देशभर के 22 लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी NEET-UG 2026 परीक्षा एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। 3 मई को हुई परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद सरकार ने 21 जून को पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लिया है, लेकिन इस बार सुरक्षा का अभूतपूर्व बंदोबस्त किया जा रहा है। जहाँ एक ओर घोटाले को उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर शिक्षक ने सरकार की तैयारियों पर भरोसा जताया है, वहीं राजस्थान के सीकर के छात्र अभी भी आशंकाओं से घिरे हुए हैं।
कैसे खुला राज़ — व्हिसलब्लोअर की कहानी
सीकर के रसायन विज्ञान शिक्षक शशिकांत सुथार ने बताया कि 3 मई को परीक्षा संपन्न होने के बाद जब वह अपने छात्रों के प्रश्नपत्र हल कर रहे थे, तभी उनके एक परिचित ने उन्हें एक पीडीएफ दिखाई जिसमें रसायन विज्ञान के प्रश्न थे। जब उन्होंने उस पीडीएफ के सभी 45 प्रश्नों की तुलना NEET के वास्तविक प्रश्नपत्र से की, तो वे चौंक गए सभी 45 प्रश्न हूबहू मेल खा रहे थे। इसके बाद जीव विज्ञान के एक अन्य शिक्षक की मदद से जीव विज्ञान की पीडीएफ का भी मिलान किया गया, जिसके परिणाम भी वही थे। सुथार ने राजस्थान पुलिस और जाँच एजेंसियों को सूचना दी। दिल्ली में एक टीम गठित की गई जो सीकर पहुँची और मामले की जाँच की। इसके बाद राजस्थान विशेष अभियान दल (SOG) ने भी मामला अपने हाथ में लिया। सुथार ने जाँच एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों के भविष्य और उनकी मेहनत की रक्षा के लिए काम किया और यह सुनिश्चित किया कि छात्र दबाव में न आएं। उन्होंने केंद्र सरकार का भी शुक्रिया अदा किया कि उसने NEET-UG 2026 की पुनः परीक्षा का निर्णय शीघ्रता से लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे खुद को इस मामले का ‘हीरो’ नहीं मानते, बल्कि एक जागरूक नागरिक और शिक्षक के रूप में यह उनका कर्तव्य था।
परीक्षा रद्द, जाँच शुरू — 21 जून को दूसरा मौका
3 मई 2026 को 22.7 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए आयोजित यह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा 12 मई को रद्द कर दी गई, जब जाँच में पूर्व-प्रसारित प्रश्नपत्र और वास्तविक प्रश्नपत्र के बीच समानता उजागर हुई। CBI ने जाँच शुरू कर कई गिरफ्तारियाँ कीं। NTA ने 15 मई को घोषणा की कि पुनः परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। साथ ही NTA ने यह भी स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों को कोई नई रजिस्ट्रेशन या अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा और पहले भुगतान की गई फीस वापस की जाएगी।
अभूतपूर्व सुरक्षा — वायुसेना करेगी प्रश्नपत्र की ढुलाई
इस बार सरकार ने पूरे देश में एक “संपूर्ण सरकारी रणनीति” अपनाई है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, डाक विभाग और राज्य सरकारों के साथ समन्वय करते हुए परीक्षा को पारदर्शी और निर्बाध रूप से संचालित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पहली बार भारतीय वायु सेना (IAF) को प्रश्नपत्र परिवहन के लिए तैनात किया जा रहा है। जून माह की अनिश्चित मौसमी परिस्थितियों और लॉजिस्टिक चुनौतियों को देखते हुए IAF अहमदाबाद और हैदराबाद से 18 केंद्रों तक संवेदनशील दस्तावेज पहुँचाएगी। गृह मंत्रालय के आदेश पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की दो-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है। CRPF और CISF के जवान प्रश्नपत्रों की आवाजाही और परीक्षा के बाद OMR शीट की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे हवाईअड्डों, हेलीपैड और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी चाक-चौबंद पहरा रहेगा।
छात्र हितैषी बदलाव भी किए
NTA ने परीक्षा को छात्र अनुकूल बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगी और परीक्षा की अवधि 15 मिनट बढ़ाकर 195 मिनट की गई है। इसके अलावा प्रश्नपत्र पुस्तिका में रफ कार्य के लिए पृष्ठों की संख्या दोगुनी यानी दो से बढ़ाकर चार कर दी गई है।
सोशल मीडिया पर फिर वायरल हुईं झूठी अफवाहें
परीक्षा से कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर एक बार फिर पेपर लीक की अफवाहें वायरल होने लगीं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में घबराहट फैल गई। NTA ने इन अफवाहों को “झूठा, धोखाधड़ीपूर्ण और भ्रामक” करार देते हुए स्पष्ट किया कि ये संगठित नकल गिरोहों की चालें हैं जो छात्रों की चिंता का फायदा उठाकर पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं।
सीकर में छात्र अब भी चिंतित
लीक का केंद्र रहे राजस्थान के सीकर में छात्र अभी भी आशंकित हैं। उनका मानना है कि सरकार के वादे और इंतजाम कागज पर तो अच्छे दिखते हैं, लेकिन 3 मई की घटना ने उनका NTA पर से भरोसा उठा दिया है। कई छात्रों ने कहा कि वे परीक्षा देने तो जाएंगे, लेकिन मन में एक अनिश्चितता बनी हुई है।
CBI जाँच जारी, विरोध-प्रदर्शन भी
CBI की जाँच अभी भी जारी है और कई गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन भी तेज हुए हैं |परीक्षा महज एक परीक्षा नहीं, बल्कि भारत की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता की अग्निपरीक्षा है। सरकार ने सुरक्षा का अभूतपूर्व बंदोबस्त किया है, लेकिन लाखों छात्रों का विश्वास जीतना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। 21 जून का दिन यह तय करेगा कि क्या भारत अपनी सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कर सकता है।

