लेबनान में महीनों से जारी इज़राइल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष के बीच एक नया युद्धविराम समझौता हुआ है। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि एक राजनयिक ने सीबीएस न्यूज़ को बताया कि इज़राइल और हिज़्बुल्लाह ने लेबनान में युद्धविराम पर सहमति जताई है, जिसकी पहली रिपोर्ट रॉयटर्स ने दी थी, और यह समझौता शुक्रवार सुबह नौ बजे से लागू होने वाला था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार रात कहा था कि उन्हें लेबनान, हिज़्बुल्लाह और इज़राइल समेत सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम की उम्मीद है।
ऐलान से पहले खूनी रात
यह घोषणा ऐसे वक्त हुई जब उससे पहले की रात बेहद हिंसक रही। दक्षिण लेबनान में हिज़्बुल्लाह के हमले में इज़राइली टैंक क्रू के चार सैनिक मारे गए, जिनमें एक बटालियन कमांडर भी शामिल था। जवाब में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया इज़राइली सेना ने रातभर में हिज़्बुल्लाह के 80 से ज़्यादा ठिकानों पर हमले किए और दर्जनों लड़ाकों को मारने का दावा किया, साथ ही शुक्रवार सुबह बेका वैली में हिज़्बुल्लाह के कमांड सेंटरों पर भी हमला किया गया। नेतन्याहू ने इसे हिज़्बुल्लाह की “युद्धविराम की खुली अवहेलना” बताया, जबकि रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा कि सेना दक्षिण लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में बनी रहेगी और हर उल्लंघन का सख्त जवाब दिया जाएगा। उधर, इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर की कथित टिप्पणी कि “पूरा लेबनान जल जाना चाहिए,” को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इज़राइल की “स्थायी युद्ध” की मंशा बताते हुए आड़े हाथों लिया।
ईरान-अमेरिका डील पर भी पड़ी छाया
यह झड़प सिर्फ लेबनान तक सीमित नहीं रही, इसका असर अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी पड़ा। लेबनान में हुई इन झड़पों के बाद ईरान और अमेरिका के बीच शुक्रवार को होने वाली अगले दौर की वार्ता टाल दी गई, और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की स्विट्ज़रलैंड यात्रा भी रद्द कर दी गई। कई अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि लेबनान में जारी लड़ाई के कारण ईरान ने ही यह वार्ता स्थगित की। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने भी अमेरिका से अपील की कि वह इज़राइल पर दबाव बनाए ताकि वह हिज़्बुल्लाह के साथ लड़ाई बंद करे और अमेरिका-ईरान समझौते का सम्मान करे।
बार-बार टूटा है युद्धविराम
यह 2026 का पहला युद्धविराम प्रयास नहीं है। मार्च की शुरुआत में लेबनान में नए सिरे से युद्ध भड़कने के बाद: 16 अप्रैल को पहला 10-दिवसीय युद्धविराम हुआ, 23 अप्रैल को इसे तीन हफ्ते के लिए बढ़ाया गया, 15 मई को इसे 45 दिन के लिए और बढ़ाया गया, 1 जून को इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच एक और समझौता हुआ, जिसमें इज़राइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों को निशाना न बनाने और हिज़्बुल्लाह ने इज़राइल पर हमला न करने का वायदा किया, लेकिन हर बार समझौता ज़मीन पर टिक नहीं सका। हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा था कि दक्षिण लेबनान से लड़ाकों को हटना “हार और दुश्मन के मक़सद को पूरा करना” होगा, और उनकी पार्टी ने प्रतिरोध बंद करने का कोई वायदा नहीं किया जब तक कब्ज़ा जारी है। हिज़्बुल्लाह बार-बार दक्षिण लितानी नदी क्षेत्र से हटने और निरस्त्रीकरण की शर्तों को “अपमानजनक” बताते हुए ठुकराता रहा है, जबकि इज़राइल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा सीमा में तब तक बना रहेगा जब तक ज़रूरी समझे।
अब तक की तबाही
2 मार्च से शुरू हुई इस ताज़ा जंग में लेबनान में 3,500 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग बेघर हुए हैं, जबकि इज़राइली सेना ने देश के लगभग पाँचवें हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है जो, 1982-2000 के इज़राइली कब्ज़े के बाद सबसे गहरी घुसपैठ है। इस संघर्ष का तार ईरान युद्ध से भी जुड़ा है, जो खुद अप्रैल में हुए अमेरिका-ईरान संघर्षविराम के बाद से तनावपूर्ण ढंग से चल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि बार-बार टूटते युद्धविरामों के इतिहास को देखते हुए इस नए समझौते का भविष्य भी अनिश्चित है, खासकर तब, जब इसके ऐलान से कुछ ही घंटे पहले दोनों पक्षों के बीच खूनी झड़प हुई हो।

