नोएडा। औद्योगिक क्षेत्र में भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। विभाग अब नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच के लिए वृहद स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी में जुट गया है।
बैठक में बनेगा अभियान का रोडमैप
सेक्टर-27 स्थित जिलाधिकारी के कैंप कार्यालय पर स्वास्थ्य विभाग और प्राइवेट अस्पतालों के प्रबंधकों के साथ एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में अभियान का पूरा रोडमैप तैयार किया जाएगा। चाइल्ड पीजीआई, जिला अस्पताल, ईएसआई समेत अन्य प्रमुख अस्पतालों के प्रबंधकों को बैठक में शामिल होने के लिए संदेश भेजे जा चुके हैं।
11 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां, लाखों श्रमिक
नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र फेज-वन, टू और थ्री में गारमेंट, केमिकल, वाहन और अन्य उत्पादों की कुल 11,098 इकाइयां संचालित हैं। इन तीनों फेज में काम करने वाले हजारों श्रमिक पिछले कई दिनों से वेतन वृद्धि समेत अन्य मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे।
13 अप्रैल को भड़की हिंसा
श्रमिकों का आंदोलन 13 अप्रैल की सुबह उस समय हिंसक रूप ले गया जब फेज-दो स्थित मदरसन कंपनी के बाहर श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और जगह-जगह हिंसा, तोड़फोड़, बवाल और आगजनी की घटनाएं सामने आने लगीं। इस हिंसक झड़प में कई श्रमिक प्रभावित हुए, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने श्रमिकों की स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया।
श्रमिकों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि प्रभावित श्रमिकों को समय पर चिकित्सा सहायता मिले। स्वास्थ्य अभियान के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों की भागीदारी से बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाने की योजना है। प्रशासन की कोशिश है कि औद्योगिक क्षेत्रों में हालात सामान्य होने के साथ ही श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी मिले।

