नोएडा प्राधिकरण ने आवंटित प्लॉटों पर समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित कराने के लिए निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब तक प्लॉटों पर निर्माण कार्य की जांच और निगरानी की जिम्मेदारी नियोजन विभाग के पास थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत यह जिम्मेदारी संबंधित वर्क सर्किल अधिकारियों को सौंप दी गई है। प्राधिकरण का उद्देश्य खाली पड़े प्लॉटों पर अंकुश लगाना और समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा कराना है।
3 से 5 वर्ष में निर्माण पूरा करना अनिवार्य
प्राधिकरण के नियमों के अनुसार, किसी भी आवंटी को लीज डीड होने के बाद निर्धारित अवधि, यानी 3 से 5 वर्ष के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होता है। इसके बावजूद कई आवंटी केवल निवेश या भविष्य में अधिक कीमत पर बिक्री के उद्देश्य से प्लॉटों को वर्षों तक खाली छोड़ देते हैं, जिससे क्षेत्र का नियोजित विकास प्रभावित होता है।
वर्क सर्किल अधिकारी करेंगे मौके पर जांच
नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत संबंधित वर्क सर्किल अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे। वे यह जांच करेंगे कि आवंटी ने भवन का नक्शा स्वीकृत कराया है या नहीं, निर्माण कार्य शुरू हुआ है या नहीं तथा उसकी वर्तमान स्थिति क्या है। निरीक्षण के बाद अधिकारी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर महाप्रबंधक (जीएम) और एसीईओ को भेजेंगे, ताकि समय सीमा का उल्लंघन करने वाले आवंटियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
निवेश के लिए खाली प्लॉट छोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
प्राधिकरण का मानना है कि कई लोग केवल निवेश के उद्देश्य से प्लॉट खरीदकर वर्षों तक खाली छोड़ देते हैं। इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि आसपास की आधारभूत सुविधाओं के बेहतर उपयोग में भी बाधा आती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों की नियमित निगरानी होगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शहर के नियोजित विकास को मिलेगा बढ़ावा
नई व्यवस्था से नोएडा में आवंटित प्लॉटों पर समय पर निर्माण कार्य पूरा कराने में मदद मिलेगी। इससे शहर का नियोजित विकास तेज होगा, खाली पड़े प्लॉटों की संख्या घटेगी और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।

