फांसी की जगह ये फिल्म दिखा दें

बॉलीवुड में हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘द वान’ को लेकर समीक्षकों की प्रतिक्रिया बेहद निराशाजनक रही है। फिल्म की समीक्षा में साफ तौर पर कहा गया है कि कुछ फिल्में सिर्फ खराब होती हैं, कुछ बेहद घटिया, लेकिन कुछ फिल्में दर्शकों के लिए यातना जैसी साबित होती हैं — ‘द वान’ इसी तीसरी श्रेणी में आती है। समीक्षक के मुताबिक, फिल्म में एक भी ऐसी बात नहीं मिली जिसे सराहा जा सके, और यह कोशिश भी बुरी तरह नाकाम रही।

कहानी की शुरुआत

फिल्म की कहानी मुंबई में रहने वाले एक इंजीनियर (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और उसकी पत्नी (तमन्ना भाटिया) के इर्द-गिर्द घूमती है। दंपति निःसंतान जरूर है, लेकिन उनके रिश्ते में प्यार की कमी नहीं दिखाई गई है। फिल्म की शुरुआत में दोनों को समुद्र किनारे बने एक आलीशान बंगले में गाने गाते दिखाया गया है। इसके बाद कहानी उन्हें एक झोलाछाप वैद्य के पास ले जाती है, जो पौरुष बढ़ाने का चूर्ण देता है। इसी क्रम में फिल्म में एक बेहद आपत्तिजनक नस्लीय-रंगभेदी मजाक भी शामिल किया गया है, जिसे समीक्षा में कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है।

समीक्षकों की राय

शुरुआती दृश्यों से ही फिल्म को लेकर नकारात्मक राय बनती नजर आ रही है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया जैसे बड़े कलाकारों के होने के बावजूद फिल्म दर्शकों और समीक्षकों दोनों को निराश करती दिख रही है।

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