पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार इलाके में रविवार की तड़के हुई भीषण अग्निकांड में जो दर्दनाक कहानियाँ सामने आ रही हैं, वे हर संवेदनशील दिल को झकझोर कर रख देती हैं। 3 मई 2026 की रात लगभग 3:50 बजे, विवेक विहार फेज-1 स्थित एक चार मंजिला आवासीय इमारत में अचानक भीषण आग भड़क उठी और देखते ही देखते यह आग इमारत की पहली से चौथी मंजिल तक फैल गई। इस हादसे में नौ लोगों की जान चली गई, जिनमें एक डेढ़ साल का मासूम बच्चा भी शामिल था।‘वो दूसरों को बचाने में लग गई, खुद नहीं बच सकी’
इस त्रासदी में कुछ ऐसे नाम भी हैं जो अब हमेशा के लिए याद किए जाएंगे। एक पीड़ित परिवार के परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी आग की लपटों में फंसे पड़ोसियों को निकालने में लगी रही खुद बाहर निकलने का सोचा ही नहीं। परिवार वाले बताते हैं कि उसने अपनी जान देकर कई जिंदगियाँ बचाईं। मृतकों में से एक, निशांक जैन, ने आग लगने के वक्त करीब 3:50 बजे और फिर 4 बजे कई लोगों को फोन किया, बार-बार कहते रहे “मुझे बचाओ, मुझे बचाओ।”उनके करीबी दोस्त मनोज ने बताया कि सुबह उठने पर उन्हें मिस्ड कॉल्स दिखीं तब तक बहुत देर हो चुकी थी| एक अन्य पीड़ित, शिखा जैन के परिजन अनुज जैन ने बताया कि शिखा के पति नवीन जैन, जो एक कार्टन बॉक्स फैक्ट्री के मालिक हैं, बुरी तरह जल गए और इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी दोनों बेटियों ने इमारत से कूदकर जान बचाई।
बंद दरवाज़े और लोहे की सलाखें बने मौत का कारण
बचाव दल के एक दमकल कर्मी ने बताया कि बिजली जाने की वजह से सेंट्रल लॉक के दरवाज़े नहीं खुले और लिफ्ट भी बंद हो गई। फंसे हुए लोगों तक पहुँचने के लिए लोहे की सलाखें काटनी पड़ीं। इमारत की छत की तरफ जाने वाली सीढ़ी का दरवाज़ा भी बंद था, जिसके कारण कई लोग धुएँ से दम घुटने से मारे गए| एक चश्मदीद ने बताया कि उन्होंने रात 3:50 बजे 112 पर फोन किया, लेकिन ऑपरेटर यह पूछता रहा कि वे गाज़ियाबाद में हैं या दिल्ली में क्योंकि विवेक विहार सीमा पर स्थित है। तीन नंबर और दिए गए, जो काम ही नहीं कर रहे थे। दमकल विभाग करीब 15 मिनट बाद पहुँचा। तब तक स्थानीय लोगों ने गद्दे बिछाकर दो लड़कियों को कूदने में मदद की और उनकी जान बचाई। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार, नौ शव इमारत के विभिन्न हिस्सों फ्लैट्स और बंद छत की तरफ जाने वाली सीढ़ी से बरामद हुए।
जाँच और मुआवज़ा
विवेक विहार थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) (लापरवाही से मृत्यु) के तहत मामला दर्ज किया गया है और मैजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने PMNRF से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हज़ार रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा की। उपराज्यपाल वी के सक्सेना, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा सहित कई नेता मौके पर पहुँचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।
आम जनता में भारी आक्रोश “यह हत्या है, हादसा नहीं”
इस दर्दनाक घटना पर दिल्लीवासियों में गहरा आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने सिस्टम की विफलता पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि अगर 112 नंबर सही तरीके से काम करता, अगर भवन में आग से बचाव के इंतज़ाम होते, तो शायद ये जिंदगियाँ बचाई जा सकती थीं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के आँकड़े बताते हैं कि 2020-21 में 346 मौतें हुईं, 2021-22 में 591, 2022-23 में 1,029 और 2023-24 में 1,303 यानी पिछले 15 सालों में सबसे अधिक। विशेषज्ञों का कहना है कि मौतें अब आग से कम और ज़हरीले धुएँ से ज़्यादा हो रही हैं, क्योंकि आवासीय इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियाँ और खतरनाक भंडारण बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच आवासीय घनत्व और अग्नि सुरक्षा मानकों के बीच की खाई को तत्काल पाटना ज़रूरी है, वरना ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे।
विशेषज्ञों की राय: सुरक्षा नियम कागज़ पर, अमल शून्य
नगर नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की अधिकांश आवासीय इमारतों में अग्निशमन यंत्र नहीं हैं, आपातकालीन निकास बंद पड़े हैं और लोहे की सलाखें जो सुरक्षा के नाम पर लगाई जाती हैं आग के वक्त मौत का फंदा बन जाती हैं। विवेक विहार की इस इमारत में भी यही हुआ। जनता की माँग है कि दिल्ली की सभी बहुमंजिला आवासीय इमारतों का तत्काल फायर ऑडिट कराया जाए, दोषी बिल्डरों और मकान मालिकों पर सख्त कार्रवाई हो, और 112 हेल्पलाइन को पूरे दिल्ली-एनसीआर में बिना किसी ‘जूरिस्डिक्शन विवाद’के कार्यशील बनाया जाए।विवेक विहार की यह आग महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि वर्षों की प्रशासनिक लापरवाही और भवन सुरक्षा नियमों की अनदेखी का नतीजा है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, दिल्ली की गलियों में ऐसी चीखें गूँजती रहेंगी।
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