नोएडा प्राधिकरण और फैक्ट्री मालिक की साठगांठ: गाँव का पानी फैक्ट्रियों में डाइवर्ट, अवैध गेट और प्रदूषण से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

नोएडा: नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और औद्योगिक इकाइयों के बीच कथित मिलीभगत का एक बड़ा मामला सामने आया है। सेक्टर-58 स्थित मोजेक फर्नीचर कंपनी (C-57) द्वारा ग्रामीणों के हक के पानी पर डाका डालने और अवैध गतिविधियों को अंजाम देने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामवासियों में भारी आक्रोश है और किसी भी वक्त बड़े आपसी टकराव की स्थिति बन सकती है।

ग्रामीणों की प्यास बुझाने वाली लाइन से फैक्ट्री को ‘अवैध’ कनेक्शन

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि गाँव में पहले से ही पानी की भारी किल्लत चल रही है। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, लेकिन नोएडा प्राधिकरण के सुपरवाइजर और आला अधिकारियों की शह पर गाँव की मुख्य पानी की लाइन से सेक्टर-58 स्थित C-57, मोजेक फर्नीचर कंपनी को पानी का कनेक्शन दे दिया गया है। ग्रामीणों के कड़े विरोध के बावजूद प्राधिकरण के कर्मचारी और अधिकारी गाँव के हिस्से का थोड़ा-बहुत पानी भी जबरन फैक्ट्रियों में सप्लाई करने की कोशिशों में जुटे हैं।

आबादी की तरफ अवैध गेट: ट्रकों का जमावड़ा और रोज़ का विवाद

मामला सिर्फ पानी की चोरी तक सीमित नहीं है। मोजेक फर्नीचर कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर अपना एक बड़ा गेट सीधे गाँव की आबादी वाली सड़क की तरफ खोल रखा है, जो कि पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

  • इस अवैध गेट के कारण चौबीसों घंटे कंपनी के बड़े-बड़े ट्रक और कमर्शियल वाहन गाँव के रास्तों पर खड़े रहते हैं।
  • इन वाहनों की वजह से गाँव का मुख्य आवागमन पूरी तरह बाधित हो चुका है और हर दिन जाम की स्थिति बनी रहती है।
  • रास्ते के विवाद को लेकर ग्रामीणों और कंपनी के ड्राइवरों/कर्मचारियों के बीच आए दिन कहासुनी और मारपीट की नौबत आ जाती है।

पैसे और रसूख की धौंस: ग्रामीणों को दी जा रही धमकियां

ग्रामीणों ने बताया कि जब भी वे इस मनमानी का विरोध करते हैं, तो मोजेक फर्नीचर के मालिक अपने पैसे, ऊंची पहुंच और नोएडा प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारियों के रसूख का डर दिखाते हैं। आरोप है कि कंपनी मालिक द्वारा सीधे तौर पर ग्रामवासियों को धमकाया जाता है और उनके साथ असामाजिक रवैया अपनाया जाता है। इस तानाशाही रवैये के कारण गांव के युवाओं और ग्रामीणों में असंतोष चरम पर है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल आशंका पैदा हो गई है।

प्रदूषण से फैला जहर, प्राधिकरण के नोटिस भी बेअसर

फैक्ट्री से निकलने वाले खतरनाक प्रदूषण (हवा और ध्वनि) ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। प्रदूषण के कारण गाँव के बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद नोएडा प्राधिकरण ने कंपनी को कई बार नोटिस भी जारी किए हैं। लेकिन मोटी सांठगांठ के चलते आज तक न तो वह अवैध गेट बंद कराया गया और न ही प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगी। प्राधिकरण के नोटिस महज कागजी खानापूर्ति साबित हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

थक-हारकर अब ग्रामवासियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्राधिकरण ने तुरंत हस्तक्षेप कर मोजेक फर्नीचर का अवैध गेट बंद नहीं कराया, पानी का कनेक्शन नहीं काटा और प्रदूषण पर लगाम नहीं लगाई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन की होगी।

 

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