सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: SIR से नाम कटने से नागरिकता नहीं खत्म होती, केवल वोटर लिस्ट प्रभावित

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने का मतलब व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का अंत नहीं है। यह केवल चुनावी प्रक्रिया के लिए मतदाता योग्यता की जांच है, न कि नागरिकता छीनने की कार्रवाई। चुनाव आयोग (ECI) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे और सुनवाई के दौरान यह बात साफ हुई कि SIR प्रक्रिया आर्टिकल 326 के तहत केवल मतदाताओं की योग्यता सुनिश्चित करने के लिए है। यदि कोई व्यक्ति गैर-नागरिक पाया जाता है तो उसका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है, लेकिन इससे उसकी नागरिकता समाप्त नहीं होती। नागरिकता संबंधी अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकारियों या अदालतों द्वारा ही लिया जाएगा।

SIR क्या है और विवाद क्यों?

SIR अभियान चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को शुद्ध करने के लिए शुरू किया गया था, जिसमें मृत व्यक्तियों, डुप्लिकेट एंट्री और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। बिहार में इसकी शुरुआत 2025 में हुई, जहां लगभग 47 लाख नाम हटाए गए। अब यह देश के कई राज्यों में चल रहा है। विपक्षी दलों और कुछ याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया गरीबों, अल्पसंख्यकों और प्रवासियों को निशाना बना रही है तथा बड़े पैमाने पर नाम काटे जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में करीब 27 लाख नाम हटाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित करने का निर्देश दिया था, जहां हटाए गए मतदाता अपना पक्ष रख सकें।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

नागरिकता पर सीमित अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची के प्रयोजन के लिए ही नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन वह नागरिकता समाप्त नहीं कर सकता या डिपोर्टेशन नहीं कर सकता। ECI ने स्वीकार किया कि उसका दायरा सीमित है।

प्रक्रिया का पालन जरूरी: नाम हटाने से पहले उचित नोटिस, सुनवाई का अवसर और पारदर्शिता जरूरी है। अदालत ने ECI को हटाए गए नामों की सूची, कारण सहित प्रकाशित करने का निर्देश दिया है।

वोटिंग अधिकार पर असर: नाम हटने से वोटिंग अधिकार प्रभावित होता है, लेकिन व्यक्ति अपील, क्लेम या ऑब्जेक्शन के जरिए नाम बहाल करा सकता है। यह स्थायी रूप से वोटिंग अधिकार छीनने वाला नहीं है।

ECI का पक्ष

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIR “लिबरल और सॉफ्ट-टच” तरीके से किया जा रहा है। इसका मकसद केवल गैर-नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर रखना है, न कि किसी की नागरिकता पर हमला करना। ECI ने स्पष्ट किया कि SIR से किसी की नागरिकता (Citizenship Act, 1955 के तहत) प्रभावित नहीं होगी।

विशेषज्ञों और विपक्ष की चिंता

कुछ वकीलों और कार्यकर्ताओं (जैसे प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव) का कहना है कि बड़े पैमाने पर नाम कटने से अन्य अधिकारों (जैसे आधार, राशन, पहचान दस्तावेज) पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ECI की शक्तियों (आर्टिकल 324) को बरकरार रखते हुए इस सफाई अभियान को वैध माना है, बशर्ते पारदर्शिता बनी रहे।

क्या करें अगर आपका नाम कट गया?

BLO/ERO से संपर्क करें। अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील दायर करें। दस्तावेज जैसे आधार, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड आदि जमा करें।

ECI की वेबसाइट पर चेक करें और कारण जानें।

यह फैसला लोकतंत्र में मतदाता सूचियों की शुद्धता और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह प्रक्रिया जारी रहेगी, ताकि किसी योग्य नागरिक का हक न मारा जाए।

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