तिरंगे का सम्मान सबसे ऊपर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को श्रीनगर में एक सार्वजनिक उद्घाटन समारोह के दौरान ऐसा काम किया जिसने मौजूद भीड़ का दिल जीत लिया और सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ हो रही है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पहुँचे उमर अब्दुल्ला जब उद्घाटन के लिए आगे बढ़े, तो उन्होंने देखा कि आयोजकों ने केसरिया, सफेद और हरे रंग के रिबन का उपयोग किया है। जैसे ही उन्हें कैंची थमाई गई, उन्होंने भारतीय ध्वज संहिता की मर्यादा का ध्यान रखते हुए रिबन को बीच से काटने से इनकार कर दिया। उन्होंने आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राष्ट्रीय प्रतीकों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस धागे का विरूपण नहीं होना चाहिए। इसके बाद, उन्होंने अत्यंत सावधानी और सम्मान के साथ रिबन की गाँठ को खोला, उसे करीने से तय किया और आयोजकों को वापस सौंप दिया।
कानूनी पहलू
कानूनी दृष्टिकोण से देखा जाए तो ‘भारतीय ध्वज संहिता, 2002’ और ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय ध्वज या उसके प्रतीकों के किसी भी प्रकार के अपमान, विरूपण या उसे काटने को प्रतिबंधित करते हैं। विशेषज्ञों ने उमर अब्दुल्ला के इस कदम को कानून की सूक्ष्म समझ और एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के कर्तव्य के रूप में देखा है।
सोशल मीडिया पर वायरल
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल गया है, जिसमें अब्दुल्ला की त्वरित सूझबूझ और राष्ट्रध्वज के प्रति उनके सम्मान की चहुँओर प्रशंसा हो रही है। PTI और ग्रेटर कश्मीर जैसी प्रमुख मीडिया एजेंसियों ने उनके इस व्यवहार को ‘क्विक थिंकिंग’ और देशभक्ति का उदाहरण बताया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे ‘फ्लैग रिस्पेक्ट’ का एक अनुकरणीय उदाहरण बता रहे हैं। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता हर सार्वजनिक कार्यक्रम में जरूरी है, चाहे आयोजक कितने भी सदिच्छा से सजावट क्यों न करें। यह छोटी-सी घटना एक बड़ा संदेश देती है कि राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान सिर्फ बड़े मंचों पर नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के छोटे-छोटे क्षणों में भी होता है।

