक, आयशा और अन्य प्रवक्ताओं ने कहा है कि एक दिन में इस्तीफा लेना मुश्किल लगता है, लेकिन निरंतर दबाव बरकरार रखा जाएगा। कुछ आलोचक इन्हें ‘लेट नाइट पार्टी’ स्टाइल का प्रदर्शन बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे युवाओं की असली आवाज मानते हैं। केंद्र सरकार ने किसी भी तरह की गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। NTA के अनुसार, कोई नया रजिस्ट्रेशन नहीं और फीस रिफंड की प्रक्रिया चल रही है। सुप्रीम कोर्ट भी मामले पर नजर रखे हुए है।

छात्रों की पीड़ा और सिस्टम की जवाबदेही:
नीट जैसी परीक्षा लाखों युवाओं के सपनों से जुड़ी है। पेपर लीक ने न केवल तैयारी को बर्बाद किया बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए। चाहे CJP के आंदोलन हों या पारंपरिक छात्र संगठनों के, मांग एक ही है- पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार। आज की परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न हो, यह हर अभ्यर्थी की कामना है, लेकिन लंबे समय तक चले इस विवाद ने भरोसे की दीवार को तोड़ दिया है। सरकार, NTA और राजनीतिक दल अब छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दें, न कि आरोप-प्रत्यारोप को। सफलता की राह में बाधाएं कम हों, ताकि ऐसे गम फिर न दोहराए जाएं।

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