दिल्ली-एनसीआर में भीषण तूफान का कहर: नोएडा में सैकड़ो पेड़ उखड़े, बिजली पोल ध्वस्त, ग्रेटर नोएडा में अवैध होर्डिंग गिरे, पाँच दिन पहले की चेतावनी की अनदेखी पड़ी भारी

चेतावनी के बावजूद नहीं जागा प्रशासन, आंधी बनी ‘मौत का तूफान’,घाटकोपर की याद,  इतिहास फिर दोहराया?

दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुरुवार की दोपहर अचानक आए भयंकर आंधी-तूफान ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में दोपहर करीब 3 बजे अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। तेज आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर की रफ्तार थाम दी। 70 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने उन सभी कमज़ोरियों को उघाड़ दिया, जिन्हें प्रशासन ने वर्षों से ढककर रखा था, अवैध होर्डिंग, बिना छँटाई के खड़े विशाल पेड़, और सड़कों के किनारे खड़े जर्जर यूनिपोल।

तांडव के आँकड़े: नुकसान की भयावह तस्वीर

नोएडा में करीब सैकड़ो पेड़ उखड़कर गिर गए, जबकि दादरी, दनकौर, रबूपुरा और जेवर क्षेत्र में भी सैकड़ो की संख्या में बिजली पोल तथा ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। नोएडा के सेक्टर-87 से सेक्टर-122 तक कई सड़कों पर दो फीट तक पानी भर गया। जलभराव के चलते वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसना पड़ा। सेक्टर-76 मेट्रो स्टेशन के पास एक बड़ा पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्पेक्ट्रम मॉल के पास कई विशालकाय पेड़ उखड़कर मुख्य सड़क पर गिर गए, जिससे लंबा जाम लग गया। सेक्टर-71 के मेट्रो अपार्टमेंट के पास तिकोना पार्क की दिशा से एक भारी पेड़ दीवार से टकराया, दीवार ढह गई और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

होर्डिंग का कहर: पाँच दिन पहले दी थी चेतावनी, पर नहीं सुनी किसी ने

इस तूफान की सबसे चौंकाने वाली कहानी ग्रेटर नोएडा वेस्ट से आई। आंधी-तूफान के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का एक विशाल विज्ञापन बोर्ड गिर गया, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। लेकिन असली सवाल यह है कि यह दुर्घटना होने की आशंका पाँच दिन पहले ही जता दी गई थी। गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA) को पत्र लिखकर और सोशल मीडिया के ज़रिए चेताया था कि एनएक्स वन (NX One) परियोजना का विशाल होर्डिंग बारिश और तूफान की स्थिति में कभी भी गिर सकता है। समिति की अध्यक्ष रश्मि पांडेय, सचिव अनूप सोनी और उपाध्यक्ष हिमांशु राजपूत ने संयुक्त रूप से लिखा था,  “यह होर्डिंग हादसे को न्योता देता प्रतीत हो रहा है। बारिश और तूफान में इतने बड़े होर्डिंग किसी भी व्यस्त सड़क पर गिर सकते हैं।” प्रशासन ने इस चेतावनी पर न कोई जाँच की, न कोई कार्रवाई। परिणाम सामने था,  उसी दिन दो-दो होर्डिंग गिरने की घटनाएँ हुईं। एनएक्स वन का होर्डिंग उखड़ा, और कुछ ही घंटों बाद एक अन्य भारी यूनिपोल एक माल से भरे टेंपो पर आ गिरा, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। गौर सिटी के पास एक और होर्डिंग एक रिक्शे पर गिरा।

