नोएडा एयरपोर्ट का असर: जेवर में खेती की जमीन की खरीद दोगुनी, नोएडा में औद्योगिक भूखंडों की बिक्री ने बनाया रिकाॅर्ड

नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण का असर अब जमीन के बाजार पर साफ दिखने लगा है। भले ही एयरपोर्ट का उद्घाटन के अब तक फ्लाइट न उड़ी हो लेकिन जेवर और आसपास के इलाकों में खेती की जमीन की खरीद में वित्तीय वर्ष 2024-25 के मुकाबले 2025-26 में दोगुनी से अधिक तेजी दर्ज की गई है। इसके साथ ही नोएडा में औद्योगिक भूखंडों की मांग ने भी तेजी पकड़ी है।

औद्योगिक भूखंडों की बिक्री में जबरदस्त उछाल
नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 925 औद्योगिक भूखंड बिके हैं, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह संख्या मात्र 472 थी। यानी एक साल में ही औद्योगिक भूखंडों की बिक्री लगभग दोगुनी हो गई है। हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इनमें से अधिकांश भूखंड रि.सेल यानी पुनर्विक्रय के जरिए खरीदे गए हैं, न कि सीधे प्राधिकरण से।

यमुना और ग्रेनो में सुस्त रहा बाजार
जहां नोएडा में औद्योगिक भूखंडों की बिक्री का आंकड़ा 925 तक पहुंचा। वहीं यमुना और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में इस वित्तीय वर्ष केवल 86 औद्योगिक भूखंड ही बिक सके। यह आंकड़ा दोनों प्राधिकरणों में औद्योगिक निवेशकों की अपेक्षाकृत कम दिलचस्पी को दर्शाता है।

एयरपोर्ट से जेवर की जमीन हुई “सोना”
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की वजह से जेवर इलाके में खेती की जमीन निवेशकों की पहली पसंद बन गई है। एयरपोर्ट के आसपास के गांवों में कृषि भूमि की खरीद में भारी इजाफा हुआ है। निवेशकों को उम्मीद है कि एयरपोर्ट चालू होने के बाद इस जमीन की कीमतें और भी तेजी से बढ़ेंगीए जिसके चलते अभी से ही जमीन की होड़ मची हुई है।

विशेषज्ञों की राय
रियल एस्टेट जानकारों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण पूरे क्षेत्र में जमीन की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी। औद्योगिक और कृषि दोनों श्रेणियों में निवेशकों की सक्रियता इस बात का संकेत है कि जेवर.नोएडा कॉरिडोर अब निवेश का नया हॉटस्पॉट बन चुका है।

 

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