Ranchi Tiranga Yatra: रांची में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन 15 अगस्त को अपने 22वें दिन में प्रवेश कर गया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए जब आंदोलनकारी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो सदर अस्पताल से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे, तो प्रशासन और पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
गौरतलब है कि 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के बाद प्रशासन देवेंद्र महतो को एंबुलेंस से सदर अस्पताल लेकर आया था, जहां तब से वे भर्ती हैं। इलाज के दौरान भी उन्होंने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी और गुरुवार को उनका अनशन 12वें दिन में प्रवेश कर गया।
अस्पताल में इलाज के बीच से ही देवेंद्र महतो ने प्रदेश के छात्र-युवाओं से अपील की थी कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित तिरंगा यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इसे सफल बनाएं। उनकी इसी अपील पर बड़ी संख्या में छात्र रांची की सड़कों पर उतरे, लेकिन जब देवेंद्र महतो खुद यात्रा में शामिल होने के लिए अस्पताल परिसर से निकलने लगे, तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसे लेकर मौके पर मौजूद समर्थकों और पुलिस के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।
समर्थकों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर देवेंद्र महतो को आंदोलन स्थल और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी छात्र नेताओं ने प्रेस वार्ता कर चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए देवेंद्र महतो को उनके साथियों के बीच सत्याग्रह स्थल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम लाने की अनुमति देने की मांग की थी।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन बीते तीन सप्ताह से लगातार जारी है। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान हालात उग्र हो गए थे, जब पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के बल प्रयोग शुरू कर दिया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा कर रहे युवाओं को खदेड़ा। इस दौरान कई छात्र घायल हुए और देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इस बीच राज्य सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित कई नेता अस्पताल पहुंचकर आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं। छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की मांग दोहराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है। आज तिरंगा यात्रा के दौरान हुई धक्का-मुक्की की घटना के बाद छात्रों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी और बढ़ गई है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