मौत की दहलीज पर खड़ा रहा शहर

मौसम विभाग (IMD) ने 4 जून के लिए दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया था। लेकिन यह अलर्ट केवल मौसम विभाग की वेबसाइट तक सिमटा रहा, आम जनता के मोबाइल फोन पर कोई इमरजेंसी अलर्ट नहीं पहुँचा। नोएडा के कई सेक्टरों में वर्षों से बिना छँटाई के खड़े विशाल पेड़ आँधी में धराशायी हो गए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह किसी भी क्षण बड़ी त्रासदी में बदल सकता था। गौतम बुद्ध नगर जिले में तूफान से जुड़ी घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। ग्रेटर नोएडा में एक 60 वर्षीय महिला और उनके चार वर्षीय पोते की मौत उस समय हो गई जब एक 21 मंजिला इमारत से भारी ग्रिल उन पर गिरी। दादरी में एक डीएवी स्कूल शिक्षक रामकिशन की भी पेड़ गिरने से मौके पर ही मौत हो गई। 

प्रशासन का दावा, ज़मीनी हकीकत कुछ और

नोएडा प्राधिकरण ने त्वरित कार्रवाई का दावा किया है और कहा है कि प्रत्येक सेक्टर की जाँच की जा रही है तथा रात तक टूटे पेड़ और शाखाएँ हटा ली जाएंगी। बिजली विभाग (PVVNL) ने भी पोल टूटने और लाइन क्षति की पुष्टि करते हुए बहाली कार्य जारी बताया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार केरल में मानसून के आगमन के बाद उत्तर भारत में नमी बढ़ गई है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में प्री-मानसून गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। यह मौसमी बदलाव 6 जून तक बने रहने की संभावना है।  ऐसे में यदि समय रहते जोखिमग्रस्त ढाँचों और पेड़ों की पहचान और रखरखाव किया गया होता, तो इन हादसों से बचा जा सकता था।

घाटकोपर की याद — इतिहास फिर दोहराया?

मई 2024 में मुंबई के घाटकोपर में एक 100 फुट ऊँचा अवैध होर्डिंग तूफान में उखड़कर एक पेट्रोल पंप और आसपास के मकानों पर गिर गया था, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई थी और 59 से अधिक घायल हुए थे। उस त्रासदी के बाद देशभर में होर्डिंग सुरक्षा ऑडिट की माँग उठी थी। लेकिन नोएडा-ग्रेटर नोएडा में वही लापरवाही बदस्तूर जारी रही। नागरिकों का आरोप है कि नोएडा प्राधिकरण और संबंधित विभाग पैसे लेकर अवैध होर्डिंग लगाने की अनुमति देते हैं या उन्हें नज़रअंदाज करते हैं।

नागरिकों की माँग: सुरक्षा ऑडिट अभी, जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा

घटना के बाद स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर मांग उठाई है, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और पूरे एनसीआर में लगे सभी बड़े होर्डिंग, यूनिपोल और विज्ञापन ढाँचों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। चेतावनी को नज़रअंदाज करने वाले अधिकारियों पर आपराधिक लापरवाही का मुकदमा दर्ज हो। मानसून से पहले सड़कों के बीच खड़े सभी अवैध यूनिपोल और जर्जर होर्डिंग हटाए जाएँ। IMD की चेतावनियाँ सीधे नागरिकों के मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट के रूप में भेजी जाएँ।

सवाल जो अनुत्तरित हैं

दो-दो होर्डिंग गिरने की घटनाएँ, सैकड़ों पेड़ों का उखड़ना और तीन कीमती जानें जाना, यह सब केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है। नोएडा से लेकर ग्रेटर नोएडा तक प्रशासन और प्राधिकरण की तैयारियों की पोल इस तूफान ने खोल दी। यह घटना अनियोजित शहरी विकास, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता का सम्मिलित परिणाम है। सबसे बड़ा सवाल वही है जो हर बार पूछा जाता है, जब चेतावनी दी जा चुकी थी, जब खतरा दिख रहा था, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर इन हादसों में और जानें जाती, तो जिम्मेदारी कौन लेता?,मानसून दस्तक दे रहा है। समय है कि प्रशासन हादसे का इंतज़ार करने के बजाय, पहले से तैयारी की संस्कृति अपनाए, वरना यह तूफान आखिरी नहीं होगा। नागरिकों से अपील है कि वे टूटे पेड़ों और बिजली के तारों के पास न जाएँ और यातायात नियमों का पालन करें। राहत एवं बचाव कार्य जारी है।

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