Rajpal Yadav Conviction Upheld: दिल्ली हाई कोर्ट ने अपील खारिज की, 3 महीने की सजा बरकरार, पूरी खबर पढ़ें

Rajpal Yadav Conviction Upheld: नई दिल्ली, बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव को चेक बाउंस के मामलों में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को उनकी अपील खारिज कर दी और निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने सात चेक बाउंस मामलों में अभिनेता की सजा को upheld किया, जिसमें तीन महीने की साधारण कैद शामिल है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। यह फैसला M/s Murali Projects Pvt Ltd द्वारा दायर मामलों से जुड़ा है। राजपाल यादव और उनकी पत्नी पर 2010 के आसपास फिल्म प्रोडक्शन के लिए ली गई करीब 5-9 करोड़ रुपये की लोन राशि नहीं चुकाने का आरोप है। चेक बाउंस होने पर 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और छह महीने की सजा सुनाई थी, जिसे सेशंस कोर्ट ने 2019 में बरकरार रखा। हाई कोर्ट में लंबी सुनवाई के दौरान कई बार सस्पेंशन और सेटलमेंट की कोशिशें हुईं, लेकिन अभिनेता बार-बार कमिटमेंट पूरा नहीं कर पाए।

कोर्ट का सख्त रुख

जस्टिस स्वराना कांता शर्मा की बेंच ने टिप्पणी की कि राजपाल यादव को कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने बार-बार भुगतान की प्रतिबद्धता तोड़ी। कोर्ट ने कहा कि अभिनेता ने “commitments को honour नहीं किया”। इससे पहले फरवरी 2026 में कोर्ट ने सरेंडर का आदेश दिया था, फिर मार्च में सब्स्टेंशियल पेमेंट के बाद अस्थायी राहत दी गई, लेकिन अप्रैल में और समय देने से इनकार कर दिया गया। हालिया सुनवाई में समझौते की अंतिम कोशिशें नाकाम रहीं, जिसके बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और आज सजा बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। अब अभिनेता को दोबारा जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है, हालांकि सजा के सस्पेंशन या आगे की अपील (जैसे सुप्रीम कोर्ट) का विकल्प बाकी है।

मामला क्या है?

पृष्ठभूमि: राजपाल यादव ने फिल्म निर्माण के लिए कंपनी से लोन लिया, लेकिन फिल्म फ्लॉप होने के बाद राशि नहीं लौटाई। इसके एवज में दिए गए चेक बाउंस हो गए। कुल राशि: विभिन्न रिपोर्ट्स में 5 करोड़ से 9 करोड़ रुपये तक का उल्लेख।
पिछले घटनाक्रम: 2024 में सजा सस्पेंड हुई, 2026 में सरेंडर, फिर आंशिक भुगतान (जैसे 1.5 करोड़, 4.25 करोड़) के आधार पर राहत, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका। राजपाल यादव ने जेल में रहते हुए वर्कशॉप्स आयोजित करने जैसी बातें पहले कही हैं और खुद को “फाइटर” बताया है, लेकिन कोर्ट ने उनके व्यवहार को “संदिग्ध” माना। यह मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स ऐक्ट की धारा 138 के तहत है, जिसमें चेक बाउंस पर सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। फैसले से बॉलीवुड इंडस्ट्री में चर्चा छिड़ गई है, जहां कई कलाकार आर्थिक मुश्किलों का शिकार होते दिखते हैं। फैसले के बाद राजपाल यादव की कानूनी टीम आगे के विकल्पों पर विचार कर रही है। पाठकों को सलाह है कि आधिकारिक कोर्ट अपडेट्स फॉलो करें।

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