Sonam Wangchuk shifted to Medanta by Delhi High Court: सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने की अनुमति, दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Sonam Wangchuk shifted to Medanta by Delhi High Court: नई दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय ने पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के प्रमुख आवाज सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला वांगचुक के परिवार की पसंद का सम्मान करते हुए आया है, जहां उन्होंने लंबे समय से इलाज की मांग की थी। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें सफदरजंग अस्पताल में इलाज पर भरोसा न होने और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया था। परिवार ने दावा किया कि स्वास्थ्य रिपोर्ट्स में विसंगतियां हैं और वांगचुक को अपनी पसंद के अस्पताल में बेहतर देखभाल मिल सकती है। शुरू में सिंगल जज बेंच ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अपील पर डिवीजन बेंच ने आज यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

पृष्ठभूमि: 21 दिनों की भूख हड़ताल

सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से जंतर मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। उनकी मुख्य मांगें शामिल हैं, NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा, राज्यहूड और पर्यावरण संरक्षण। 21वें दिन (18 जुलाई) उनके स्वास्थ्य बिगड़ने (डिहाइड्रेशन, कम पोटैशियम, केटोन लेवल बढ़ना) के कारण दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल भर्ती कराया। परिवार ने इसे “अवैध हिरासत” करार दिया, जबकि सरकार ने इसे जीवन रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया। अस्पताल ने दावा किया कि वांगचुक ने IV फ्लuids और कुछ दवाओं पर सहमति नहीं दी, लेकिन डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे थे।

कोर्ट की सुनवाई और तर्क

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अन्य ने वांगचुक के शारीरिक स्वायत्तता (bodily autonomy) के अधिकार पर जोर दिया। परिवार ने स्वतंत्र लैब रिपोर्ट्स का हवाला दिया, जिसमें सरकारी रिपोर्ट्स से अंतर था। सरकार ने तर्क दिया कि हड़ताल के 20+ दिनों के बाद स्वास्थ्य जोखिम गंभीर था और प्रोटोकॉल के तहत इलाज हो रहा है। कोर्ट ने शुरू में डॉक्टरों की राय लेने और मेडिकल रिपोर्ट्स की समीक्षा का निर्देश दिया। आज के फैसले में हाईकोर्ट ने मेदांता शिफ्ट को मंजूरी देते हुए कहा कि चेतन वयस्क रोगी का अस्पताल और इलाज चुनने का अधिकार है, बशर्ते स्वास्थ्य जोखिम का ध्यान रखा जाए। यह फैसला विकसित हो रहा है और आगे की सुनवाई 24 जुलाई को हो सकती है।

प्रतिक्रियाएं और आगे की संभावनाएं

गीतांजलि आंगमो ने राहत व्यक्त की और कहा कि परिवार को अब विश्वास है। वांगचुक ने अस्पताल से ही समर्थकों को शांतिपूर्ण तरीके से संसद मार्च (20 जुलाई) जारी रखने का संदेश दिया था। उन्होंने तीन शर्तों पर हड़ताल समाप्त करने की बात कही थी शिक्षा में जवाबदेही, संसद में मुद्दा उठाना और नेताओं का आश्वासन। यह मामला NEET विवाद, छात्र आंदोलन और लद्दाख की लंबित मांगों को फिर से राष्ट्रीय पटल पर लाया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह लोकतंत्र में प्रदर्शन के अधिकार और चिकित्सा स्वायत्तता का परीक्षण है। यह खबर उपलब्ध सूत्रों पर आधारित है और स्वास्थ्य संबंधी अपडेट के लिए आधिकारिक बुलेटिन का इंतजार करें।

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