निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत

हरिद्वार। चर्चित निठारी हत्याकांड के आरोपी और नवंबर 2025 में बरी हुए सुरेंद्र कोली की 17 सितंबर को हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, उन्होंने आत्महत्या की है। उनका शव एक चाय की दुकान के अंदर मिला, जिसे उन्होंने महज तीन दिन पहले किराए पर लिया था।

क्या है निठारी हत्याकांड

2006 में सामने आए इस बहुचर्चित मामले में 19 लोगों की मौत हुई थी। सीबीआई जांच के बाद सुरेंद्र कोली पर 13 हत्याओं का मुकदमा चला और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि नवंबर 2025 में वे इस मामले में बरी हो गए थे।

रिहाई के बाद का सफर

जेल से छूटने के बाद कोली अपने बड़े भाई चंदन कोली और 20 वर्षीय बेटे शिवम के साथ दिल्ली में रहने लगे। इसी दौरान कुछ डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं ने उनसे संपर्क किया, जिसके चलते वे बेंगलुरु और चेन्नई भी आते-जाते रहे। मई तक वे भाई के साथ रहे, इसके बाद अपने पैतृक स्थान अल्मोड़ा गए, जहां उनकी मुलाकात पुराने परिचित नारायण सिंह रावत से हुई, जिन्होंने उन्हें आर्थिक मदद भी दी। जुलाई में कोली हरिद्वार के रोशनबाद इलाके में रहने लगे, जहां उनकी मुलाकात धर्मेंद्र कौशिक से हुई। कोली ने अपनी पहचान छिपाते हुए बताया कि निठारी कांड से जुड़ाव उजागर होने पर उन्हें कहीं रहने की जगह नहीं मिलेगी। कौशिक ने उन्हें पहले एक फैक्ट्री में गार्ड की और फिर अपने पहचान पत्र पर एक अपार्टमेंट में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी दिलाई, लेकिन दोनों नौकरियां उन्होंने बीच में ही छोड़ दीं।

नाम बदलकर जीवन बिताना

इस दौरान 28 वर्षीय जय कश्यप नामक युवक से उनकी मुलाकात हुई, जिसने उन्हें हरिद्वार में एक चाय की दुकान दिलाई। जय कश्यप को कोली ने अपना नाम ‘सदाराम’ बताया था। परिजनों के अनुसार, वे लगातार अपनी असली पहचान को लेकर चिंतित रहते थे।

मौत से पहले की घटनाएं

नारायण सिंह रावत ने बताया कि मौत से एक रात पहले कोली ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी बताया कि दुकान का सामान खरीदने के लिए कोली ने उनसे 15 हजार रुपए मांगे थे, लेकिन उनके पास इतनी रकम नहीं थी, जिसे रावत आत्महत्या की एक वजह मान रहे हैं। हालांकि कोली के भाई ने पुलिस की आत्महत्या वाली थ्योरी पर संदेह जताया है और कहा है कि इस मौत में कुछ गड़बड़ है। दुकान से एक डायरी बरामद हुई है, जिसमें कोली खर्च का हिसाब रखते थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है। बेटे शिवम ने मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया।

सह-आरोपी मनिंदर सिंह पंडेर का हाल

निठारी कांड में कोली के साथ आरोपी रहे मनिंदर सिंह पंडेर अगस्त 2023 में सबूतों के अभाव में बरी हुए थे। वे फिलहाल चंडीगढ़ में रहते हैं और बदायूं स्थित उर्वरक फैक्ट्री के प्रबंधन कार्य में लौट आए हैं। परिजनों का कहना है कि बीते 10 महीनों में सुरेंद्र कोली आर्थिक तंगी और अपनी पहचान को लेकर लगातार परेशान रहे तथा कई बार ठिकाना बदलते रहे, जिसके बाद अंततः हरिद्वार में उनकी मौत हो गई।

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