Commonwealth Games: ग्लासगो (स्कॉटलैंड)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में शुक्रवार को एक नए सितारे का उदय हुआ। श्रीलंका के 23 वर्षीय रुमेश थारंगा पथिरागे ने सिर्फ एक वैध थ्रो में 89.75 मीटर की दूरी तय कर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। उन्होंने भारत के ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा (85.83 मीटर) को सिल्वर और युवा यशवीर सिंह (85.41 मीटर) को ब्रॉन्ज पर छोड़ दिया। यह श्रीलंका का कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष जैवलिन का पहला गोल्ड है और एथलेटिक्स में 2006 के बाद पहला स्वर्ण। मैदान पर हवा और ठंड की चुनौती भरी परिस्थितियों में पथिरागे का यह प्रदर्शन सिर्फ नंबरों का खेल नहीं था। यह एक ऐसे एथलीट की कहानी थी जो कभी क्रिकेट पिच पर मध्यम गति के गेंदबाज थे और अब विश्व स्तर पर भाले फेंक रहे हैं।
खिलाड़ियों की प्रतिक्रियाएं: खुशी, गर्व और आत्मविश्लेषण
पथिरागे ने जीत के बाद मीडिया जोन में कहा, “मैं अविश्वसनीय रूप से खुश हूं कि श्रीलंका को पहला जैवलिन गोल्ड मेडल दिला पाया। इस गोल्ड का मेरे लिए सब कुछ मतलब है। पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रीय गान सुनना गर्व की बात है।” उन्होंने मौसम की कठिनाई स्वीकार करते हुए बताया, “मौसम की स्थिति हमारे लिए बहुत कठिन थी। लेकिन मैंने दूसरों की दूरी से मैच करने की बजाय अपनी खुद की थ्रो पर फोकस किया।” पथिरागे ने अपने सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में श्रीलंका के लिए गोल्ड जीतना है। कोच टोनी प्रसन्ना के मार्गदर्शन में उन्होंने मूल बातों पर जोर दिया। पथिरागे ने पहले इंटरव्यू में बताया था, “कोच टोनी ने मुझे जैवलिन से परिचित कराया। वे सिर्फ खेल नहीं, जिंदगी भी सिखाते हैं।”
नीरज चोपड़ा, जो चोट से वापसी कर रहे थे, ने सीजन बेस्ट थ्रो के बावजूद सिल्वर पर संतोष जताया। उन्होंने कहा, “मैं और बेहतर थ्रो कर सकता था। लेकिन आगामी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रयास करूंगा। अगर मैं 100 प्रतिशत फिट होता तो लड़ने की भावना और ज्यादा होती। चोट से लौटने के बाद कदम रखने से पहले बहुत सोचता था। तेज दौड़ते समय थोड़ा डर भी लगता था। मिश्रित भावनाएं थीं।” नीरज ने मौसम को लेकर पहले ही क्वालीफिकेशन में कहा था कि ठंड और हवा जैवलिन थ्रोअर के लिए अनुकूल नहीं। उन्होंने पथिरागे को पहले ही दोस्त बताया था, “वह अच्छा लड़का है। मेरा दोस्त है। इस साल वह बहुत अच्छा थ्रो कर रहा है। श्रीलंका के लिए कुछ महान कर रहा है।” यशवीर सिंह, जिन्होंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 85.41 मीटर फेंककर ब्रॉन्ज जीता, खुशी से लबालब थे। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मैंने अपना पर्सनल बेस्ट किया और ऐसी परिस्थितियों में मेडल जीता।” यशवीर का यह प्रदर्शन भारतीय जैवलिन की नई पीढ़ी की ताकत दिखाता है।
मैदानी दर्शकों और माहौल की प्रतिक्रिया
स्कॉटस्टौन स्टेडियम में दर्शकों ने नीरज को सबसे ज्यादा तालियां दीं। जब नीरज ने 85.83 मीटर का थ्रो किया तो स्टेडियम गूंज उठा। लेकिन जब पथिरागे ने 89.75 मीटर का विशाल थ्रो किया तो पूरे मैदान में सन्नाटा छा गया, फिर जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट हुई। श्रीलंकाई समर्थकों और स्थानीय दर्शकों ने “रुमेश, रुमेश” के नारे लगाए। कमेंटेटरों ने उन्हें “मेजर डिस्कवरी” बताया।
भारतीय कैंप में डबल पोडियम की खुशी साफ दिख रही थी। अधिकारियों और साथी एथलीटों ने इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। दक्षिण एशियाई वर्चस्व जारी रहा—श्रीलंका, भारत और पहले पाकिस्तान के अर्शद नदीम जैसे नामों ने जैवलिन को नए मुकाम पर पहुंचाया।
पैसेर से थ्रोअर तक का सफर
रुमेश पथिरागे का सफर असाधारण है। किशोरावस्था में वे 130-134 किमी प्रति घंटे की स्पीड से गेंदबाजी करते थे। अंडर-18 में एशन मलिंगा के बाद दूसरे स्थान पर रहे। कोच के प्रोत्साहन पर जैवलिन अपनाया। लगातार 82 मीटर से ऊपर थ्रो करने की क्षमता ने उन्हें इस साल विश्व लीडर (92.62 मीटर रोम डायमंड लीग) बना दिया। यह उनका करियर का पहला बड़ा मेडल है। इस नतीजे ने साबित कर दिया कि जैवलिन थ्रो में अब सिर्फ नीरज-अर्शद की जुगलबंदी नहीं, बल्कि नया दावेदार भी है। पथिरागे की स्थिरता और नीरज की अनुभव की लड़ाई आगे भी रोचक रहेगी।

