नोएडा: सांसद महेश शर्मा के करीबी प्रशांत त्यागी ने व्हाट्सऐप समूह में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई, पुलिस साइबर जांच में जुटी

नोएडा के सांसद डॉ. महेश शर्मा के निकट सहयोगी प्रशांत त्यागी ने शनिवार को स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक निजी व्हाट्सऐप ग्रुप में उनके और सांसद महेश शर्मा के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक संदेशों का प्रसार किया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि इन टिप्पणियों का उद्देश्य दोनों की छवि धूमिल करना और स्थानीय स्तर पर गलतफहमी फैलाना है। शिकायत के मुताबिक, ग्रुप में अपमानजनक टिप्पणियों के अलावा कुछ ऐसे कंटेंट भी साझा किए गए जिनसे मतभेद और राजनीतिक तनाव बढ़ सकते हैं। प्रशांत त्यागी ने घटना में नगर के ही एक अन्य भाजपा नेता या उसके समर्थकों की भूमिका का जिक्र किया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में ग्रुप एडमिन की भूमिका तथा संदेशों के असली स्रोत का पता लगाने का विशेष अनुरोध भी किया गया है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

शिकायत मिलते ही नोएडा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल को शामिल कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि व्हाट्सऐप चैट लॉग, ग्रुप एडमिन के व्यवहार, संदेशों के समय-निर्धारण और संभावित स्रोतों की जाँच की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारीयों ने बताया कि डिजिटल फोरेंसिक के माध्यम से जो भी आपत्तिजनक सामग्री मिली, उसके आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। अभी तक किसी गिरफ़्तारी की पुष्टि नहीं हुई है और मामले की पड़ताल जारी है।

पार्टी की अंदरूनी खींचतान का संकेत

स्थानीय राजनीतिक गलियारे में इस शिकायत को भाजपा के अंदरूनी मतभेद और क्षेत्रीय प्रभाव की लड़ाई का हिस्सा माना जा रहा है। यह मामला ऐसे समय में उठा है जब सांसद महेश शर्मा के आसपास के कुछ नाम पहले भी विवादों में रहे हैं। पिछले वर्षों में ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी से जुड़े श्रीकांत त्यागी के विवाद और पार्टी के कुछ अन्य स्थानीय नेताओं के बीच तनातनी की खबरें सामने आती रही हैं। इन घटनाओं ने क्षेत्र में राजनीतिक रिश्तों में दरारें उजागर की थीं और वर्तमान शिकायत से कुछ लोगों को पार्टी के भीतर पुरानी जकड़नें फिर उभरती दिख रही हैं।

पृष्ठभूमि और पिछले विवाद

नोट करने लायक है कि नोएडा और आसपास के इलाकों में सांसद महेश शर्मा के करीबी और स्थानीय नेताओं के बीच सोशल मीडिया-आधारित विवाद नई बात नहीं है। पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सोशल मीडिया पोस्ट व टिप्पणियों ने तनाव और शब्दबॉक्सिंग को जन्म दिया था। ऐसे मामलों ने सार्वजनिक मंचों और निजी समूहों दोनों में बहसें तेज कर दी हैं, जिनमें कभी-कभी हिंसा और प्रतिशोध की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं।

आगे की कार्रवाई

पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक विधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी यदि सामग्री आपत्तिजनक तथा मानहानिकारक साबित होती है। साथ ही ग्रुप एडमिन और संदेश भेजने वालों की पहचान होने पर उन्हें नोटिस जारी कर उनके मोबाइल व डिजिटल डेटा की जांच की सकती है। पुलिस ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की अपील की है।

विशेषज्ञों का कहना

कानून विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली मानहानिकारक सामग्री के खिलाफ शिकायत पर कार्रवाई संभव है। यह निर्भर करता है कि सामग्री किस प्रकार की है मानहानिप्रद बयान, झूठी सूचना, या अभद्र भाषा और क्या उसे जान-बूझकर प्रसारित कर किसी की प्रतिष्ठा को बदनाम करने का इरादा था। साइबर फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका ऐसे मामलों में निर्णायक होती है।

स्थानीय प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं में इस मामले को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ ने शिकायत की जोड़ीदारों का समर्थन किया और कहा कि विपक्षी तत्व सोशल प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि कुछ ने शांति और तथ्यों का इंतजार करने की बात कही। राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे भाजपा की स्थानीय सामरिक जद्दोजहद और प्रभाव के पुनर्वितरण की प्रक्रिया से जोड़ कर देख रहे हैं।मामला जांच के अधीन है। पुलिस द्वारा जांच पूरी होने और आधिकारिक बयान जारी होने के बाद ही घटनाक्रम के और भी निष्पक्ष व ठोस विवरण सामने आएंगे। इस रिपोर्ट के स्रोतों में स्थानीय अधिकारियों की जानकारी और प्रकाशित समाचारों का समावेश है।

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