अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की चार दिवसीय भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्हाइट हाउस का औपचारिक निमंत्रण मिला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यह निमंत्रण देते हुए रुबियो ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने का संकेत दिया। रुबियो आज कोलकाता होते हुए दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी के साथ सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर विस्तृत चर्चा की। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पुष्टि की कि रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया। यह निमंत्रण ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ महीनों में व्यापारिक टैरिफ, पाकिस्तान-चीन से संबंध और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण दोनों देशों के बीच कुछ तनाव देखा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि रुबियो की यह यात्रा संबंधों को मरम्मत और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कोलकाता से दिल्ली तक की यात्रा
रुबियो अपनी पत्नी जीनेट के साथ सबसे पहले कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने मदर टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी का दौरा किया। यह सांस्कृतिक और मानवीय संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद वे दिल्ली पहुंचे, जहां आज शाम प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात हुई। मुलाकात में व्यापार संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के आगामी विदेश मंत्रियों की बैठक (26 मई) की भी तैयारी की। QUAD फ्रेमवर्क के तहत क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
व्यापार और सुरक्षा पर फोकस
ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल और दूसरे टर्म में भारत-अमेरिका व्यापार पर टैरिफ के मुद्दे ने संबंधों को प्रभावित किया था। रुबियो ने आज की बैठक में इन मुद्दों को सुलझाने और द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने के लक्ष्य पर चर्चा की। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भी प्रमुख मुद्दा रहा, खासकर ईरान युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच। रक्षा क्षेत्र में पहले से मजबूत साझेदारी को और गहरा करने, संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर भी बात हुई। भारत अमेरिका का प्रमुख रक्षा साझेदार है और दोनों देश iCET (Initiative on Critical and Emerging Technology) जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए सहयोग बढ़ा रहे हैं।
पृष्ठभूमि
ट्रंप के दूसरे टर्म में भारत-अमेरिका संबंधों में उतार-चढ़ाव देखा गया। शुरुआती मुलाकातों में सौहार्द था, लेकिन टैरिफ नीतियों और पाकिस्तान-चीन से अमेरिका के जुड़ाव ने कुछ चुनौतियां पैदा कीं। रुबियो की यात्रा को इन चुनौतियों को दूर करने और साझा हितों—जैसे चीन की बढ़ती चुनौती और इंडो-पैसिफिक स्थिरता—पर फोकस करने का अवसर माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी पर जोर दिया है। व्हाइट हाउस निमंत्रण स्वीकार करने के बाद दोनों नेताओं के बीच आने वाले महीनों में उच्चस्तरीय बैठक की संभावना बढ़ गई है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगी बल्कि QUAD को भी नई गति प्रदान करेगी। दोनों देश अब व्यापार, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ठोस परिणामों की ओर बढ़ रहे हैं।
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